दमयंती जी जब गर्वित और गौरव का झगड़ा सुलझाने छत पर जाती हैं ,तब गौरव अपना संदेह रूही पर जतलाता है -कहीं ऐसा तो नहीं, रूही हममें फूट डालना चाहती है।
वो भला ऐसा, क्यों करेगी ? वो तो यहाँ पहली बार आई है ,मैं उससे पहली बार शहर में ही मिला था। वो शहर की रहने वाली है, शिखा के गांव से भी उसका कोई रिश्ता नहीं है, वो किसी भी शिखा को नहीं जानती, हालांकि मैंने उससे कभी पूछा भी नहीं है, इसीलिए मैंने सोचा ,मम्मी ने उससे बात की होगी। जब मैं उसके समीप आया था तो वह हंस रही थी, और अचानक ही ,न जाने क्या-क्या पूछने लगी थी ? मैं घबरा गया और सोच रहा था ,इसे ये सब कैसे मालूम ? कुछ देर पश्चात वह भी बेहोश हो गई।
हट्ट ! मुझे नहीं लगता, वह कुछ भी नहीं जानती है, वह अवश्य ही कोई नाटक कर रही है, गौरव ने विश्वास से कहा।
दमयंती उनकी बातें सुनकर सोच में पड़ गई,वो मन ही मन सोच रही थीं कि मुझे उन गुरु जी से मिलना होगा। इस लड़की से विवाह करने से पहले, हमने एक बार भी गुरु जी से मिलना उचित नहीं समझा उनको तो हम तो जैसे भूल ही गए वो सब बता देते,किया धरा तो सब उन्हीं का है।
अच्छा, अब तुम दोनों लड़ना बंद करो ! और यह सोचो !कि हम इस' परिवार के चार जिस्म एक जान हैं ', हम एक ही है, हमें कोई अलग नहीं कर सकता और एक दूसरे का साथ निभाएंगे ! हमारे मध्य कोई नहीं आएगा। आपस में यही वादा करके दोनों नीचे आ जाना। दमयंती ने अपनी तरफ से अपने बच्चों को समझाया, तभी उसे ऐसा लगा, जैसे कोई दौड़कर नीचे गया है। क्या कोई हमारी बातें सुन रहा था ? उनकी सचेत दृष्टि ने इधर -उधर देखा किन्तु उन्हें कोई नजर नहीं आया ,दमयंती नीचे आ गई। सबके लिए भोजन बनाया गया, गर्वित और गौरव भी बड़े प्रेम से भोजन कर रहे थे।
रूही ने, गर्वित से पूछा -क्या तुम्हारी दोनों भाइयों में आपस में सुलह हो गई ?
हमारा झगड़ा ही कब हुआ था ? वह थोड़ा सा बात को बदलते हुए बोला - वो आज कुछ ज्यादा ही बोल गया था इसलिए मुझे उस पर गुस्सा आ गया था।
अच्छी बात है , आपकी मम्मी ने भी आपको बहुत समझाया होगा , आपकी मम्मी कितनी अच्छी हैं ? जो पूरे परिवार को एक साथ जोड़कर चलती हैं।
हां यह बात तो है ,खुश होते हुए गर्वित बोला -आज हम दोनों एक हो जाएंगे, तीन दिनों से हम एक -दूसरे से ठीक से बात ही नहीं कर पा रहे थे रूही की तरफ देखते हुए गर्वित ने कहा।
हाँ , हां, क्यों नहीं ? पता नहीं, मुझे ही क्या हो जाता है ? घड़ी में 4:00 बज रहे थे , तभी रूही ने पूछा -आप चाय पियेंगे ! या कॉफी !
कॉफी तो गौरव को पसंद है, मुझे चाय अच्छी लगती है।
तो क्या हुआ ? आज अपने भाई की पसंद की कॉफी पी लो ! दोनों भाइयों के मन में किसी तरह का मेेल नहीं रहना चाहिए। आज अपने भाई से बता देना, आज हमारी' सुहागरात 'होगी। इस खुशी में उन्हें काफी तो पिला ही सकते हो।
मैं ,भला उसे काफी क्यों पिलाऊंगा ? गर्वित ने मुंह बनाते हुए कहा।
इसका मतलब है,आपने अपने भाई को माफ नहीं किया, आप अभी भी उससे नाराज हैं ,रूही ने कहा।
नहीं,मैं उससे नाराज नहीं हूं लेकिन कॉफी पिलाने का प्रश्न कहां उठता है ?यह तो नौकर का काम है।
कॉफी तो नौकर ही बनाएगा , बस आपको देनी है।
तुम भी क्या जिद पकड़ कर बैठ जाती हो ? गर्वित मुंह बनाते हुए बोला -हमारे यहां ऐसा कुछ भी नहीं होता है।
कुछ नया करोगे, तभी तो अच्छा लगेगा। परिवार में, मैं भी तो नई आई हूं, तो कुछ नया हो जाए। कहते हुए रूही ने, घर के नौकर को चाय और कॉफी बनाने का आदेश दिया, उसे लेकर गर्वित के पास गई और बोली -यह तो अच्छा हुआ , तुम्हारे भाई ,अभी हॉल में ही हैं , आप जाकर उन्हें यह काफी दे आइये !
रूही के कहने पर गर्वित, गौरव के लिए कॉफी लेकर जाता है, उसके समीप पहुंच कर बोला -ले, कॉफी पी ले !
तू क्यों लाया है ? यह काम नौकर का है।क्या उसके [रूही ]कहने से अब नौकरों वाला काम भी शुरू कर दिया।
पीनी हो पी ले !कहते हुए ,उसने ट्रे मेज पर रख दी। जानता हूँ, ये कार्य हमारे नौकर ही करते हैं , आज हमारा झगड़ा हुआ है न.... इसलिए कड़वी कॉफी पी ! व्यंग्य से बोला।
मैं तेरे हाथ से काफी क्यों पिऊं ?
मैं कॉफी लेकर नहीं आता, किंतु रूही ने कहा -इस तरह , दोस्ती हो जाती है, प्यार बढ़ता है इसलिए लेकर आया हूं आंखें तरेरते हुए गर्वित ने कहा।
तू, उसका बड़ा कहना मानने लगा है , गर्वित के समीप आते ही बोला -देख ! मैं कह रहा था न... वह नहीं चाहती कि हममें झगड़ा हो। तेरे बहाने उसने मुझे प्रेम का संदेश भेजा है , वो, मुझे पसंद करने लगी है ,अपने हाथ से पिलाती तो उसके हाथ से ज़हर भी पी लेता। आज की रात उसे मेरे कमरे में भेज देना।मैं सब ठीक कर दूंगा।
गर्वित को उसकी बातें सुनकर क्रोध आया ,उसका जी चाहा ,कॉफी उठाकर उसके मुंह पर दे मारे ! किंतु बोला -मेरी ही गलती थी जो मैं, तेरे लिए कॉफी लेकर आया, तू बाज नहीं आएगा कहकर गुस्से से उस कमरे से बाहर आ गया।
मुस्कुराते हुए गर्वित ने कॉफी पी, और हंस रहा हुए बुदबुदाया -बड़ा आया, पत्नी का कहना मानने वाला, उसे मैं ही पसंद हूं इसीलिए तो उसने सुलह कराने के लिए इसे भेजा था,अपनी ही सोच पर मुस्कुराते हुए उसने कॉफी पी। अब तो वो मेरी बनकर ही रहेगी।
तुम्हारे कहने से आज मैं उसे काफी लेकर गया था, लेकिन वह कुत्ते की दुम है वह कभी सीधी नहीं होगी,गुस्से से गर्वित ने रूही से बताया। क्रोध में वह कुछ भी बोले जा रहा था,तभी उसे आभास हुआ कि वो अपने ही परिवार के विषय में कितना गलत बोल रहा है ?तब बोला -'' मैं उसे दिखला दूंगा ,मैं भी एक ठाकुर हूँ ,ठाकुर झुकता नहीं है ,किन्तु अपमान तो कतई पसंद नहीं ,उसे मैं दिखला दूंगा ,मैं असली ठाकुर हूँ।
कोई बात नहीं, परिवार में तो यह सब चलता ही रहता है तभी एकाएक उन्हें, दमयंती के चीखने की आवाज आई। दोनों उठकर भागे ! वहां जाकर देखा, तो गौरव, तड़प रहा था।
इसे क्या हुआ? गौरव शायद कुछ कहना चाहता था लेकिन कुछ कह नहीं पाया उससे पहले ही, वह दम तोड़ चुका था।
इसे क्या हो गया ? डॉक्टर को बुलाया गया किंतु डॉक्टर ने कहा -अब ये इस दुनिया में नहीं रहे।
ऐसा कैसे हो सकता है ?
