Khoobsurat [part 131]

इंस्पेक्टर कुणाल ,कल्पित को समझाते है और उससे कहते हैं -तुम्हें हमने जिस कार्य के लिए भेजा था ,अभी तक तुम उसमें सफल नहीं हुए हो। 

तब कल्पित विश्वास से कहता है -अब मुझे उनकी जानकारी लेने से कोई नहीं रोक सकता। 

इंस्पेक्टर कुणाल जानते हैं ,अभी कल्पित उम्र और अनुभव में बहुत छोटा है ,तब वो उसे समझाते हुए कहते हैं ,'इतना आसान नहीं है, जितना तुम समझ रहे हो, अभी तुम उसकी बेटी से ही मिल रहे हो और वह बेटी जिसने अभी तक तुम्हें, अपने विषय में कुछ भी नहीं बताया और ना ही बताना चाहती है। अब तुम्हें, रोहिणी से दोस्ती से भी बढ़कर एक रिश्ता और बनाना पड़ सकता है,किन्तु कुछ तो जानकारी लानी ही होगी।  कुणाल ने कल्पित की तरफ देखा। 



उनका इशारा समझकर कल्पित घबरा जाता है और कहता है - सर ! आप यह क्या कह रहे हैं ?  

क्यों ,क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है ? जो  इस तरह घबरा रहे हो  मुस्कुरा कर कुणाल ने पूछा। 

नहीं, गर्लफ्रेंड तो नहीं है, किंतु मेरे घर पर मेरे रिश्ते की बातें चल रही हैं । 

बातें चल ही रहीं है ,अभी कुछ हुआ तो नहीं है। कुणाल हाथ पीछे करके ,कुर्सी से पीठ टिकाकर बोला - मैं तो सोच रहा था, केस हल करते-करते तुम्हें एक दोस्त, पत्नी या प्रेमिका भी मिल जाएगी कहते हुए कुणाल हंसने लगा। 

नहीं, सर ! मुझे ऐसी कोई 'क़ातिल हसीना'  नहीं चाहिए, यदि वह सच में ही कातिल हुई तो....  आप तो मुझे बैठे-बिठाये  मरवाना चाहते हैं, सर !मैंने आपका क्या बिगाड़ा है ?घबराने का अभिनय करते हुए कल्पित ने कहा। 

घबराओ मत, तुम्हें कुछ नहीं होने देंगे, बस एक बच्चा भी दहेज़ में मिल जायेगा ,कहते हुए कुणाल हंसा।  तुम जरा दुश्मन के ख़ेमे जाकर उसका विश्वास जीत लो ! इस जवानी के ,ये जो बॉडी बनाई है ,कुछ तो जलवे  दिखलाओ !

सर ! मुझे एक बात समझ में नहीं आई। 

क्या ?

 ये केस तो भरतपुर थाने का है जो वहां के  इंस्पेक्टर के अधीन है ,फिर इस केस में हम क्यों उलझ रहे हैं ?हम तो ''कुमार श्रीवास्तव '' के हत्यारे ख़ोज को रहे थे और हमारा शक़'' यामिनी देवी''पर है वो भी लापता है। देखा जाये तो हमें' यामिनी देवी 'को खोजना चाहिए। 

तुम्हारी बात सही है , लो , बातों ही बातों में हम तो यह भूल ही गए मैंने तुम्हें बताया था कि जब मैंने  उसे देखा था, तब वह खून ! खून! चिल्ला रही थी , कहीं वह लाल रंग देखकर तो नहीं ड़रती है। 

अगर वह इस तरह लाल रंग देखकर डरेगी तो वह खून कैसे करेगी ? फिर तो वो ख़ून कर ही नहीं सकती। 

हो सकता है , जोश में,गुस्से में पहले तो खून कर दिया और बाद में घबरा गई। 

यदि वह घबराती, तो दोबारा खून नहीं करती। 

कहीं हम कोई गलत दिशा में तो नहीं जा रहे हैं। एक बात समझ में नहीं आ रही, यह जो' यामिनी' नाम की पेंटर थी  उसने आगरा में पेंटिंग की प्रदर्शनी लगाई थी ,तब वह तो गर्भवती थी। तब वह कैसे इतने लंबे -तगड़े  व्यक्ति का कत्ल कर सकती है ? जहां तक मुझे मधुलिका ने बताया था -' यामिनी गर्भवती थी।' 

सर ! धोखा हो सकता है ,आपने फ़िल्मो में नहीं देखा,' किस तरह उनका पेट बड़ा हो जाता है। तीन घंटे की फ़िल्म में वो नौ माह पूरे करके बच्चा पैदा कर देती हैं। 

ह्म्म्मम्म तुम्हारी बात भी सही हो सकती है ,हो सकता है ,वो सब नकली हो ,ताकि लोगों को या पुलिस को उस पर शक़ ही न जाये। 

रही, तुम्हारे प्रश्न की बात ! कल्याणी जी के इस केस से हमें इसलिए जुड़ना पड़ रहा है ,जहाँ तक हमने छानबीन की है उसके आधार पर कह सकते हैं। यामिनी ,शिल्पा और ये नई लड़की रोहिणी तीनों ही कलाकार हैं। शिल्पा गायब हुई तो यामिनी आई ,अब यामिनी नहीं मिल रही है ,तो रोहिणी आ गयी है। कुछ समझ रहे हो। 

यस सर !कुछ -कुछ समझ में आ तो रहा है। 

अब हमें जानकारी निकालनी होगा, कि रोहिणी का बच्चा कहां पर पैदा हुआ है ? वहां जांच करनी होगी, उसके पिता का क्या नाम लिखा गया है ? ये पता लगाना होगा।  

मुझे लगता है ,सर ! यह जो रोहिणी नाम की लड़की है, इसका कहीं इलाज चल रहा है, शायद यह मानसिक रूप से थोड़ा परेशान रहती है। जिस डॉक्टर से इसका इलाज चल रहा है उससे भी मिलना होगा। 

तुम एक बार पता लगाओ ! कि वह किस डॉक्टर से मिलने जाती है, जिससे इसका इलाज चल रहा है और हम यहां पता लगाते हैं, यह बच्चा जिस अस्पताल में हुआ है और इसके पिता का नाम क्या लिखा गया है ? इन लोगों ने , बड़े ही शांतिपूर्वक ढंग से योजना बनाकर अपने कार्य को अंजाम दिया है। मुझे तो पक्का -पक्का विश्वास है यह रोहिणी, शिल्पा और यामिनी तीनों एक ही लड़कियां है। इनके मध्य एक ही पॉइंट है, जो इन्हें  जोड़ता है ,वह है ,उनकी कलाकारी!

 जब शिल्पा थी, तब वह भी पेंटिंग्स बनाती थी, उसके पश्चात  यामिनी आई, यामिनी भी पेंटिंग बनाती थी, और उसके पश्चात यह रोहिणी है हालांकि यह स्वीकार नहीं कर पा रही है और अभी तक इसने  कोई ऐसी पेंटिंग नहीं बनाई है , किंतु उस दिन के वाक्ये  के कारण मुझे लगता है कि यह  पेंटिंग बनाना चाहती है और इसे  शौक भी है किंतु कल्याणी जी ने इसे रोका हुआ है।

 एक भी सबूत हाथ लग गया तो इन दोनों मां बेटियों को छोडूंगा नहीं, जोश में आकर कुणाल बोला -तुम थोड़ा जल्दी दिखाओ इस केस को लटके हुए काफी समय हो गया है। भरतपुर थाने से यहां तक आ गया है किंतु अभी कहीं कोई हल नहीं निकला है। 

जी सर ! मैं ,अपना कार्य पूर्ण करने का प्रयास करूंगा। 

प्रयास नहीं करना है, कार्य पूर्ण होना ही चाहिए। 

जी सर ! कह कर कल्पित थाने से बाहर निकल गया। कल्पित चौबीस -पच्चीस  साल का नौजवान है, जो कुणाल के साथ आगरा के थाने में ही है और कुणाल ने ही उसे, अपनी योजना के तहत, रोहिणी से दोस्ती करने भेजा है।कल्पित को रोहिणी और उसके परिवार के विषय में पता लगाना है क्योंकि जैसे भी वो लोग आगे बढ़ते हैं ,वैसे ही आगे बढ़ने का रास्ता बंद हो जाता है। समझ नहीं आ रहा था। कैसे आगे बढ़ें ?तब कुणाल को लगा ,'रावण की लंका में कोई तो विभीषण होगा इसलिए कल्पित को रोहिणी के पीछे भेज दिया। 

हैलो ! रोहिणी आज भी अपने बच्चे को बग़ीचे में घुमाने लाई थी किन्तु अभी तक कल्पित नहीं आया था। अब तो जैसे उसे कल्पित की प्रतीक्षा रहती। इतने दिनों से दोनों मिले रहे हैं। अब रोहिणी को भी जैसे अपने घर से ज़्यादा इस बगीचे में आना अच्छा लगता। अब किसी से कुछ कहना भी नहीं पड़ता क्योंकि उसके पास बच्चे को घुमाकर लाने का बहाना जो है। रोहिणी कल्पित की प्रतीक्षा में ही थी ,तभी किसी के हैलो !कहने पर उसने जैसे ही घूमकर देखा ,वो बुरी तरह चौंक गयी और डर से काँपने लगी। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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