Khoobsurat [part 128]

 कल्याणी देवी, डॉक्टर के पास 'रोहिणी' को लेकर जाती हैं, रोहिणी की हालत देखकर उन्हें लगता है कि वह समय से दवाई नहीं ले रही है, उसकी हालत में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है। तब वो, उसे समझाती  हैं -' कि आपकी कोई भी पारिवारिक परेशानी है , पति- पत्नी का आपस का झगड़ा है ,उसको कुछ देर के लिए या कुछ समय के लिए भूल जाइए और अपनी सेहत पर ध्यान दीजिए। आप अपना नहीं तो कम से कम अपने बच्चे के विषय में तो सोचिए ! क्योंकि कल्याणी देवी ने डॉक्टर को भी यही बताया था -'कि  रोहिणी का पति उससे रुष्ट है।


डॉक्टर !मैंने इससे कितनी बार कहा है ?अपनी सेहत पर ध्यान दे ! किन्तु न जाने क्या -क्या सोचती रहती है ? 

अभी इन्हें कमज़ोरी है ,बच्चा भी दूध पीता होगा ,इस तरह तो ये परेशान रहेंगी तो इनका स्वास्थ्य गिरता जायेगा। आपको ,इनके पति को तो बता देना चाहिए कि उन्हें एक प्यारी सी संतान हुई है। मुझे लगता है क्या ये कुछ और भी दवाइयां ले रहीं हैं ?

नहीं ,नहीं तो..... हड़बड़ाकर कल्याणी जी बोलीं -अब आप इसको देखकर दवाई दे दीजिये और इसके खानपान के विषय में भी बता दीजिये !मुझे लगता है ,इसके लिए अलग से एक नर्स रखनी होगी।  

नहीं ,नर्स रखने की कोई आवश्यकता नहीं है ,बस ये समय से दवाई लेती रहें और खानपान थोड़ा ध्यान दें सब ठीक हो जायेगा। डाक्टर को लगा ,शायद ये मुझसे कुछ छुपाना चाहती हैं , तब बोलीं -कोई भी बात हो, आप मुझे बता सकती हैं ,डॉक्टर से कुछ भी छुपाना नहीं चाहिए। 

नहीं,ऐसा कुछ भी नहीं है ,इसकी त्वचा में थोड़ी जलन सी रहती थी ,उसकी दवाइयां ही खाई हैं ,कहते हुए उठीं और बोली -अब हम चलते हैं ,मैंने आपका फोन नंबर ले लिया है ,कोई भी परेशानी होगी तो मैं अवश्य ही आपसे सम्पर्क करूंगी। 

रोहिणी अंदर ही अंदर परेशान है, वह अपने जीवन के विषय में सोच रही है ,'मेरा जीवन क्या से क्या हो गया ? मैं बहुत उन्नति करना चाहती थी, बहुत आगे बढ़ना चाहती थी लेकिन अब तो जैसे उसके ' पर ही कतर दिए गए हैं।' अपने बच्चे  की तरफ देखती है तो उसे और भी अधिक कष्ट होता है ,उसे लगता है -'जब यह बड़ा होकर मुझसे पूछेगा, उसके पिता कहां है ? वो क्या करते हैं ,  उनका नाम क्या है , तो मैं इसे  क्या जवाब दूँगी ? अनेक मानसिक परेशानियां उसे घेरे रहती हैं। स्वयं भी वह बाहर कहीं नहीं जा सकती, एक कैदी बनकर रह गई है। अपनी पहचान भी खो चुकी है, इस तरह कब तक वो अपना जीवन जीएगी ? 

अपने बिस्तर पर लेटी हुई यही सब सोच रही थी तभी कल्याणी देवी आती हैं और उससे कहती हैं -तुम ,इतना  सब  क्यों सोच रही हो ? थोड़ा समय व्यतीत हो जाने दो ! हम कोई ना कोई हल निकाल ही लेंगे लेकिन तुम इस तरह गलतियां करती रहोगी तो फिर कोई हल नहीं निकलेगा, उल्टा हम परेशानी में फंस जाएंगे।

 आप मेरी परेशानियों को समझ नहीं सकती हैं , कल को जब यह बडा होगा तब आपसे पूछेगा, मुझसे पूछेगा कि मेरे पिता कहां है, तो मैं क्या जवाब दूंगी ? रोते हुए रोहिणी ने पूछा। 

इसमें क्या कहना है, तुम कहना- कि तुम मेरे बेटे हो !

बिना बाप के आ गया ,उसे माँ के जबाब पर हंसी और क्रोध दोनों आये  किन्तु वेदना की अधिकता के कारण हंस न सकी।

तेरे  पिता इस दुनिया में नहीं रहे या उनसे तलाक ले लिया है, कुछ भी बहाना कर सकती हो झल्लाते हुए कल्याणी ने जबाब दिया।  

कभी न कभी तो सच्चाई इसके सामने आएगी ही....

 अभी यह दो महीने का ही हुआ है और तुमसे प्रश्न भी पूछने लगा बेफिजूल की बातें करती हो, नाराज होते हुए कल्याणी जी ने कहा। देखो ! अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दोगी तो इसके पालने लायक भी नहीं बचोगी और ये बिना माँ -बाप के ही मर जायेगा ,ये कठोर शब्द कल्याणी जी ने जानबूझकर कहे ,स्वर में थोड़ी मधुरता लाते  हुए बोलीं - साहस से काम लो ! समय सब जख्मों को भर देता है, समय की प्रतीक्षा करो ! हो सकता है, इसे कोई पिता भी मिल जाए। 

मां की यह बात सुनकर, रोहिणी के अंदर जैसे कुछ टूट सा गया ,उसने माँ को घूरा , क्या मेरा जीवन इसीलिए हुआ है ? 

रोहिणी का बच्चा अब 6 महीने का हो गया है, उसे घुमाने के लिए घर से बाहर बगीचे में ले जाती है ,यह इसका प्रतिदिन का नियम बन चुका है। बहुत दिनों से वह कहीं बाहर भी नहीं गई है किन्तु अब किसी से मिलने की इच्छा भी नहीं होती। मिलकर भी क्या हो जायेगा ?मेरा जीवन तो नहीं बदल जायेगा।  किसी से मिलना भी चाहेगी, अब तो कोई दोस्त संगी साथी भी नहीं है। जानने की इच्छा भी होती है ,अब नित्या कैसी होगी ?वो भी कितना बदल गयी है ?कभी फोन भी नहीं करती ,मेरी सहेलियां सभी अपने -अपने परिवारों  में व्यस्त होंगी। किसी से मिली भी... तो पहले मुझ पर ही अंगुलियां उठेंगी सोचकर उसने अपने विचारों को विराम देना चाहा।  

 एक दिन जब वो बग़ीचे में गयी ,एक लड़का उससे कुछ दूरी पर , बेंच पर आकर बैठ जाता है और उसके  बच्चे को खेलते हुए देखता है और प्रसन्न होता है, धीरे-धीरे उसके करीब आने का प्रयास करता है और एक दिन उससे पूछता है - आपका नाम क्या है ?क्या नाम है ,आपका !अभी तो आपको बोलना भी नहीं आता उसके बच्चे से खेलता है, उसकी कुछ तस्वीरें भी लेता है। 

ऐ ,मिस्टर !ये आप क्या कर रहें हैं ?मेरी बिना इजाज़त के मेरे बच्चे की, तस्वीरें क्यों ले रहे हैं ? रोहिणी जो बच्चे को ''बच्चा गाड़ी'' में बैठाकर,फोन में व्यस्त थी ,या फिर समय काट रही थी। 

अच्छा !ये बच्चा आपका है ,मैंने इसको इस तरह अकेले देखा तो मुझे लगा शायद ,इसे कोई छोड़ गया है। 

क्यों ? क्या आपको मैं वहां बेंच पर बैठी दिखलाई नहीं दे रही थी ?

आप दिखलाई तो दीं किन्तु आप बच्चे से इस तरह दूर थीं ,मुझे लगा शायद कोई इसे छोड़कर चला गया ,माँ तो बच्चे के करीब रहती है। वैसे मैं आपको बताता हूँ ,मेरा नाम कल्पित है , उस लड़के ने जवाब दिया। देखने में वह लड़का, बहुत सुंदर और स्मार्ट लग रहा था ,रोहिणी ने उसे एक झलक देखा और अपने बच्चे को उठाकर आगे बढ़ गयी। 

कल्पित भी उसके पीछे -पीछे आया और बोला - आपका बच्चा बहुत प्यारा है, वैसे आपको अभी कुछ दिनों पहले ही यहाँ देखा, क्या आप कहीं जॉब करती हैं या फिर कोई गृहणी हैं ?

रोहिणी ने  कल्पित के प्रश्न का जबाब देने से पहले से पूछा - आप क्या करते हैं ?

 मैं , एक कंपनी में नौकरी करता हूं, किंतु मेरा शौक सुंदर चीजों की तस्वीरें खींचना है , कभी-कभी शौक पूरा करने के लिए  तस्वीरें खींचता हूं जो दिल को बहुत आकर्षक लगे, उसे अपने इस कैमरे में कैद कर लेता हूँ, कहते हुए उसने आसपास की कुछ तस्वीरें खींच लीं।रोहिणी ने उसकी बातों में ज्यादा दिलचस्पी नहीं ली और अपने घर की तरह बढ़ती चली गयी। 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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