Khoobsurat [part 130]

 कल्पित यह सब क्या चल रहा है ? नाराज होते हुए इंस्पेक्टर कुणाल ने उससे पूछा। तुम लोगों को मिलते हुए ,इतने दिन हो गए। तुम, अभी तक उस लड़की के मन की बात नहीं जान पाए। 

क्या करूं ?सर ! मैं प्रयास तो कर रहा हूं किंतु वह लड़की काफी सतर्क है, शायद उसे समझा दिया गया है थोड़ा डरी हुई भी है , विश्वास जीतने में समय तो लगता है। 

तुम हमारी टीम के सबसे होनहार और सजीले नौजवान हो ,पता नहीं, क्या कर रहे हो ? मैं तो सोच रहा था कि वह जैसे ही तुम्हें देखेगी तुम पर लटटू हो जाएगी और विश्वास भी करने लगेगी।


 सर ! किसी का विश्वास प्राप्त करना है, कोई हलवा नहीं खाना है ,जिसमें कि उसने  बहुत धोखे खाए हुए हैं, विश्वास करने में अभी उसे, समय लगेगा। अच्छा ,सर !मुझे  उसकी कोई ऐसी बात बताइए ,जिससे मैं उसकी कमजोरी को पकड़ सकूं या उसके माध्यम से उसके विश्वास को जीतने में सफल हो सकूँ। 

 इतने दिनों से तुम उसके साथ रह रहे हो, उससे मिलते रहे हो, क्या उसकी कोई कमजोरी नहीं पकड़ पाए।

 ऐसी कोई कमजोरी नजर तो नहीं आई ,एक माँ की कमज़ोरी उसका बच्चा होता है किन्तु उसे देखकर तो नहीं लगता कि वो बच्चे को लेकर कुछ ज्यादा सतर्क ही  है, वो उसे बग़ीचे में लाती है और फोन पर लगी रहती है या फिर इधर -उधर देखती रहती है।एक बार को उसे देखकर मुझे लगा ही नहीं ,ये बच्चा इसी का है। और हाँ सर !  एक बात मुझे समझ नहीं आई ,गंभीर होते हुए कल्पित बोला -एक दिन मैंने उसे एक ' फ्रेंडशिप कार्ड' दिया था ,उसे देखकर वह थोड़ा घबरा गई थी ,उसके हाथ कांपने लगे थे हालांकि वह अपने को संभाल गई थी,ज़्यादा कमज़ोर नहीं पड़ी। इसका  क्या कारण हो सकता है ?

क्या तुमने उसका केस नहीं पढ़ा है ? जब वह मुझे भी पहली बार मिली थी , तब वह खून !खून !कह कर उस बगीचे से बाहर निकलकर भाग रही थी।

 तो क्या उस दिन,उसने  किसी का खून होते देखा था। 

नहीं ,मुझे तो नहीं लगता,क्योंकि मैंने जब वहाँ जाकर देखा तो उसका कैनवास और उस पर कुछ रंग बिखरे पड़े थे। आस -पास भी देखा ,मुझे लगा शायद इसने किसी को मारा है या फिर किसी को मारते देखकर डरकर भाग रही है  किंतु वह किसी चीज से डर अवश्य गई थी। 

कहीं ऐसा तो नहीं, वह लाल रंग से डर गई हो लाल रंग भी तो खून का रंग ही होता है,कल्पित ने अंदेशा जतलाया। 

यदि ऐसा होता तो वो रंगों से बचती ,वो रंग लेकर ही क्यों आती ? उसे देखकर तो लग रहा था वो चित्रकारी करने के लिए ही वहां गयी थी।  

सर !एक बात याद आई, उस दिन मैंने उसे जो एक कार्ड  दिया था उस पर भी  लाल गुलाब ही तो थे। शायद में 'लाल रंग' देखकर डरती है ,मुझे ऐसा लग रहा है। 

वह लाल रंग देखकर क्यों डरती है ? इतनी आसानी से नहीं बताएगी ,हो सकता है उसे डराया -धमकाया गया है। वैसे जहाँ तक मैंने शिल्पा के केस के विषय में पढ़ा है ,वो तो लाल रंग से नहीं डरती थी। वो तो अच्छे से चित्रकारी करती थी। 

तब तो ये शिल्पा हो ही नहीं सकती ,कल्पित विश्वास के साथ बोला। 

ये जो भी है ,किन्तु हमारे लिए एक यही माध्यम मुझे नजर आ रही है ,जिसके माध्यम से हम कल्याणी देवी के किले को भेद सकते हैं ,इसकी मां 'कल्याणी देवी' वह भी बहुत ही तेज है। हमने भी पता लगवाया है,इसने जो अपनी फुफेरी बहन बताई थी कि वो विदेश में रहती है, वह 'भारत ' में आ चुकी है और एक सप्ताह तक 'भारत 'में ही रही।  इतने दिनों के लिए कल्याणी देवी से मिलने आई थी और कल्याणी देवी तो बता रही थी -' कि वह विदेश में ही रहती है, वहीं कार्य करती है , उन्हें तो पता ही नहीं था कि वो एक' प्लास्टिक सर्जन 'भी है।  जहां तक मुझे लगता है ,वह अवश्य ही कल्याणी देवी के किसी काम से आई होगी। 

सर ! हमें उन्हीं से बात करनी चाहिए थी कि वो 'भारत 'में किस उद्देश्य से आईं थीं ? 

तुम्हें क्या लगता है ,हमने छानबीन नहीं की होगी ,उनसे बात नहीं की होगी - कि वो ' इंडिया' किस उद्देश्य से आई थी किंतु उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया , लगता है,कल्याणी देवी ने उनका मुँह भी बंद कर दिया गया होगा।

 हो सकता है, वो अपनी रिश्तेदारी निभाने आईं हों,कल्पित ने संभावना व्यक्त की  

तुम सही कह रहे हो, शायद वो  रिश्तेदारी के लिए ही यहां आई होगी ,किंतु यहां आकर उसने क्या किया होगा ?गहन चिंतन करते हुए कुणाल ने कहा। 

अपने अन्य रिश्तेदारों से भी तो मिली होगी। 

वह बात तो सही है, फिर भी मुझे उनके आने का उद्देश्य कुछ अलग ही नजर आ रहा है क्योंकि वो ही बता रहीं थीं -' अपने विवाह के पश्चात ,वो कभी इंडिया नहीं आई और अब तो उनके माता -पिता भी जिन्दा नहीं हैं। जब शिल्पा के पति की मृत्यु हुई थी , वो उन्हीं दिनों में आई थी। 

सर !यह बात तो सीधी सी है , कल्याणी देवी उनसे संपर्क रखती होंगी और रिश्तेदारी होने के नाते वो उनसे मिलने आई होगीं।  उनके घर में इतना बड़ा हादसा जो हो गया था। 

तुम्हारी बात अपनी जगह सही है, किंतु कल्याणी देवी को जहां तक मैं जानता हूं , उसके हर कार्य के पीछे कोई न कोई उद्देश्य होता है। अभी तक तो हम समझ रहे थे ,कल्याणी की बेटी शिल्पा उनके पास गयी होगी और वहां अपना चेहरा बदलवा लिया होगा किन्तु जब हमने जाँच की तो शिल्पा के वहां जाने का कोई सबूत हाथ नहीं लगा बल्कि हमें ये पता चला कि उन दिनों डॉक्टर कीर्ति तो स्वयं भारत में ही थी। 

अच्छा ! अभी तुम बता रहे थे कि तुमने उसे एक कार्ड  दिया था और उसने उस कार्ड को देखा तो वह घबरा गई थी। क्या वह उस कार्ड को अपने साथ लेकर गयी थी ?

नहीं ,सर !झेंपते हुए कल्पित बोला - उसने वह कार्ड वहीं धीरे से छुपा कर फेंक दिया था हालांकि मैंने उसे देख लिया था किंतु मैंने इस बात को नजर अंदाज कर दिया।

क्या यार !हँसते हुए कुणाल बोला -उसने तो तुम्हें अपनी दोस्ती लायक़ भी नहीं समझा ,तब तुम पर क्या ख़ाक  विश्वास करेगी ?

नहीं ऐसी बात नहीं है ,सर !आपको बताया तो था , उसे देखकर वो थोड़ा घबराई तो थी इसलिए ऐसा किया होगा। 

तब तो तुम वहीं से कोई सबूत ढूंढकर निकालो ! हां यह बात तो है, कल्याणी देवी के हर मोहरे अपनी जगह पर सटीक है ,उसने ऐसी चाल चली है कि उसके खेमे में घुसना आसान काम नहीं है। 

अब मैं घुसा तो हूं, और उनके खेमे में से जानकारी लेकर भी आऊंगा। 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post