Mysterious nights [part160]

अभी कुछ देर पहले ही तो, सब हंस बोल रहे थे, दोनों भाइयों में झगड़ा भी हुआ था। गौरव ! तो पूर्णतया स्वस्थ था, फिर अचानक इसे क्या हो गया ? चिल्लाते हुए दमयंती रोने लगी और डॉक्टर से पूछा -डॉक्टर साहब ! इसे ठीक से इसे देखिए ! इसे क्या हुआ है ? अभी तो यह भला -चंगा था। 

मुझे लगता है ,इन्हें अटैक आया है , डॉक्टर ने अंदाजा लगाया। 


ये बात किसी के भी पल्ले नहीं पड़ रही थी ,जो लड़का अभी कुछ देर पहले, उनकी आँखों के सामने भला -चंगा ,बातचीत कर रहा था ,अचानक ऐसा क्या हो गया ? किसी के कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था, फोन करके सबको सूचित कर दिया गया। घर में, अभी भी किसी को विश्वास नहीं हो रहा था, इसलिए बाहर भी सबसे यही कहा गया -अचानक ही गौरव को कुछ हो गया है।

गर्वित ने ,डॉक्टर से कहा -यह तो प्रातः काल उठकर, योग करता है ,अच्छा भोजन करता है। अभी थोड़ी देर पहले तो उसने कॉफी पी है, अचानक इसे ऐसे क्या हो सकता है ?

कौन सी कॉफी पी थी ?डॉक्टर ने पूछा। 

वही जो हमारे घर में हमेशा से आती है ,कोई नया ब्रैण्ड नहीं था।  

अनहोनी को कौन टाल सकता है ? इन्हें ' हार्ट अटैक 'हुआ, और ये अचानक ही चले गए। धीरे-धीरे यह ख़बर , सारे गांव में फैल गई। अभी हवेली के सभी लोग एकत्र हो गए, किसी को विश्वास भी नहीं हो रहा था अचानक ही, जवान लड़का कैसे चल बसा ? सभी एक -दूसरे की तरफ देख रहे थे ,उनकी पनीली नजरें ही जैसे पूछ रहीं थीं ,ये कैसे हुआ ?दमयंती इस बात को स्वीकार ही नहीं कर पा रही थी कि उसका बेटा चला गया ,उसके समीप बैठी, उसे देखे जा रही थी ,जैसे अभी उठेगा और हंसकर कहेगा -मम्मी !इस तरह क्यों बैठी हो ?सोचकर ही अपने आप आँखें भर आतीं।  

 अभी तो उसके बड़े भी जिंदा हैं , रोते हुए हरिराम जी ने कहा। पल भर में कोहराम मच गया। यह सूचना डॉक्टर अनंत को भी मिली, और वो भी अपनी पत्नी के साथ गौरव की 'शोक सभा' में शामिल हुए। उस शोक सभा में शामिल होने के लिए, 'पारो' भी आई थी। गौरव का 'अंतिम संस्कार' किया गया।  धीरे-धीरे सभी लोग जाने लगे, किसी को समझ नहीं आ रहा था , अचानक ही गौरव को क्या हो गया था ? डॉक्टर भी कुछ नहीं समझ पाया था, वैसे डॉक्टर भी क्या कर पाता ? उसके आने से पहले ही गौरव ने दम तोड़ दिया था। आपस में गांव के लोग इसी तरह की चर्चा कर रहे थे। 

तभी किसी ने पूछा - कुछ उल्टा -सीधा तो नहीं खा लिया था ,

 नहीं, वही भोजन किया था, जो परिवार के अन्य सदस्यों ने किया था, बस एक कॉफी पी थी , उसके पश्चात ही न जाने उन्हें क्या हो गया। यह बात दमयंती के कानों में भी पड़ी, वह महिलाओं की भीड़ में बैठी हुई थी तुरंत ही फुर्ती से उठी और रसोईये  से जाकर पूछा - क्या कॉफी तुमने बनाई थी ?

हां, मालकिन कॉफी तो मैंने ही बनाई थी। 

 आसपास कुछ ऐसी चीजें टटोलने लगी,जिससे ऐसा कुछ मिल जाए, जो कुछ अलग हो, लेकिन उसे वहां कुछ भी ऐसा नहीं मिला।

 इतनी भीड़ और परेशानी में भी, रूही की दमयंती पर नजर थी, रूही ने दमयंती के करीब आकर पूछा -मम्मी जी ! क्या आप यहां कुछ ढूंढ रही हैं ? मुझे बताइये !मैं कर दूंगी ,आप बाहर जाइये ! बाहर मेहमान बैठे हैं, आपको कुछ चाहिए तो मैं, आपको लाकर देती  हूं। आज रूही को देखकर दमयंती को उस पर क्रोध आया , उसने जलती हुई नजरों से उसे देखा, मन ही मन सोच रही थी - सुबह इसने, दोनों भाइयों में झगड़ा करवा दिया और शाम तक  एक की जान चली गई, यह मह्ज़  इत्तेफाक नहीं हो सकता किंतु उसके विरुद्ध कोई सबूत भी तो नहीं था, इसलिए चुपचाप, बेटे के समीप जाकर, जोर-जोर से रोने लगी और बोली -गौरव उठ जा !देख तुझसे मिलने कितने लोग आये हैं ? 

जो आया है, एक दिन जाता ही है, बच्चे की जाने की उम्र तो नहीं थी ,अभी तो उससे बड़े भी बैठे हैं , मेरी उम्र भी काफी हो गयी है -'हे भगवान !तू मुझे ही ले जाता, रोते हुए दमयंती की माँ बोल रही थी। न जाने, अचानक उस बेचारे को  क्या हो गया ? उसने तो अभी ठीक से दुनिया  भी नहीं देखी ,दमयंती की मां शकुंतला देवी आई थी जो उसे सांत्वना देते हुए बोले जा  रही थी। अब वह बहुत बूढी हो चुकी थी, बेटी को समझा रही थी -धैर्य रखो ! जिसको जाना था , वो  चला गया, उसके साथ नहीं जाया जाता,जो हैं ,उनकी क़द्र तो कर लो ! 

गहन सोच से बाहर आ दमयंती बोली - पता नहीं मां ! मेरे घर को किसकी  नजर लगी है ? पहले उस लड़की से विवाह करवाया था , तो 'तेजस' चला गया और अब यह लड़की आई है, इसे यहां आए हुए एक सप्ताह भी नहीं हुआ, इसने दो-तीन दिनों में ही, दोनों भाइयों का झगड़ा करवा दिया और मेरे एक बेटे की मौत हो गई। 

अब इसमें भला, इनका क्या दोष ? सब किस्मत का दोष है।   मां तो, इस घर के विषय में कुछ भी नहीं जानती थी, उसने तो अपनी बेटी की सुख- सुविधा के लिए ही इस घर में उसका विवाह करवाया था और दमयंती भी इसी ने भी इसी लालच में, विवाह किया था, कि यह हवेली फलती - फूलती रहेगी और धन संपत्ति भी मेरे बच्चों के पास ही रहेगी, लेकिन कुछ भी ठीक होता नजर नहीं आ रहा। आज उसे जैसे अपनी सास से नफरत हो रही है, नफरत तो उसे पहले से ही थी, उस पर गुस्सा भी था, इसीलिए तो..... 

लोग आ जा रहे थे, ऐसे में' सुहागरात' किसकी मनती है? जिस घर में एक जवान मौत हुई है। गर्वित भी जैसे उन बातों को भूल चुका था। रूही का परिवार भी मिलकर जा चुके थे, पारो ने उससे पूछा था - क्या मैं तुम्हारे साथ यहां रहूं किंतु रूही ने मना कर दिया था। सभी अपने आप में ही खोए हुए थे किसी का किसी  पर भी ध्यान नहीं था।

 रूही ने देखा,हवेली के पिछले  दरवाजे पर एक बुजुर्ग व्यक्ति खड़ा था और हवेली की तरफ देख रहा था।  उसने ध्यान किया इस व्यक्ति को मैंने पहले भी कभी-कहीं देखा है, कहां देखा है ? सोचते हुए दिमाग़ पर जोर डाला , पर शीघ्र उसे स्मरण हुआ , यह तो वही बुजुर्ग है, जो अक्सर पिछले रास्ते पर खड़ा होकर बगीचे की तरफ देखा करता था। आज वह सबसे नजरें बचा कर, उस बुजुर्ग़ के पास  पहुंच गई और उससे पूछा -क्षमा कीजिए ! क्या मैं जान सकती हूं आप कौन हैं ?

तुम्हें जानने की कोई जरूरत नहीं है , कहकर वह बुजुर्ग आगे बढ़ गया। 

रूही ने आसपास देखा कोई देख तो नहीं रहा है और आगे बढ़कर पूछा, मैंने आपको यहाँ पहले भी कई बार पहले देखा है, आप इस घर में आते हैं, देखते हैं और चुपचाप चले जाते हैं क्या कोई बात है ? अपना परिचय दीजिए !

क्या तुम इस घर की नई बहू हो ? उस बुजुर्ग ने जवाब देने के बदले रूही से ही प्रश्न किया।

जी , मैं यहां पहली बार आई हूं।

 जब तुम यहां पहली बार आई हो, तो तुमने इससे पहले मुझे कब देखा ? उस बुजुर्ग ने अपनी अनुभवी नजरों से रूही  के  चेहरे पर नजर गड़ाते हुए पूछा। उनका प्रश्न सुनकर रूही घबरा गई , उसे लगा,इस समय इन्हें यहाँ रोककर उसने कोई बड़ी  गलती कर दी है लेकिन तभी वह बोले -तुम जिस उद्देश्य से यहाँ आई हो, जरा सतर्क रहना, कहकर वो वहां से चले गए। 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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