इंस्पेक्टर कुणाल, एक लड़की को लेकर, इंस्पेक्टर तेवतिया के थाने में आते हैं और उनसे कहते हैं-जरा इस लड़की से पूछताछ कीजिए और पता लगाइये -यह कौन है और कहां से आई है ?कुणाल के कहे अनुसार , सब इंस्पेक्टर चांदनी उस अनजान लड़की से पूछताछ करती है, जिससे पता चलता है। वह लड़की रोहिणी है और कल्याणी जी की रिश्तेदार है।
तब कुणाल , इंस्पेक्टर तेवतिया से कहते हैं -चलो !इस लड़की को उनकी कोठी में छोड़कर आते हैं , वो जानते हैं, जो कुछ भी रहस्य या अथवा जानकारी हमें मिलेगी ,वह उस विजयनगर की कोठी में ही मिलेगी।
जब वे लोग उनकी कोठी में पहुंचे तब कल्याणी की बातों में मतभेद था ,पहले वो कुछ और कह रहीं थीं और अब कुछ और कह रहीं हैं। इंस्पेक्टर तेवतिया से इंस्पेक्टर कुणाल कहता है -कि देखा ,अभी तो कल्याणी जी कह रहीं थीं ,रोहिणी का विवाह नहीं हुआ है और अब कह रहीं हैं -'जब सुलह हो जाएगी, इसका पति लेने आ जायेगा।'अब अचानक इसका पति कहाँ से आ गया ?
अचानक ही कुणाल ,कल्याणी जी से बोला -कमाल है ! रोहिणी तो बता रही थी, कि ये आपकी बेटी है , तब तक रोहिणी अंदर जा चुकी थी ,इंस्पेक्टर कुणाल ने 'अंधेरे में तीर छोड़ा'।
हंसते हुए, कल्याणी जी बोली -ठीक ही तो कह रही है ,मेरी बेटी नहीं है किंतु मेरी बेटी जैसी ही तो है। आप तो जानते ही हैं मेरी बेटी तो बहुत दिनों से लापता है और आज तक मिली नहीं है कहते हुए उसने इंस्पेक्टर तेवतिया की तरफ इस तरह देखा जैसे वह उन्हें उलाहना दे रही है।
कुणाल सोच रहा था ,कल्याणी भी कम नहीं है ,तब बोला - ऐसा नहीं है, आपकी बेटी तो आपके आसपास ही है, बस उसे देखने वाली नजर चाहिए ,शीघ्र ही मिल जाएगी।
यह तो मैं बहुत दिनों से सुनती आ रही हूँ ,कल्याणी जी लापरवाही से बोलीं।
वैसे इस लड़की को आपने कहां से बुलाया है ?मेरा मतलब है ,ये पहले कहाँ रहती थी ?
आपको पहले भी तो बताया था -कि यह मेरे पति की बहन की बेटी है।
नहीं, इससे पहले तो आपने बताया था -कि इनकी मौसी की लड़की है और जिस लड़की से आपने हमें मिलवाया था,वो यह नहीं है।
कल्याणी जी को लगा शायद, मैंने रिश्ता बताने में कोई गलती कर दी है , तब वो बोलीं -मुझे याद नहीं रहा। हो सकता है, मौसी की बेटी कहा हो।
इंस्पेक्टर तेवतिया सोच रहे थे,' आखिर यह कुणाल करना क्या चाहता है ? क्या साबित करना चाहता है ? यह बात भी इतने दिनों की हो गयी, उन्हें तो रोहिणी का चेहरा भी याद नहीं है। हां, इतना अवश्य याद है कि कोई लड़की उनके घर में रहती थी, उसका नाम भी शायद यही बताया था।
इंस्पेक्टर कुणाल कहते हैं- कल्याणी जी !आपने एक कमाल की बात देखी, यह लड़की भी पेंटिंग करती है,क्या आपके घर में सभी कलाकार हैं ? किन्तु ये पेंटिंग के रंगों से ही डरती है, विशेष तौर पर लाल रंग ! जैसे ख़ून का रंग !
आपको, ऐसा क्यों लगता है ?
जब मैं इससे मिला, तब ये खून !खून ! कहकर भाग रही थी ,मुझे लगता है ,इसके साथ अवश्य ही कोइ बड़ी दुर्घटना हुई है।
तभी कल्याणी जी ने कुणाल की तरफ घूरते हुए देखा, क्या मतलब ? मैं कुछ समझी नहीं ,वैसे आप जो कुछ भी सोच रहे हैं ,गलत ही है ,इसके साथ कोई हादसा नहीं हुआ है ,हाँ ये कुछ दिनों से अपने पति के कारण मानसिक रूप से परेशान रही है। अब आप ही सोचिये ! कोई लड़की जो अभी -अभी माँ बनी है, किन्तु इसका पति, इसे देखने और इससे मिलने भी नहीं आया, यदि वो हमसे कुछ न कहे किन्तु मानसिक रूप से परेशान तो होती ही है।
आप कहें तो हम, इसके पति से एक बार मिल लें और उसे समझा भी देंगे।
देखिये ! हम लड़की वाले हैं ,ये रिश्ते बड़े नाजुक़ होते हैं ,आप लोगों को देखकर उन्हें लगेगा हमने पुलिस में शिकायत कर दी। ये हमारा आपसी और घरेलू मामला है ,हम अपने आप निपट लेंगे। आपको जो भी किसी को समझना और समझाना है अपने थाने में समझाइये !
ठीक है ,आपकी जैसी इच्छा ! हम किसी को कुछ समझाना भी नहीं चाहते हैं , बस हमारा कर्त्तव्य था कि आपकी इस नई बेटी को, आपके पास छोड़ आएं।
ठीक है ,अब आप जा सकते हैं ,इसको यहाँ लाने के लिए आपका बहुत -बहुत धन्यवाद !कल्याणी जी ने अपनी बात समाप्त की।
उठने से पहले इंस्पेक्टर तेवतिया जो इतनी देर से उन दोनों की बातें सुन रहे थे ,बोले -बहन जी !एक बात समझ में नहीं आई। माना कि आपकी बेटी के परिवार में अनबन चल रही है ,पति -पत्नी में कोई झगड़ा भी हुआ हो, किन्तु आपकी बेटी किस चीज से डर रही थी ? वो खून !खून ! क्यों चिल्लाई ?
उनके इस प्रश्न पर कुणाल ने उनकी तरफ प्रशंसनीय नजरों से देखा किन्तु कल्याणी का चेहरा सफेद पड़ गया। अब कुछ जबाब तो देना ही था ,तब बोली - उसके इस डर का क्या कारण है ? ये बात तो मैं नहीं जानती कि उसे किस बात का डर है ? किन्तु हो सकता है ,जब ये अस्पताल में थी ,तब इसने वहां कुछ देखा हो बलात ही मुस्कुराने का प्रयास करते हुए बोली -और ये खून कहाँ देखेगी ?
कहीं इसकी ससुराल में तो ऐसा कोई हादसा न हुआ हो ,जिसका इसके दिल पर गहरा असर हुआ हो !आपने इससे पूछने का प्रयास भी नहीं किया।
जी ये बात तो मुझे आज ही पता चली ,वो भी आपके मुख से.... इससे पहले तो इसने मेरे सामने ऐसा कुछ नहीं कहा ।
वैसे ये आपकी बेटी, कब तक आपके साथ रहेगी, क्या यह अपनी ससुराल नहीं जाएगी ? कल्याणी जी इससे पहले की कुछ कहती या सोच पातीं उससे पहले ही कुणाल ने पूछा - वैसे इस लड़की का पति क्या काम करता है ?
क्या करता है ?आवारा गर्दी करता है। इसकी ससुराल वाले भी अच्छे लोग नहीं हैं, इसीलिए तो यह यहां रह रही है.
हम्म्म ससुराल वाले, सभी के गलत ही होते हैं, चाहे फिर वह लड़की के ससुराल वाले हों या फिर लड़के के ससुराल वाले......
कुछ देर वहां पर खामोशी रही, उसके पश्चात कुणाल ने कहा - क्या बच्चे के पिता को पता है ? कि वह बाप बन चुका है , हो सकता है, उनके संबंध आपस में थोड़े सुधर जाएं , बच्चा परिवार को जोड़ता है।
हां, हमने उन्हें सूचना भेज दी है, जब आएंगे तो इन्हें साथ ले जाएंगे वे रूखे स्वर में बोलीं।
आपकी बेटी शिल्पा भी एक चित्रकार थी और अब यह रोहिणी भी बहुत अच्छी कलाकार है। कलाकार क़ातिल भी होते हैं।
इंस्पेक्टर साहब !आप अपनी ड्यूटी छोड़कर न जाने किन-किन बातों को लेकर बैठ गए हैं ? कलाकार कैसे होते हैं, कैसे नहीं ,मैं क्या जानू ? वैसे आप कहना क्या चाहते हैं ?क्या आप मेरी बेटी पर इल्ज़ाम लगा रहे हैं ?
