एक दिन मेरे सपने में तुम्हारी दादी आई ,वो लहूलुहान थी ,रो रही थी। मैंने अपने बच्चों से बताया और कहा -मुझे लगता है ,तुम्हारी मां अवश्य ही किसी परेशानी में है ,कल वो मेरे सपने में आई थी ,क्या वो किसी से कुछ कहकर गई थी ? किन्तु किसी को कुछ भी जानकारी नहीं थी ,जिन्हें जानकारी थी, वे चुप थे। मुझे लगता था ,वो हवेली में ही कहीं है। मैंने सभी नौकरों से, उसे ढूंढने के लिए कहा,मुझे डर था कहीं वो हवेली के किसी कमरे में न फंस गयी हो। उन्होंने हवेली का चपा -चपा छान मारा किन्तु वो नहीं मिली। मिलती तो तब ,जब वो जिन्दा होती।
एक दिन मुझे, मिटटी में दबे फूलदान के कुछ टुकड़े मिले, कुछ पर रक़्त भी लगा हुआ था जो अब सूख गया था। तब मुझे स्मरण हुआ ,हवेली के एक हिस्से को सुनयना जी ने बड़े क़रीने से सजाया हुआ था। वो अक़्सर वहां जाकर बैठ जाया करती थीं। उन्हें वहां शांति मिलती थी ,यह वही फूलदान है, जिसे उन्होंने विदेश से मंगवाया था। इसका अर्थ है ,वो यहाँ आईं थीं। मैं सोच रहा था -अवश्य ही, कुछ तो ऐसा हुआ है ,जो मुझसे छुपाया जा रहा था।
एक दिन मैंने सबको एक साथ बुलाया और सबसे पूछा -तब भी सबने यही कहा -हमें नहीं मालूम !!मुझे आश्चर्य था कि इतनी बड़ी हवेली की मालकिन अचानक कहां गायब हो गई ? और किसी को उसकी चिंता भी नहीं है। मैं जब उसे ढूंढता ये लोग, इधर-उधर देखकर, नजर अंदाज कर जाते, एक दिन ऐसे ही मैं उसे ढूंढ रहा था। मेरे अंदर बेचैनी सी रहती, वो कहीं तो है किन्तु मेरी नजर में नहीं आ रही।
एक दिन तेजस ने भी मुझसे पूछा - दादाजी !आप क्या ढूंढ रहे हैं ?
तब मैंने उसे बताया-तुम्हारी दादी नहीं मिल रही है,अचानक न जाने कहाँ चली गयी है ? क्या तुमने, उसे कहीं जाते हुए देखा था ?
दादी तो.... अभी तेजस कुछ कहता, तभी दमयंती ने एकदम से उसे आकर रोक दिया और बोली -अपनी दादी के विषय में यह कुछ नहीं जानता है। इसकी दादी तो इससे नाराज ही रहती थी ,वो भला इसे बताकर क्यों जाएँगी ?अभी यह छोटा है ,जो भी कहना होगा ,अपने बच्चों से कहेगीं ,कहकर उसे अपने साथ ले गयी।
दादाजी ! उस समय' तेजस' कितने बरस के थे ?
यही कोई दस या ग्यारह बरस का रहा होगा ,तब दमयंती मुझसे बोली -पापा जी !आप नाहक़ ही परेशान हो रहे हैं , मुझे लगता है ,वे हम सबको बिना बताए ही तीर्थ भ्रमण के लिए निकल गई हैं किंतु मैं समझ गया था। तेजस अवश्य ही कुछ न कुछ तो जानता है जो मुझसे छुपाया जा रहा है। तब मैंने उन दोनों पर ही नजर रखनी आरम्भ की। एक दिन 'जगत 'को भी उस पेड़ के नीचे बैठकर रोते देखा। जब मैंने उससे, उसके रोने का कारण जानना चाहा तो बोला- 'आज अचानक ही मम्मी का स्मरण हो आया ,पता नहीं ,वे कहाँ होंगी ,कैसी होंगी ? ''मेरे ही घर में मुझसे मेरी पत्नी की ''मौत का रहस्य ''छुपाया जा रहा था।
कारण एक नहीं था , तेजस का फूलदान तोड़ना ,उनका डांटना अथवा उसे पीटना तो मात्र बहाना था बल्कि दमयंती को अपनी सास पर क्रोध था क्योंकि उसने चार पति की पत्नी बनना स्वेच्छा से स्वीकार किया था क्योंकि उसे सम्पत्ति का भी लालच था किन्तु इस परम्परा को बनाये रखने के लिए,'सुनयना 'ने अपने गुरूजी से बच्चों के लिए बंधन बंधवा दिया था। इस बात का भी उसे क्रोध था। उसके मन के अंदर उस बंधन को लेकर एक डर समा गया था। उसी के चलते उसने बहुत सारी गलतियां कर डालीं ,तुम्हारे साथ भी जो व्यवहार हुआ ,उसी डर का परिणाम था।
दादा जी ! आपको कैसे पता चला ?मैं ही तेजस की पत्नी थी।
उन्होंने अपनी अनुभवी बूढी नजरों से उसे देखा और बोले -मैं उसी दिन समझ गया था ,जब तुमने कहा था ,मैंने आपको पहले भी कई बार देखा है। हवेली में जो कुछ भी हो रहा था ,मुझे उसकी हमेशा ख़बर मिलती रहती थी। इस हवेली में तुमसे पहले वही तो आई थी।
तब दादा जी !आपको दादी जी की हत्या हुई है ,इस विषय में कैसे पता चला ?
मेरी नजरें दमयंती और तेजस पर रहती थीं ,तेजस इतना छोटा भी नहीं था कि उसको किसी भी मीठी चीज का लालच देकर बहला लिया जाये और वो सच्चाई उगल दे !वास्तव में देखा जाये तो, उसे भी सही जानकारी नहीं थी। उसे बताया गया था -'उसकी दादी को चोट लगी है और वो अस्पताल में हैं। ठीक हो जाएगीं तो उन्हें घर ले आएंगे।'
दरअसल हुआ यूँ था ,मैं एक दिन बग़ीचे से गुज़र रहा था ,तब मैंने दमयंती और जगत की आवाजें सुनी ,मैं थोड़ा और करीब गया ,तब उनकी बातें सुनकर तो मुझे भी लगा, जैसे मुझे चक्कर आ जायेगा और वहीँ गिर पडूंगा। दमयंती ,जगत से कह रही थी -क्या मम्मी जी की इस तरह मुक्ति हो जाएगी ? हमने उनके कोई संस्कार भी नहीं किये,उनकी मौत को एक साल बीत गया।
तब जगत कह रहा था -घर में किसी को भी नहीं मालूम है ,यहाँ उनकी मुक्ति के लिए कोई हवन -पूजा नहीं करवा सकते वरना सभी पूछेंगे, तो क्या जबाब देंगे ? पापा तो अभी भी, माँ को ढूंढ़ रहे हैं। जब उन्हें पता चलेगा। उनकी पत्नी की मौत के ज़िम्मेदार हम ही हैं ,वो, हमें कभी भी क्षमा नहीं करेंगे।
हो सकता है माँ की आत्मा उन्हें बता देना चाहती है कि उनके साथ क्या हुआ ?तभी तो वो उनके सपनों में आती हैं।कल मैं गुप्त रूप से उनकी अस्थियां लेकर गंगा जी चला जाऊंगा और वहीँ उनके नाम की पूजा -हवन करवा दूंगा ताकि उनकी आत्मा को शांति मिल सके।
ऐसा नहीं है ,पापा जी सारा दिन माँ को ढूंढते रहते हैं ,उनके दिमाग़ में यही सब चलता रहता है इसीलिए उन्हें एहसास होता है ,वो हैं उनके करीब हैं।
तब आपने क्या किया ?
मैं इस बात पर विश्वास नहीं कर पा रहा था, कि मेरी सुनयना अब इस दुनिया में नहीं है , इस संसार को छोड़कर जा चुकी है। मैं बहुत देर तक उसकी याद में बैठा रोता रहा। कुछ समझ नहीं आ रहा था, क्या करूं ? क्या उन दोनों की सच्चाई सबको बता दूं , फिर सोचा एक बार, उनसे पूछ ही लेता हूं, उन्होंने मेरे साथ ऐसा क्यों किया ? मेरी पत्नी को मुझे अंतिम बार देखने भी नहीं दिया। मैं पागलों की तरह एक साल से उसे खोज रहा हूं और तुमने एक बार भी मुझे नहीं बताया कि वो इस दुनिया में नहीं रही। अपने को शांत करके मैं उन दोनों के सामने जाकर खड़ा हो गया। तुम दोनों ने यह पाप किया है और सबसे बड़ा पाप तो यह किया है कि मुझसे ही मेरी पत्नी के'' अंतिम संस्कार'' का अधिकार भी छीन लिया। उसे किसी अपराधी की तरह मिट्टी में दफन कर दिया।उसके अन्य बेटों को भी पता नहीं है ,उनकी माँ अब इस दुनिया में नहीं रही।
