मेरी बेटी ,शिल्पा को उसका पहला प्यार कुमार मिला ,उसके लिए यही बहुत था वो उसके क़रीब आ रहा था। प्यार की इससे बड़ी और क्या, परिभाषा होगी ? मेरी बेटी ने उसके पहले रूखे व्यवहार को भुला दिया। उससे कोई अभिलाषा भी नहीं रखी ,न ही कोई शर्त रखी। वह अपने प्यार को जीने लगी,उसके साथ जीना चाहती थी और अब वो दोनों आपस में एक दूसरे से मिलने लगे। सबसे पहले वह जयपुर में मिले थे, फिर आगरा में और फिर न जाने कितने शहरों में,मेरी बेटी अक़्सर कुमार के लिए ही यहाँ आने लगी। कुमार भी कई बार विदेश में, उससे मिलने गया था।
तुम्हारी बेटी ने जो किया ,क्या वह गलत नहीं था ? जबकि उसे पता था कि कुमार शादीशुदा है और उसकी खुद की सहेली 'मधुलिका' उसकी पत्नी बनी हुई है, फिर उसने यह सब क्यों किया ? चांदनी ने गुस्से से कहा।
क्या सब सही -गलत शिल्पा के लिए ही है ? मधुलिका ने क्या, उसके साथ गलत नहीं किया ?उसकी सहेली होकर उसके प्यार को छीना और उससे शादी भी रचा ली । इसी प्रकार मेरी बेटी ने भी, उससे, अपने कुमार को छीन लिया।
तब यह प्यार कहाँ हुआ ? तब तो वह 'बदले की भावना' से आगे बढ़ रही थी।
नहीं ,उसका प्यार था, उसने सच्चे मन से कुमार से प्रेम किया था किन्तु तुम्हारे सवाल का जबाब देने के लिए मैंने कहा -क्या सब सही -गलत उसी के लिए हैं ,ऐसा उसकी सहेली भी तो सोच सकती थी।
तुम किस तरह की माँ हो ?जो अपनी बेटी को समझाने के बजाय, उसे उचित-अनुचित बताने के बदले , तुम उसका समर्थन करती हो, तुम इसे सहयोग देती हो, जबकि कुमार ही तुम्हारी बेटी से प्यार नहीं करता था।
मैंने आपकी बात मानी ,वह उस समय शिल्पा से प्यार नहीं करता था किंतु यामिनी से प्यार तो करता था और जिस तरह मधुलिका ने शिल्पा का प्यार छीना ,इस तरह से यामिनी ने मधुलिका का प्यार छीन लिया तो इसमें गलत क्या है ?हिसाब बराबर हो गया।
यदि वो उससे प्यार करती थी तो फिर उसने उसे मार क्यों दिया ? चांदनी ने प्रश्न किया।
तुम उसके प्यार को नहीं समझोगी ,वो उसे खोना नहीं चाहती थी। कुमार भी, उससे टूट कर प्यार करने लगा था, मेरी बेटी ने, उससे पहले कोई शर्त ही नहीं रखी थी बल्कि उसे तो उस समय दुनिया का जैसे मोह ही छूट गया था।
जब मुझे पता चला कि वो फिर से कुमार से मिलने लगी है ,तब मैंने उसे समझाने का प्रयास भी किया -'' ये इंसान सही नहीं है। ये तेरी सुंदरता को देखकर ही तेरे करीब आया है ,कल को यदि इसे पता चला तुम ही शिल्पा हो ,तो ये तुम्हें भूल जायेगा। ''
मेरी बात सुनकर मेरी बेटी, मुझसे बहुत नाराज़ हुई और बोली -आपसे भी मेरी प्रसन्नता देखी नहीं जाती ,उसे मेरे विषय में कौन बताएगा ? वो मेरे बिना एक पल भी रह नहीं सकता ,जहाँ मैं जाती हूँ ,वहीँ पहुंच जाता है ,मुझे तो लगता है ,अब मधुलिका का प्रेम भी, मेरे प्रेम के सामने छोटा पड़ गया है। शायद वो इसे अपनी जीत समझने लगी थी ,वो बेहद ख़ुश थी ,किन्तु मैं चिंतित थी ,मेरे द्वारा हर बार उसे समझाने के कारण उसने, मुझे फोन करना भी बंद कर दिया।
जैसे-जैसे उसका, कुमार का प्यार उसकी जिंदगी में आता चला गया, उसकी इच्छाएं भी बलवती हो उठीं । उसके सपने, फिर से उसकी आंखों में समाने लगे। वह अपने को कुमार की पत्नी के रूप में देखने लगी।उसे लगने लगा ,मधुलिका, कुमार की ज़िंदगी में होने के बावजूद भी ,उसकी ज़िंदगी में कोई महत्व नहीं रखती है।
कुछ दिनों पश्चात, यामिनी ने महसूस किया, मधुलिका जब भी कुमार को बुलाती,वह तुरंत दौड़ा चला जाता और उसके बुलाने का अधिकतर कारण उसका बेटा ही होता।
इससे यामिनी को अब मधुलिका से ईर्ष्या होने लगी,यामिनी को लगता ,अब ये मेरा ही है ,इस पर मेरा अधिकार है। तब उसने, मधुलिका के मन में शक़ का बीज़ बोने के लिए ,उसके फोन पर कुछ ऐसी तस्वीरें भेजी ,ताकि उन दोनों में झगड़ा हो किन्तु ऐसा नहीं हो सका।
मधुलिका के मन में कुमार के प्रति संदेह तो जागा किन्तु उसने बड़ी ही सहजता से अपने रिश्ते को संभालने का प्रयास किया।
ऐसे में यामिनी ने महसूस किया कि अपनी संतान के लिए ,कुमार उसे भी भूल जाता है। दोनों बहुत ही करीब आ गए थे,, एक दूसरे में समाने लगे थे, गहराइयों में डूबने लगे थे। किंतु उस रिश्ते में फिर भी कहीं कोई कमी रह गयी थी। यहाँ तक कि यामिनी ने उस रिश्ते को कोई नाम देने पर भी जोर नहीं दिया।
जब वो दोनों साथ होते , जैसे ही मधुलिका का फोन आता, और उसके बेटे को कोई परेशानी होती वह तुरंत ही जैसे सोते से जाग उठता हो या किसी मोहजाल से बाहर निकला हो और वह तुरंत ही दौड़कर वापस चला जाता।
तब यह बात यामिनी को अच्छी नहीं लगती थी , इसमें उसे अपना अपमान महसूस होता। तब यामिनी ने मन ही मन निर्णय लिया -'अब वह भी उसके बच्चे की मां बनेगी ताकि अपने बच्चे के लिए वह भी उसके पास दौड़कर चला आए।
शुरू में तो यामिनी ने उससे कह दिया था - मुझे सिर्फ तुम्हारा प्यार चाहिए किंतु बाद में उसे लगने लगा उसे हमेशा उसका साथ चाहिए , उसे पता ही नहीं चला ,वह कब उस पर किसी पत्नी की तरह अधिकार जत लाने लगी थी ? कुछ दिनों तक वो कुमार से नहीं मिली,कुमार जब उसके लिए बेचैन होता ,तो उसे प्रसन्नता होती ,लगभग तीन महीनो के पश्चात , उसने कुमार को एक खुशखबरी सुनाई।
वह अब उसके बच्चे का पिता बनने वाला है, वो सोच रही थी -कुमार, जब यह ख़बर सुनेगा ,उसे प्यार से चूम लेगा ,अपनी गोद में उठा लेगा किन्तु उसकी सोच के विपरीत ,यह बात सुनकर कुमार को अच्छा नहीं लगा।
कुमार ने इस बात किया का विरोध किया और कहा- तुम तो कह रही थी कि सिर्फ मुझे, तुम्हारा प्यार चाहिए और मुझे कुछ नहीं चाहिए फिर यह सब क्या है ?
यह भी तो हमारे प्यार की निशानी ही है, यामिनी ने उत्तर दिया।
क्या तुम पहले से नहीं जानती थीं , मैं पहले से ही शादीशुदा हूं और एक बच्चे का बाप भी हूं , मैंने, तुमसे कोई भी बात नहीं छुपाई थी, फिर यह ड्रामा क्यों ?
क्या ये ड्रामा है ? यामिनी उसके शब्दों से आहत हुई ,तब उसने पूछा -तुम्हारे मन में मेरे लिए तनिक सी भी भावनाएं नहीं है, तुमने मेरे साथ इतना समय व्यतीत किया है , थोड़ा सा तो प्यार अंकुरित हुआ होगा, मेरी बेटी उसके सामने गिड़गिड़ा रही थी।
उस दिन मेरी बेटी ने बहुत दिनों के पश्चात मुझे फोन किया ,वो रो रही थी। आप यह नहीं जानती हैं , उसने मेरी बेटी को क्या कहा ?
नहीं जानती हूं, तभी तो तुमसे पूछ रही हूं ,ऐसा क्या हुआ था ?
