कुणाल न जाने क्यों ?कल्याणी जी के सामने कहता है - कलाकार क़ातिल भी होते हैं ,किन्तु ये बात कल्याणी जी को बुरी लगती है और वो कहती है -आप मेरी बेटी को अपराधी ठहराना चाहते हैं ,कलाकार होना कोई अपराध नहीं है।
नहीं ,मैंने ऐसा कब कहा ?''हसीनाएं तो क़ातिल ही होती हैं '' क्यों ? कहते हुए इंस्पेक्टर तेवतिया की तरफ देखकर मुस्कुराता है।
इंस्पेक्टर साहब !मुझे ऐसा क्यों लग रहा है ?आप कह कुछ रहे हैं और कहना कुछ और चाहते हैं ,क्रोध से कल्याणी जी ने उनकी तरफ देखा।
आपकी बेटी भी तो एक कलाकार थी, वैसे मैं, ये सब इसलिए बता रहा था -विदेश में ,एक बहुत अच्छी कलाकार थी, जिसकी देश-विदेश में कलाकृतियां बिकने जाती थीं , बाद में पता चला, वह तो लोगों हत्याएँ करती थी। लोगों को अपने जाल में फंसाती थी और उन्हें मार डालती थी इस तरह के हत्यारे थोड़े सनकी होते हैं, आप भी बचकर रहिएगा। उसने वहां रखी नाश्ते की प्लेट से एक बिस्किट उठाया और खाने लगा।
अच्छा ,इंस्पेक्टर साहब !अब आप जा सकते हैं , मेरी बेटी की कोई जानकारी हो, तो मुझे दीजिएगा।कल्याणी जी को लगा -यदि ये लोग यहां बैठे रहे तो कुछ न कुछ कहते रहेंगे ,पुलिसवालों का इतनी देर घर में ठहरना भी ठीक नहीं है।
दोनों उठकर चल देते हैं, तभी कुणाल वापस मुड़कर आता है और पूछता है - क्या आपकी बहन, मेरा मतलब है,' फुफेरी बहन कीर्ति' का काम अच्छा चल रहा है। यही नाम है न.... उनका, बड़े रह्स्यमई अंदाज में कुणाल ने पूछा। वहां तो बहुत से लोग ,उनसे अपने चेहरे पर प्लास्टिक सर्जरी करवाने आते होंगे।
यह सब मुझे नहीं मालूम , मैंने आपको बताया था कि उसने मुझे कभी कुछ नहीं बताया कि वह क्या कार्य करती है ?
किंतु उस दिन तो आप कह रही थीं -'कि वह एक डॉक्टर है ', तब आपने कभी भी उनसे यह जानने का प्रयास नहीं किया कि वो किस चीज की डॉक्टर है ?
किसी भी चीज की डॉक्टर हो, मुझे क्या ?झल्लाते हुए कल्याणी जी बोलीं।
आप तो मुझ पर ऐसे झल्ला रही हैं , जैसे मैंने आपको चोरी करते हुए पकड़ लिया हो , मुस्कुराकर कुणाल ने कहा।
मैं, भला किस चीज की चोरी करूंगी ?सम्भलते हुए बोली - इंस्पेक्टर साहब !आप बोलने से पहले एक बार सोच तो लिया कीजिए किसके विषय में, क्या बात कर रहे हैं ?
वैसे ही मुझे एक बात पूछनी थी, एक व्यक्ति कितनी बार प्लास्टिक सर्जरी करवा सकता है ?
मुझे क्या मालूम ?उत्तेजित होते हुए कल्याणी जी ने कहा -मैं कोई डॉक्टर हूँ ,डॉक्टर से पूछिए !
अच्छा, अभी हम चलते हैं, आप तो बेमतलब ही नाराज हो रही हैं , मैं तो वैसे ही जानकारी ले रहा था शायद कभी हमें आवश्यकता पड़ जाए, जान -पहचान में कार्य करवाना अच्छा रहता है और पैसे भी कम हो जाते हैं क्यों ?क्या मैं गलत कह रहा हूँ ? कहते हुए वो बाहर आ गया।
बाहर आने पर इंस्पेक्टर तेवतिया ने इंस्पेक्टर कुणाल से पूछा -यार ! यह सब क्या ड्रामा था ? आपको कौन सी प्लास्टिक सर्जरी करवाने की आवश्यकता पड़ सकती है ?वैसे जो मैं समझ रहा हूँ ,क्या ऐसा हो सकता है ?
तभी तो ,उनसे पूछ रहा था। वैसे इंस्पेक्टर साहब जानकारी रखने में क्या जाता है ? हो सकता है, इसी वजह से हमारा केस भी सुलझ जाए।
मैं कुछ समझा नहीं, कुछ समझने का प्रयास कर रहा हूँ।
मैं जो जानकारी जुटा रहा हूं उसे पूरा होने दीजिए उसके पश्चात यह केस शीघ्र ही सुलझ जायेगा और कल्याणी जी को उनकी बेटी मिल जाएगी।
बेटी, क्या मिलेगी ?उसके पति की, हत्या का रहस्य भी अभी खुला नहीं है, ऐसी कई मौतें हुई हैं जिनकी जानकारी हमें नहीं है ,अभी तो मधुलिका के पति की मौत भी रहस्य बनी हुई है। इन सब की कड़ी एक ही तरफ से जुड़ती हुई नज़र आ रही है। शीघ्र ही, कुछ न कुछ होगा देखते जाइए ,कहते हुए कुणाल चला जाता है।
इंस्पेक्टर के जाने, के पश्चात कल्याणी जी ने, रोहिणी को बुलाया और उसे बुरी तरह डांटना लगी- क्या तुम्हें एक बार में बात समझ नहीं आती तुमसे कितनी बार कहा है -कि इस तरह बाहर मत जाया करो ! तुम्हारी स्थिति अभी ठीक नहीं है। बच्चा भी अभी छोटा है।
मन ही मन बड़बड़ाती हैं - न जाने क्यों ? पुलिस को मुझ पर शक है , मैं सब जानती हूं। ये कुणाल जो उल्टे -सीधे सवाल कर रहा था।
क्या करूं?लगभग चिल्लाते हुए वो बोली - कितने दिनों से घर में बैठी हूँ ? मुझे घुटन होती है, मैं बाहर निकलना चाहती हूं,कई महीनों से ब्रश को हाथ भी नहीं लगाया है । चित्रकारी करना चाहती हूं किंतु नहीं कर पाती हूं। देखो !मेरी शक़्ल कैसी हो गई है ? मैं क्या से क्या होती जा रही हूं ? मैं अपने विषय में सोचती हूं , तो सोचती हूं -कि मेरा भविष्य क्या है ? मैं किसी को सुख नहीं दे पाई, हमेशा दूसरों को दर्द ही दिया है और खुद भी दर्द में जीती रही।
तुम्हें स्वतंत्रता कब पसंद आई ?तुमसे जब कहा था -''आराम से घूमो- फिरो मजे करो! किंतु तुम्हें तो प्यार हो गया था इस प्यार के चक्कर में , तुमने हमें भी परेशान करके रख दिया, मुझे तो लगता है , अब इन लोगों को मुझ पर ही नहीं, तुम पर भी शक हो गया है। तभी तो कह रहे थे -'कि ये, वह रोहिणी नहीं है, मुझे लग रहा है मेरी सम्पूर्ण योजना विफल होती नजर आ रही है। अपने इस शौक को अब समाप्त कर दो और जो कुछ भी तुमने देखा, सुना सब भूल जाओ ! अपना ठीक से इलाज़ कराओ !अब ये चित्रकारी का पागलपन छोड़ दो !और अपने इस बच्चे का ख़्याल रखो !
नहीं ..... ये मुझसे नहीं होगा।
नहीं होता है, तो जेल चली जाना, तुम्हारे लिए हमने क्या-क्या नहीं किया ? मैं भी तुम्हें कब तक संभालती रहूंगी।अब मैं भी तक गयी हूँ ,लोगों से झूठ बोलते और तुम्हें छुपाते हुए ,इसलिए जो कह रही हूँ ,वो चुपचाप रहकर अपने इस बच्चे को पालो !
ये कभी भी मेरा दर्द नहीं समझेंगी ,बुदबुदाते हुए रोहिणी अंदर जाने लगी।
तभी कल्याणी जी ने उसे टोकते हुए कहा - कल डॉक्टर से मिलने जाना है, वही उसका कोई उपाय बतायेंगी , उसके अनुसार तो तुम चल ही सकती हो।
ठीक है, जो डॉक्टर कहेंगी, मैं वही करूंगी। रोहिणी अपने को बदलने का प्रयास कर रही है। बच्चा अभी एक माह का ही है। अपनी ज़िंदगी ,में सबकुछ भूलकर आगे बढ़ना चाहती है किंतु वह अंदर से काफी कमजोर होती जा रही है, उसने इस जीवन में क्या -क्या नहीं देखा ?उसकी सभी उम्मीदें ,टूट चुकी हैं ,दुनिया के सागर में फंसी कहीं खो गयी है ,जीवन से उसे अब कोई आशा नहीं है ,अब वह धीरे-धीरे टूट रही थी, अभी एक हफ्ता ही बीता था।
जब वह लोग डॉक्टर के पास गए, तब डॉक्टर ने कहा था -मुझे लगता है ,आप सभी दवाइयां समय पर नहीं ले रही हैं।इस तरह से लापरवाही करेंगी तो आपको ही नहीं ,आपके बच्चे को भी नुकसान होगा। ज़्यादा सोचिये !मत ! खुश रहिये ! जीवन में अपने परिवार और पति की तरफ से जो भी परेशानी है ,उससे बाहर आइये !यदि तुम दोनों में आपस में झगड़ा है तो उसके चलते इस बच्चे की ज़िंदगी तो बर्बाद मत कीजिये !
