Khoobsurat [part 144]

आज तो लगभग ,कुमार की मौत का ख़ुलासा हो ही गया था किन्तु साथ ही चांदनी को जब पता चला कैसे  और किन परिस्थितियों में ये सब हुआ,तब वो थोड़ी गंभीर हो गयी। उसे शिल्पा से सहानुभूति थी किन्तु अपराध तो अपराध ही होता है।  तब वो कल्याणी जी से पूछती है - शिल्पा का क्या हुआ, ऐसी हालत में तो कहीं ,उसका बच्चा गिर तो नहीं गया होगा। 

नहीं, बच्चा तो नहीं गिरा किन्तु उसकी हालत और बिगड़ गयी ,उसे अस्पताल में भर्ती किया।  उसका छठवाँ  महीना चल रहा था, यह तो शुक्र मनाओ ! उसके बच्चे को कुछ नहीं हुआ। 


तब कुमार की लाश ,आगरा से इतनी दूर कैसे पहुंची ?ये बात कुछ समझ नहीं आई। 

उसका चेहरा बुरी तरह बिगड़ चुका था ,तब मैंने आदमियों के कपड़े पहने और अँधेरे की प्रतीक्षा की ,तब तक उसे मैंने बोरे में भर दिया था। तब मैंने दो आवारा ,अनजान शराबियों को पकड़ा और उन्हें एक -एक हज़ार रूपये दिए और कहा - ये कूड़ा किसी सुनसान जगह पर फ़ेंक आओ !

क्या वो देख नहीं सके ? कि इस बोरे  में लाश है। 

हट्टे -कट्टे शराबी थे ,शराब के लिए हज़ार रूपये और मिल गए ,देखकर भी क्या करते ? देखा भी हो ,समझा भी हो, किन्तु मैं तब तक वहां से गायब हो चुकी थी। हो सकता है ,इस केस में कहीं वो ही न फंस जाएँ इसीलिए  ऐसी जगह जाकर फेंका होगा ,जहाँ उन्हें कोई देख न सके। अपने फंसने के डर से दूर ले जाकर कहीं फ़ेंक दिया होगा।

 तभी तो आप लोग ! इस केस को ,आज तक सुलझा नहीं सके किन्तु आज न जाने कैसे तुमने मुझे पकड़ा ही लिया।  अब बताइये ! मेरी बेटी कहाँ है ?तब मुस्कुराते हुए बोली - मुझसे झूठ बोलकर मुझे, मेरी बेटी के बहाने मुझे यहाँ लाये हो ,न... क्योंकि मैं जानती हूँ। आप लोगों को मेरी बेटी मिली ही नहीं होगी ,पूरे विश्वास के साथ कल्याणी बोली। 

जब तुम्हें लगता है ,हमें, तुम्हारी बेटी नहीं मिली होगी ,तब तुम हमारे साथ यहाँ क्यों आई ?

हँसते हुए कल्याणी बोली -वो तो मैं दिखलाना चाहती थी ,कि मैं अपनी बेटी के लिए परेशान हूँ और उससे मिलने के लिए आतुर भी हूँ। यदि ऐसा न करती ,तो आप लोगों को शक नहीं हो जाता कि इसे तो अपनी बेटी की कोई परवाह ही नहीं है। 

अच्छी कलाकार हो ,वैसे ये बताओ ! तुम्हारी बेटी के साथ क्या हुआ ? वो फिर' लाल रंग' से क्यों डरने लगी ?

 वो ' डिप्रेशन' में चली गई थी, उसका हमें बहुत ध्यान रखना पड़ रहा था,जब उसे होश आता  , तभी वो चिल्लाती  -उसे मार डाला ,वो मर गया ,वो ख़ून....! 

डॉक्टर ने पूछा -ये, ऐसा क्यों कर रही है ?

तब मैंने उन्हें बताया -इसे लगता है ,इसका होने वाला बच्चा मर गया है। न जाने ,कैसे इसके अंदर डर बैठ गया है ? उसके लिए मैंने एक विशेष परिचारिका  रखी थी। जैसे ही वह थोड़ा स्वस्थ हुई, मैंने इसे नैनीताल भेज दिया ,ताकि वहां रहकर शांत रहे। 

मुझसे,शिल्पा ने , कुमार के विषय में पूछा -तब मैंने बताया ,वो तो अपनी बीवी -बच्चे के पास लौट गया है ,कह रहा था -'जब तुम्हारा बच्चा होगा ,वो तुम्हें लेने आएगा। ' तब तक अपना और इस बच्चे का ख़्याल रखे। 

क्या शिल्पा उसकी मौत के उस हादसे को भूल गयी थी ?

नहीं ,भूली नहीं ,किन्तु स्पष्ट स्मरण भी नहीं था,जब उसने कहा -कुमार ! को क्या हुआ ?उसका खून !बह रहा था। 

तब मैंने ही उसे बताया ,वो अपने परिवार के साथ है ,उसे कुछ नहीं हुआ है ,वो खून ! तुमने सपने में देखा होगा किसी का कोई ख़ून नहीं हुआ है।वो भर्मित थी।  

अच्छी योजना रही ,तुमने अपनी बेटी की हर परिस्थिति का लाभ उठाया। 

अब तो मुझे, मेरी बेटी से मिलवा दीजिये ,वो व्यंग्य से मुस्कुराई। 

मिलवाते हैं ,कहते हुए चांदनी ने अपनी सहकर्मी की तरफ इशारा किया। वो तो कल्याणी जी की बेटी को लेने चली गयी।

कुछ देर के पश्चात ,उनके सामने रोहिणी खड़ी थी। उसे वहां देखकर कल्याणी जी चौंक गयीं और पूछा -ये यहां क्या कर रही है ?

तुम ही तो अपनी बेटी से मिलना चाहती थीं। 

ये मेरी बेटी नहीं है ,ये तो... रोहिणी.... है ,वो हड़बड़ाकर बोलीं। 

कल्याणी जी !अब झूठ बोलने से कोई लाभ नहीं है ,हमने सब पता कर लिया है और इसने भी स्वीकार कर लिया है यही शिल्पा ,तमन्ना ,यामिनी और अब रोहिणी है।

 नहीं,ये मेरी शिल्पा नहीं ,कहते हुए उनके लब थरथरा गए।  

आपको अपनी बेटी के रूप रंग से कुछ लेना- देना नहीं था ,आपको तो  सिर्फ अब इसे मौत के मुंह से बचाना था। वही कार्य आपने किसी एक डॉक्टर से करवाया ,इसका बच्चा जन्मता उससे पहले ही आपने इसके चेहरे से फिर से छेडख़ानी करवा दी और ये रोहिणी बन गयी , फिर से वही साधारण रूप रंग वाली रोहिणी बन गई। 

नहीं, ऐसा नहीं है, मैं नहीं जानती, मेरी बेटी कहां है ?उसे तो आपको ढूंढकर लाना था। 

लाये तो हैं।  हमने, तुम्हें बताया तो था कि हम जानते हैं-' तुम्हारी बेटी कहां है ?'

जब हम लोग आपसे  प्रश्न कर रहे थे ,तब भी आपकी बेटी यहीं थी और अब आपकी बेटी को आपसे मिलवा दिया तो पहचान ही नहीं रहीं हैं। आपने इसके इतने रंग और नाम बदलवाए ये स्वयं ही अपनी पहचान खो चुकी है।

 आपकी बेटी भी ,आपकी तरह कुछ भी बताने के लिए तैयार नहीं थी। माँ पर जो गयी है ,तब हमने इसकी मानसिक स्थिति का लाभ उठाया। अभी भी ये 'लाल रंग 'देखकर बोेखला जाती है। इसके मष्तिष्क में अभी भी कुछ तस्वीरें कैद हैं। जैसे कि कुमार की मौत ,उसका बहता लहु ,रंजन की मौत ,उसकी गर्दन में लगा वो चाकू ! और जब वे तस्वीरें और विचार इस पर हावी होते हैं। तब ये अपना दिमाग़ी संतुलन खो बैठती है और लाल रंग को देखकर ,कभी -कभी डरती है ,तो कभी -कभी चीखने लगती है।  

 आपके आने से पहले , दूसरे कमरे में  हमारी, रोहिणी से बात हो रही थी  किंतु रोहिणी कुछ भी बताने के लिए तैयार नहीं थी। 'मानसिक चिकित्सक' से मिलकर हमने अपनी यह समस्या भी हल कर ली।  उसे सम्मोहित करके उसके मुंह से काफी कुछ उगलवा लिया था। 

तभी कल्याणी जैसे अपनी जीत पर मुस्कुराई और बोली - लेकिन इसका यह बयान मान्य नहीं होगा। 

आपने हमारी पूरी बात नहीं सुनी ,मैंने अभी कुछ देर पहले आपसे पूछा था -आपकी बेटी 'लाल रंग ''से अब भी डरती है और आपने इस बात का कोई विरोध नहीं किया। क्या आप तब भी नहीं समझीं ? कि आपकी बेटी की इस कमज़ोरी का हमें कैसे पता चला ? अबकी बार चांदनी मुस्कुराई। 

 इसके होश में रहते हुए ,उस सच्चाई को मालूम करना आवश्यक था। ये तो कुछ भी नहीं बोल रही थी बिल्कुल शांत थी और पूछ रही थी - मेरा बेटा कहां है ? -मैं यहां कैसे आई ?मेरे साथ तुम लोगों ने धोखा किया है।अब तक वो जानती नहीं थी, कि कल्पित कौन है ?किन्तु अब हमारे साथ खड़े देखकर वो जान गयी थी , कल्पित भी पुलिस का ही आदमी है।


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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