रूही ,जानना चाहती थी कि आखिर इस घर के बुजुर्ग़ यानि दादा -दादी हैं ,तो कहाँ हैं ? कन्हैया के कथनानुसार वे लोग कैसे गायब हुए ,उनके साथ क्या हुआ था ? क्या इस परिवार की रस्म का संबंध दादी से है ?
तब दमयंती जी बोलीं -गर्वित की दादी एक तांत्रिक से मिलती थीं , उनसे घर की सुख शांति के लिए पूजा -पाठ करवाती रहती थीं,वैसे देखा जाये तो उनका उद्देश्य गलत नहीं था। जब मेरा विवाह हुआ तब मुझे तुम्हारे छोटे पापा 'ज्वालासिंह जी 'पसंद थे किंतु उस समय मेरी उम्र भी कम थी,मैंने सोचा था मेरा विवाह 'ज्वालासिंह जी 'के साथ हुआ है किन्तु मेरा विवाह इस घर के बड़े बेटे' जगतसिंह 'के साथ हुआ। इसे गलतफ़हमी भी कह सकते हैं। ख़ैर छोडो !ये एक लम्बी कहानी है।
तब तुम्हारी दादी ने मुझे लालच दिया- धन का, वैभव का और परिवार की एकता का ,एक तरफ मेरा प्यार ,दूसरी तरफ पति ,तब उन्होंने कहा '-ये सब तुम्हारा ही बना रहेगा ,जब तुम इस परिवार को जोड़कर चलोगी ,इस घर की एकता भी बनी रहेगी। 'उस समय मुझे इतनी अक्ल भी नहीं थी कि यह मेरे साथ क्या हो रहा है? मैंने सहर्ष उनकी बातें स्वीकार कर लीं कुछ परिस्थितियाँ ऐसी होती चली गईं कि मैं इस परिवार के सांचे में ढलती चली गईं।
अब मेरे पांच बेटे हो गए थे ,तब मैंने सोचा था ,मैं उनकी अलग-अलग जगह शादी करूंगी जिससे कोई लड़की, मेरी तरह इस भंवर में न फंस जाए, किंतु ऐसा नहीं हो पाया। जब उन्हें मेरी विचारधारा का पता चला तब उन्होंने उस तांत्रिक से एक बंधन बंधवा लिया, उनके चार बेटे थे ,मेरे भी चार बेटे ही होंगे और उनकी भी एक ही पत्नी आएगी किंतु मेरे पांच बेटे हुए ,उस बंधन में मेरा पांचवा बेटा नहीं था इसलिए वह परिस्थिति वश इस दुनिया से चला गया।
अब मेरे चार ही बेटे रह गए थे, तब इनकी दादी ने बताया -इनकी भी एक ही पत्नी होगी, इनका बंधन बन चुका है, परिवार की सुख शांति के लिए यह बंधन बन गया था। मैं अपने बच्चों की जिंदगी बर्बाद नहीं करना चाहती थी। इस परिवार को हर कोई अपनी लड़की देना नहीं चाहता था ,पैसा होने के साथ -साथ ये सभी अय्याश ,ठाकुरों वाली अकड़ ,जितनी भी बुराइयां इनमें होनी चाहिए सभी आ गयी थीं।
आपको अपने बच्चों को तो समझाना चाहिए था ,मैंने सुना है ,आप पढ़ी -लिखीं थीं ,दादी के बच्चे बिगड़े ,आपके भी बिगड़ गए।
क्या करती ?मैं अकेली क्या कर सकती थी ? बचपन से ही , इन्होंने अपने बाप -चाचा को देखा ,दादा -दादी की सह मिली ,ये भी बिगड़ने लगे थे। मेरी सास कहती थी - इन्हें किस चीज की कमी है ? ज़िंदगी मजे करने के लिए है ,न कि पढ़ाई और रोज़गार ढूंढने में समय व्यतीत करने की। किन्तु मैं चाहती थी -मेरे बच्चे ज़िम्मेदार,समझदार बने। तब मैंने अपनी सास से कहा -' हर लड़की नहीं चाहती कि उसके चार -चार पति हों ,मैं तो अनजाने ही फंस गयी थी किंतु अब मैं इन बच्चों के साथ ऐसा नहीं होने दूंगी।
किन्तु तब मैं मजबूर हो गई थी ,जब उन्होंने मुझे बताया -उन्होंने चारों बच्चों का बंधन बंधवा दिया है ,यदि मैं उस बंधन को तोड़ती हूं तो फिर मेरे बच्चों की मौत होती है और उस बंधन में ,तेजस नहीं था। इसी डर के कारण मैंने उस रस्म को माना क्योकिं मैं अपने तेजस का हश्र देख चुकी थी अपने बच्चों की ख़ातिर मैं स्वार्थी और कठोर ह्रदया महिला बन गयी थी।
आपने ,उनसे पूछा नहीं -दादी ने, ऐसा क्यों किया ? वो सबकी जिंदगी से खेल गईं ?
मुझे उन पर बहुत क्रोध आया गुस्सा भी था मैं उस बंधन को तोड़ देना चाहती थी किंतु ऐसा ना कर सकी और एक दिन वो इस दुनिया से चली गईं ।
किन्तु मैंने तो सुना है ,अचानक गायब हो गयीं ,कहते -कहते यह सोचकर रूही रुक गयी,कहीं वो पूछने लगीं, तुमसे किसने कहा ?तब उसने अपनी सोच को बदला और पूछा - क्या आप उस तांत्रिक से फिर से मिलकर, उस बंधन को तुड़वा नहीं सकती हैं , रूही ने दमयंती का दर्द महसूस किया।
मैंने उस तांत्रिक को बहुत ढूंढा, किंतु वह कहीं गया हुआ था, मुझे कहीं नहीं मिला। जो मेरे परिवार में अनहोनी होनी थी, वह तो हो ही गई थी ,मेरा तेजस चला गया किंतु मेरे परिवार में कोई भी अपनी लड़की देने के लिए तैयार नहीं था इस कारण मैं अपने बच्चों के लिए थोड़ी स्वार्थी हो गई थी।
तब आपने अपने स्वार्थ में क्या किया ? रूही को लगा जैसे ये अभी शिखा की बात उसे बताएंगीं।
क्या करना था ? अब मेरा गर्वित तुम्हें विवाह करके ले आया है लेकिन मुझे लगता था कि उसने तुम्हें सारी बातें बता दी हैं ।
मैंने तो सुना था, तेजस का विवाह हुआ था, रूही ने पूछा।
हाँ... हुआ था, वह लड़की भी मनहूस ही थी, बंधन से बाहर थी इसीलिए मेरे तेजस को ले गयी।
अब वह लड़की कहां है ?
मैं नहीं जानती, होगी कहीं , कहकर उन्होंने बड़ा बुरा सा मुँह बनाया और बोलीं - तुम्हें, मैंने सारी बातें बता दी हैं , अब तुम अपने को मानसिक रूप से तैयार कर सकती हो। अब इस परिवार में जैसे गर्वित नहीं है, सुमित और पुनीत तो हैं, कहकर उन्होंने इशारा किया।
रूही को वो अभी भी पूर्णतया स्वार्थी और मतलबी लगीं । वह वहां से चुपचाप बिना कुछ कहे उठ कर चली आई किन्तु तभी वापस आई और बोली - ये बंधन चार बच्चों का था ,अब तो तीन ही रह गए। बंधन तो स्वतः ही टूट गया। अब इसकी कोई आवश्यकता नहीं, कहकर वो बाहर आ गयी।
ये तो मैंने सोचा ही नहीं था ,दमयंती ,रूही के जाने के पश्चात सोच रही थी। वो तांत्रिक न जाने कहाँ मिलेगा ?उसका पता लगाना होगा और उससे मिलना भी होगा। अब दमयंती की सोच इसी बात पर अटक गयी थी। तब उसने सुमित को बुलाना चाहा किन्तु आजकल न जाने सुमित कहाँ रहता है ?घर पर भी कम ही नजर आता है। इन बच्चों ने जब पहली बार शिखा को देखा था ,उसके समीप ही मंडराते रहते थे और सोचते मेरा नंबर कब आएगा ? किन्तु न जाने, इस लड़की में ऐसी क्या बात है ? जो इसे ब्याहकर लाया है ,वही इसके संग एक रात्रि न बिता सका। सुमित भी न जाने, आजकल कहाँ रहता है ? परेशान होकर सोचने लगीं ,न जाने इस घर को क्या होता जा रहा है ?किसी को किसी की परवाह ही नहीं रह गयी है। एक घर छोड़कर चला गया ,और ये दोनों न जाने किस दुनिया में रहते हैं ?
