Khoobsurat [part 137]

  इंस्पेक्टर चांदनी, कल्याणी जी से पूछताछ कर रही थी , तभी अचानक वह उनसे पूछ बैठी -जिस  दिन आपके दामाद की हत्या हुई ,उस समय आप कहां थीं ?

कहाँ हूँगी ,अपने घर में ही थी। 

 किंतु आपका नौकर तो बता रहा था - एक दिन पहले आप कहीं गई थीं , किंतु उसने यह नहीं बताया कि  आप कहां गई थी ? क्योंकि आपने उसे यह बताना उचित ही नहीं समझा होगा। वो आपका नौकर है, ऐसी बात आपसे पूछ भी तो  नहीं सकता  , आप तो मालकिन हैं, कहीं भी आ जा सकती हैं। क्यों ? मैं सही कह रही हूं न.... कल्याणी जी की आंखों में झांकते हुए इंस्पेक्टर चांदनी ने पूछा। 


अब क्या हम अपने नौकरों से पूछकर बाहर निकलेंगे ? मैं कहीं भी जाऊं ! इससे न ही उन्हें कोई मतलब होना चाहिए और न ही आपको !

जी ,नौकर को कोई मतलब नहीं होगा किन्तु हमारे लिए ये जानना बहुत ही जरूरी है ,हमें तो एक- एक चीज की जानकारी लेनी ही होगी , हमारे केस के लिए यही उचित है कि आप हमसे कुछ न छुपाएं ,ये आपके और हमारे दोनों के लिए ही बेहतर होगा। 

 अब आप लोग, क्या चाहते हैं ? मुझे लगता है, आपको मेरे दामाद का हत्यारा मिला ही नहीं है और आप कुछ भी कहानी गढ़ रहे हैं ताकि मुझे फंसा सकें , उत्तेजित होते हुए कल्याणी जी ने कहा। 

मैंने तो ऐसा कुछ भी नहीं कहा, मैं तो सिर्फ आपसे यह पूछ रही थी, कि उस दिन आप कहां थीं  ? और देखिये ! यहाँ हम अपना कार्य कर रहे हैं ,ये पुलिस थाना है ,आपकी कोठी नहीं ,इसीलिए जरा अपना लहज़ा सही रखें, क्योंकि मेरा लहज़ा बिगड़ गया तो आप उसे सहन नहीं कर पाएंगी ,कठोर शब्दों में चांदनी बोली। 

अब तो मुझे याद भी नहीं है ,इतने दिन हो गए ,गयीं हूँगी ,अपनी सहेली के यहां या फिर किसी पड़ोसी के यहाँ .....

 कौन सी सहेली ?

 होगी ,कोई !!अभी तो आपको बताया ,इतने दिन हो गए ,मुझे ठीक से स्मरण नहीं। अब आप क्या चाहती हैं ? क्या आप मुझे भी फंसाना चाहती हैं ?मुझे लगता है ,आपको कोई हत्यारा नहीं मिला है इसीलिए आप सबने मिलकर सोचा है ,इसी परिवार में से किसी को तो फंसा ही देते हैं।पहले मेरी बेटी पर शक था ,अभी तक आपने मेरी बेटी से भी मुझे नहीं मिलवाया है।मुझे लगता है ,वो भी आपको नहीं मिली इसलिए सोचा-' बेटी नहीं तो माँ ही सही ,कुछ भी इल्ज़ाम लगाकर इस केस को बंद कर देते हैं। '   

हमने यदि ऐसा सोच होता तो ,आज से बहुत दिनों पहले ये सब कर दिया होता। न ही हमने, आपको फंसाया है और न ही आपकी बेटी को फंसा रहे हैं। हम तो सिर्फ आपसे पूछताछ कर रहे हैं। 

यह आपका पूछताछ का कैसा तरीका है ? आप, मुझे यहां पर धोखे से लेकर आए हैं। आप मुझे, मेरे पति को फोन करने दीजिए ,मैं उनसे बात करती हूं। अब आपसे हमारा वकील ही बात करेगा। 

हमारी पूछताछ पूरी हो जाएगी तो आप किसी से भी बात कर सकती हैं, क्योंकि यह आपकी बेटी के जीवन का प्रश्न है , क्या आप नहीं चाहती हैं ?कि आपकी बेटी सुरक्षित रहे, परेशान न हो ! आप नहीं जानती हैं ,उसे  कितनी परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है ? 

आप एक बार मुझे मेरी बेटी से मिलवा दीजिए कल्याणी जी ने, उनसे विनती की। 

कई बार अपने बच्चों का हित चाहते -चाहते माता-पिता ,भी  कुछ ऐसी गलतियां कर जाते हैं कि बच्चों का अहित ही हो जाता है।

अच्छा !ये बताइये ! ये' नित्या 'कौन है ?

क्यों ? उसका इस केस से क्या लेना -देना ?

लेना -देना है ,तभी तो पूछ रही हूँ। देखिये !मैं आपकी उम्र का लिहाज़ कर रही हूँ ,आप मेरे काम में बार -बार 'टाँग मत अड़ाइये ''टूट गयी तो चलने लायक भी नहीं बचेंगी। आपसे जो पूछा जाये, उसका सही -सही उत्तर दीजिये !

ठीक है ,पूछिए ! 

अभी तो पूछा -ये नित्या कौन है ?

मेरे भाई की बेटी ,अब तो पूछ सकती हूँ ,उसका इस केस से क्या संबंध है ?

तुम्हारे दामाद के फोन में हमें, उसका नंबर मिला था। 

हाँ ,तो क्या हुआ ?वो रिश्ते में रंजन की साली लगती है ,अब साली का नंबर रखना भी क्या अपराध है ?

साली का नंबर फोन में होना अपराध नहीं है ,बल्कि उस रिश्ते की आड़ में ,अपने नाज़ायज रिश्ते को स्थान देना गलत है। हो सकता है ,आपकी बेटी को उनके रिश्ते के विषय में पता चल गया हो ,इस कारण दोनों में खूब झगड़ा हुआ हो और ये भी हो सकता है ,किसी योजना के तहत उसे, उस कोठी में ले जाया गया हो और एक माह पश्चात योजनानुसार उसे मारकर आपकी बेटी फ़रार हो गयी। 

अभी तो आपकी बेटी बिमार है किन्तु जैसे ही वो ठीक होगी,उसे कोर्ट में पेश किया जायेगा  उसे फाँसी की सजा होगी,फाँसी की.... 

ये सब, आप कैसे कह सकती है ?

ये सब मैं बनाकर नहीं कह रही हूँ ,ये सब आपकी बेटी ने स्वीकार किया है। 

वो झूठ बोल रही है। 

तो आप सच बता दीजिये !

उसने  एक नहीं कई ख़ून किये हैं ,यहां तक कि उसने अपनी सहेली मधुलिका के पति ,अपने पुराने प्रेमी ''कुमार श्रीवास्तव ''को भी  नहीं छोड़ा। वो तो पक्का -पक्का जेल ही जाएगी। 

ये सब झूठ है। 

इसमें कुछ भी झूठ नहीं है ,उसने स्वयं स्वीकार किया है ,इतना ही नहीं, उसने विदेश में जाकर 'प्लास्टिक सर्जरी ''से अपना चेहरा बदलवाया और वो हत्यारिन 'यामिनी 'बनकर देश -विदेश घूमती रही ,जो भी उसके मध्य आया, उसे मार दिया। इतने पर भी उसे चैन नहीं था ,वहां जाकर उसने अपनी ही दोस्त के पति के साथ अवैध संबंध बनाये ,उसके साथ मस्ती की और फिर उसे भी मार दिया और आप यहाँ उसके अपहरण का नाटक कर रहीं हैं ,तेज स्वर में अचानक चाँदनी बोली -अभी वो बिमार है ,जब ठीक हो जाएगी ,वो घर नहीं सीधे जेल जाएगी।

इतनी देर से चांदनी की प्रश्नोत्तरी से अब तक कल्याणी जी परेशान हो चुकी थीं ,बोली -बस कीजिये ! मेरी बेटी ऐसी नहीं है ,कहते वे रोने लगीं ,वो तो बड़ी सीधी -सादी है ,कल्पनाओं की उड़ान भरती है ,शायद आपने उसकी चित्रकारी नहीं देखी है ,कितनी सुंदर तस्वीरें बनाती है ?अपने दिल की ही तरह जैसा सुंदर उसका दिल है ,जीवंत !उसकी चित्रकारी भी उतनी ही रंगीन और जीवंत रही है। लोग उसके चित्र पसंद करते, उसकी प्रशंसा करते किन्तु जब उसे देखते तो सब भूल जाते।    

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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