Khoobsurat [part 141]

कल्याणी जी, के मुख से उनकी कहानी सुनकर सभी को आश्चर्य होता है ,इस महिला ने 'पुलिस की नाक के नीचे रहकर '' कितना बड़ा खेल खेला ? कोई सोच भी नहीं सकता था कि अपने ही दामाद को मारकर ये  किस कदर ईमानदार बनी बैठी है ?

तब वो आगे बताती हैं - अब मेरी बेटी फिर से ज़िंदगी की तरफ लौट रही थी। पहले की तरह अब वो, प्रसन्न रहने लगी। वहां कोई उसे जानता भी नहीं था और न ही, उस पर रूप -रंग को लेकर कोई दबाब बना रहा था । 


 न ही, किसी बात का ड़र... वो उस घटना को धीरे -धीरे भूलने का प्रयास कर रही थी। हालाँकि कभी -कभी नींद में घबरा जाती,तब उस समय उसकी कीर्ति आंटी उसकी सहायता करती। उन्हें, उससे सहानुभूति भी थी।

 वो समझती थी ',बेचारी ने!  इतनी कम उम्र में कितना दुख देखा है ?इतनी छोटी सी उम्र  में विधवा हो गई है। तब वो ,शिल्पा को समझाती -'ये जीवन ही ऐसा है , यहाँ कल क्या हो, कोई नहीं जानता किन्तु जो भी होता है। लोग कहते तो यही हैं -''उस ईश्वर की इच्छा से होता है ,और कहीं न कहीं उसमें हमारी भलाई भी छिपी होती है, किन्तु उसका सामना हमें ही करना होता है।'' इसमें हमारे लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा ये तो समय आने पर पता चलता है किन्तु मैं तो इतना जानती हूँ ,हमें अपना कर्म करते रहना चाहिए।''

 ये भी कह सकते हैं -उन्होंने उसे आगे बढ़ाने के लिए ,उचित मार्ग की ओर प्रोत्साहित किया।'' जीवन में चलते ही रहना चाहिए, जीवन किसी के लिए रुकता नहीं है।'' जब तक हम जी रहे हैं और हमारा जीवन है हमें निरंतर चलते रहना होगा। आगे बढ़ने का नाम ही जिंदगी है।''

 यामिनी अभी उनसे ज्यादा बात नहीं करती थी किन्तु उनकी बातों का असर उस पर हो रहा था, अपने को  कलाकारी में व्यस्त रखने का प्रयास करने लगी थी। आप लोगों ने देखा भी  होगा वहां जाकर, उसने जो भी कलाकृतियां बनाई हैं। उनमें लाल रंग नहीं था , थोड़ा बहुत कहीं लाल रंग का उपयोग हुआ भी है तो उसमें दूसरा रंग मिला दिया गया था।

वो ऐसा क्यों कर रही थी ?चांदनी ने प्रश्न किया। 

 उस लाल रंग से तो जैसे ड़र ही गई थी, कुछ दिनों तक तो वो देश -विदेश भृमण ही करती रही ,जो कुछ सूझता ,उसे अपने कैनवास पर उतारने का प्रयास करती। 

एक बार जब वह 'वेनिस' गई थी,तब  वहां ,उसे ऐसे ही कोई सरफिरा मिल गया था जो  उसे पसंद करने लगा था किन्तु शिल्पा अभी इस सबके लिए तैयार नहीं थी। मानसिक रूप से अभी भी कमज़ोर ही थी। वो अक़्सर उसका पीछा करने लगा उसके जीवन में बलात ही घुसने का प्रयास करने लगा। 

लड़कियों के लिए ,परेशानी ही परेशानी ,सुंदर न हों ,तो कोई उनकी तरफ देखना भी पसंद नहीं करता और यदि लड़की सुंदर है तो, कभी -कभी उनकी जान और इज्ज़त दोनों का सुरक्षित रहना मुश्किल हो जाता है।

चलो !चलो !यहाँ हम तुम्हारा भाषण सुनने के लिए नहीं बैठे हैं ,न ही हमें तुम्हारा ज्ञान चाहिए ,हमें ये बताओ ! ये ख़बर तो हमने भी सुनी थी कि कोई कलाकार है ,जो लोगों पर हमला करती थी। क्या वो तुम्हारी बेटी ही तो नहीं थी। 

मेरी बेटी क्या पागल है ? चिढ़ते हुए कल्याणी जी ने जबाब दिया। जब वो उसका पीछा कर रहा था ,उसका साहस बढ़ता ही जा रहा था। यदि वो उसे पसंद होता ,तब अपने आप ही आगे बढ़ती किंतु उसे वह पसंद ही नहीं था।

 अभी वह किसी को भी अपने दिल में स्थान नहीं देना चाहती थी ,बाहर से वो अपने जीवन में आगे बढ़ रही थी किन्तु अंदर से अभी भी एक कमज़ोर लड़की थी। एक दिन वो उसने , यामिनी को एकांत में पकड़ लिया। विदेश में एक लड़की ऐसे में क्या करती ? 

यामिनी ऐसे लोगों से बचने के लिए ,अपने पास' पेपर स्प्रे 'रखती और एक छोटा सा चाकू ,ये सब रखने के लिए मैंने ही उससे कहा था। देश हो या विदेश ! ऐसे लोग मिल ही जाते हैं ,वो उससे बहुत ज्यादा तंग आ चुकी थी। तब उसने ,उससे पीछा छुड़ाने के लिए, यामिनी ने उसके हाथ की नस काट दी थी और वहां से भाग गई थी।

 वह बुरी तरह घबरा गई थी, किंतु उसने तुरंत ही वो शहर छोड़  दिया। इतना बड़ा हादसा भी नहीं था। 

तुम्हारे लिए हादसा नहीं होगा किन्तु जिनकी जान पर बनी ,उनके लिए तो दुःखद घटना ही रही।

 उसके बाद क्या हुआ ?

क्या होना था ? वह फिर कभी 'वेनिस ' नहीं गई  किंतु उसे डर था कि उस आदमी की मौत तो नहीं हो गयी होगी किंतु ख़बर के अनुसार उसको बचा लिया गया था। 

 जिंदगी में वह भटक रही थी, और भटकते हुए कभी न कभी,किसी न किसी से टकरा ही जाती थी।कई हादसे हुए किन्तु उसके अंदर का डर उससे वो करवाता, जो वो करना नहीं चाहती थी,कर देती किन्तु अब उसके अंदर का ड़र उस पर हावी हो रहा था। 

तभी उसकी ज़िंदगी में ऐसा कुछ हुआ ,जिसे अब देख और सोचकर तो यही लगता है , ऐसा होना नहीं चाहिए था ,वो अपने डर के साथ जी रही थी ,अपनी ज़िंदगी से लड़ रही थी। तब ऐसा क्यों हुआ ?

अरे ! ऐसा क्या हुआ ? चांदनी झल्लाते हुए बोली -यूँ ही पहेलियाँ बुझाती रहेगी। 

कल्याणी जी ने एक नजर चांदनी की तरफ देखा और मुस्कुराई ,अभी तक तो ये मुझे' मैम' करके बोल रही थी किन्तु जबसे इसे पता चला है कि मैंने अपने दामाद का खून किया है ,मेरे प्रति इसका व्यवहार ही बदल गया है। मुझसे ऐसे बात कर रही है ,जैसे किसी अपराधी से बात करते हैं। मैं इसके लिए अपराधी होउंगी किन्तु मुझे तो नहीं लगता ,मैंने अपनी बेटी को उसके दर्द से, उसका पीछा छुड़वाया है।

 वो किसी भी अनजान की तरह एक बार भारत में भी आई और कुमार से टकरा गई। कुमार, उसे पहचान नहीं पाया, कैसे पहचानता ? शिल्पा अब पहले वाली शिल्पा नहीं रही थी ,वो अब एक प्रसिद्ध कलाकार 'यामिनी' जो बन चुकी थी। 

 कुमार नहीं जानता था, कि यह वही शिल्पा है। कलाकार से और कला से वह पहले से ही प्रेम करता रहा है, दोनों ही उसके लिए आकर्षण का केंद्र रहे हैं।  उस समय दोनों ही आमने -सामने थे।

 शिल्पा का पहला प्यार आज उसके सामने खड़ा था जो उसकी कलाकृतियों की प्रशंसा कर रहा था। अपनी कलाकृतियों की तरह ही आप भी बहुत' खूबसूरत' हैं। 

''खूबसूरत''इस शब्द को सुनने के लिए शिल्पा के कब से' कान तरस गए थे ?'आज स्वयं ये बात कुमार अपने मुख से कह रहा था। यामिनी के लिए इससे बड़ी और क्या बात हो सकती है ? कुमार तो उसका पहला प्यार था और अब वही प्यार उससे मिल रहा था। 

कुमार भी उस पर मोहित हो गया था और उससे मिलने लगा था। वह ऐसा प्यार था , न ही  उसमें कोई इच्छा थी न ही कोई अपेक्षा, शिल्पा का प्रेम तो समर्पण भाव का प्रेम था। शिल्पा को इस बात से ही संतुष्टि थी, कि रूप बदलकर ही सही उसे कुमार का प्यार तो मिल रहा है। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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