Zeenat [part 14]

मिसेज गुप्ता ,भूमि को अपने विषय में बता रहीं थीं, कि किस तरह से, उन्होंने खन्ना के बेटे' संजय खन्ना ' से अपना पीछा छुड़ाया। किस प्रकार उस परिवार से दोस्ती की ? उन लोगों के और क़रीब आकर दोस्ती भी बनाये रखी और उनकी हितैषी भी बन गयी। 

एक तरीक़े से देखा जाये तो ,इस तरह तो आपने ,''अपना उल्लू सीधा किया। ''हँसते हुए भूमि ने कहा। 

क्यों ?मैंने कौन सा 'उल्लू सीधा किया 'वो एकदम से भड़कते हुए बोलीं -ऐसे उल्लूओं से बचने के लिए मेरा अपना तरीक़ा था। यदि आप मेरी जगह होतीं तो क्या करतीं ?उन्होंने पूछा। 

भूमि अबकि बार सोचने पर मज़बूर हो गयी, कि वो क्या करती ?कुछ देर सोचा, तब वो बोली -क्या करती ?उससे स्पष्ट शब्दों में कह देती -देखो !तुम्हारा यहाँ आना गलत है ,मेरे पति को पता चला तो नाराज होंगे। तुम्हें यहाँ नहीं आना चाहिए। 

और फिर क्या वो आता नहीं ? उन्होंने व्यंग्य किया।तब तुम, अपने पति से कहतीं और वो उस लड़के से लड़ने जाते। 

नहीं ऐसा नहीं है ,यदि वो इतना भय दिखाने से ही भयभीत हो जाता, तो फिर कहने की क्या आवश्यकता थी ?भूमि ने स्पष्ट किया। 


तुम लड़कों को नहीं जानती हो ,ये इतनी आसानी से सुधरने वाले नहीं ,जिसमें कि वो पैसे वाले की बिगड़ी हुई औलाद हो। क्या तुम्हें नहीं लगता ? अपनी समस्या का समाधान हमें स्वयं ही निपटा लेना चाहिए।  ऐसे लोग, कभी सुधरते नहीं,हमारा पड़ोस का मामला 'भी था। वो तो सुबह गए, शाम को आते थे।मेरे कारण उन लोगों में आपस में झगड़े भी हो सकते थे ,वे मेरी वजह से वे परेशान रहते, काम में भी मन नहीं लगता। हम आपस में दुश्मन बन जाते ,हो सकता है, ये खन्ना अपने दोस्तों से मिलकर इनसे लड़ने आता। 

आजकल की पीढ़ी की हालत यही तो होती जा रही है ,हमेशा तोड़ने और लड़ने की बातें करते हैं ,जो कार्य सहजता से और प्यार से हो सकता है ,उसमें इतने व्यवधान क्यों डालना ? हाँ ,उनसे तब कहती ,जब इस परेशानी को मैं नहीं संभाल पाती और मैंने आराम से, बड़े प्यार से ,भोजन करते हुए सब संभाल लिया तब अपने पतिदेव को क्यों तंग करना ? वे मेरे लिए ,अपने परिवार के लिए काम कर रहे हैं ,तो निश्चिन्त होकर करने देती या फिर पड़ोसियों के झगड़ों में फंसाती।

मैं सारा दिन घर में अकेली रहती थी ,इन लोगों जितना पैसा भी नहीं था ,ये लोग, पैसे वाले भी थे। दोस्ती भी बनाकर रखनी पड़ती है। जब मेरे बच्चे हुए ,आंटी जी ने बहुत सहयोग किया। देर -सबेर आकर मेरा हालचाल भी पूछकर जाती थीं।ऐसे समय में , मेरी सास भी मेरे साथ नहीं थी ,तब मैं अकेली क्या करती ?मेरे जैसे पड़ोसी तो.... मेरी और तुम्हारी तरह सारा दिन काम में ही लगे रहते हैं, किन्तु आंटी को क्या काम था ?उन्हें तो ''दो मीठे बोलों की चाहत थी। ''वही मैंने किया ,पड़ोसियों से हानि है तो लाभ भी तो है। अब तुमने पड़ोसी होने के नाते, उस दिन तुम्हें 'ज़ीनत' गलत लग रही थी , तो क्या उसकी वीडियों बनाई थी या नहीं। 

आजकल हम सभी जानते हैं ,हर कोई यहाँ शहरों में, न जाने कहाँ -कहाँ से आकर बसे हैं ? कभी न कभी किसी न किसी को एक दूजे की सहायता की आवश्यकता पड़ ही जाती है। 

मुझे तो नहीं पड़ी ,न ही किसी की जरूरत पड़ेगी ?क्योंकि मेरा परिवार मेरे साथ है। 

ऐसे बोल मत बोलो ! तुम्हें इसीलिए किसी की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि तुम्हारी सास और तुम्हारी जेठानी समीप ही रहते हैं ,मुझे भी आवश्यकता नहीं पड़ती ,यदि मेरी सास मेरे साथ होतीं और कई बार सास से भी न पटे तो तब भी किसी की सहायता की, आवश्यकता पड़ ही जाती है।कपिल की मम्मी ! तुम भी न... बातों को कहाँ से कहाँ ले जाती हो ? मुझसे क्या पूछ रहीं थीं ?'ज़ीनत 'और खन्ना की बातें कर रहीं थीं और न जाने क्या -क्या पूछने लगीं ?

मन ही मन भूमि ने सोचा ,स्वयं ही तो अपने किस्से सुना रहीं थीं और अब मुझ पर ही तोहमत लगा रही हैं। ऐसे पड़ोसी होते हैं ,इनका खाली समय कट जाता है और काम करते -करते मुझे भी मौहल्ले के किस्से सुनने को मिल गए। कौन, कैसा है ? इसकी जानकारी भी हो गयी। दूसरों के अनुभव भी ,व्यर्थ नहीं जाते कुछ न कुछ सीखने को मिल ही जाता है। 

अच्छा ,अब ये तो बताइये ! आप बुरा तो नहीं मानेंगी। 

पूछो !क्या पूछना चाहती हो ? जब इतनी बातें बताईं हैं ,तो फिर क्या बुरा मानना ? 

लगता है ,आज तो आप पूरे मूड़ में हैं ,भूमि ने मज़ाक किया। अच्छा ये बताइये !आपकी सास ने आपको आते ही, इस तरह अलग क्यों कर दिया ?

तुम भी कम नहीं हो ?पूरी जानकारी लेकर रहोगी ,उन्होंने जबाब दिया। 

वो तो मन में प्रश्न आया तो पूछ लिया ,आपको नहीं बताना है तो आप इंकार कर सकती हैं ,कोई जबरदस्ती तो है नहीं। 

ऐसी कोई विशेष बात नहीं है ,दरअसल गुप्ता जी ने मुझे एक शादी में देखा था और तभी इन्हें, मैं पसंद आ गयी थी किन्तु इनकी मम्मी को मैं पसंद नहीं थी। उन्होंने हमारे विवाह से इंकार कर दिया। 

तब इन्होंने किसी से भी, विवाह करने से इंकार कर दिया ,तब उन्होंने मजबूरी में हमारा विवाह तो कर दिया किन्तु हमें साथ ही अलग भी कर दिया किन्तु जब बच्चे हुए तब भी नहीं आईं किन्तु जब बच्चे थोड़े बड़े हुए और ये उन्हें, उनके दादी -बाबा से मिलाने ले गए ,तब बहुत खुश हुईं। अपने पोते -पोती को देखकर बहुत खुश हैं किन्तु मुझसे मिलना नहीं चाहतीं। जिसने उनके बेटे का घर -संसार बसा दिया ,वही पसंद नहीं है कहते हुए थोड़ी भावुक हो गयीं ,उनके शब्दों से लगता था,उनके मन में कोई कसक तो है।   

तब भूमि ने बातों को बदलते हुए पूछा - इनकी बहु को कब पता चला होगा ? कि उसका पति सही नहीं है ,या फिर उसे धोखा मिला है। 

जब उसके बच्चे हुए ,तब धीरे -धीरे संजय का रंग उसे नजर आने लगा,शरुआत में उन लोगों में झगड़ा हुआ भी होगा किंतु ये सब तो मैं नहीं जानती ,कोई भी अच्छे घर की लड़की होगी ,वो अपने घर या ससुराल का इस तरह तमाशा नहीं बनाएगी। उसका प्रयास तो यही रहेगा कि शांति पूर्वक अपने झगड़े ,अपनी परेशानियां, अपने घर में ही आपस में बातचीत करके ही सुलझा लियें जायें। 

हाँ, ये बात भी सही है ,क्या उन्होंने, आपको कभी बताया या नहीं ?कि वो परेशान हैं ,आप तो अक़्सर उनके घर जाती ही रही हो। 

क्यों ?क्या मेरे घर में कोई काम -धाम नहीं है ,चिढ़ते हुए वो बोलीं। 

अभी कुछ देर पहले तो आप ही बता रहीं थीं कि मैं उनके घर जाती थी और वहीँ खाती भी थी इसीलिए पूछा।  

हाँ ,वो बात तब तक रही ,जब तक उस खन्ना का विवाह नहीं हुआ ,विवाह के पश्चात वो थोड़ा शालीन बना रहा और मेरा भी घर -परिवार है ,मेरे भी दो बच्चे हुए ,मुझे भी समय नहीं मिला। 

चलो तो इस प्रकार, इस खन्ना से आपका पीछा तो छूटा ,बेचारी, भाभीजी ! फंस गयीं। क्या कभी आपसे उन्होंने बताया कि उनका पति केेसा है ,या उसकी हरकतें कैसी हैं ? उन्हें खन्ना की आदतों का कब पता चला ?


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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