कुणाल ,कल्याणी देवी से कहना चाहता है ,कि विदेश में उनकी जो फुफेरी बहन रहती है ,उसका हमें नंबर और पता दे दीजिये।
तब वो स्पष्ट रूप से मना कर देती हैं और कहती हैं - उसका इस केस से कोई लेना -देना नहीं है ,मैं किसी भी प्रकार से उसको परेशान करना नहीं चाहती।
आप हमें गलत समझ रही हैं, आपकी बेटी को तो हम नहीं ढूंढ पाए ,कम से कम हम उस आदमी के कातिल को तो ढूंढ सकते हैं ,वो कलाकार यानि कि 'यामिनी'जो विदेश में रहती हैं इसीलिए हम उनकी मदद चाहते हैं।
यह कोई बात नहीं हुई, वह कीर्ति तो लंदन में रहती हैं , क्या आपकी वह कलाकार लंदन से आई थी? कल्याणी ने पूछा।
हम नहीं जानते, कि वह कहां से आई है ? किंतु छानबीन तो कर ही सकते हैं ,'' आम जनता ही हमारी सहायता नहीं करती है और फिर हम लोगों को ही दोष देते हैं कि हमने अपना केस सॉल्व नहीं किया, कुणाल ने जवाब दिया।
देखिए ,इंस्पेक्टर साहब ! आप किसी भी थाने में काम करते हैं, मुझे इस बात से कोई मतलब नहीं है किंतु मैं इस समय अपनी उस बहन को इन सब झमेलों में खींचना नहीं चाहती हूं।
चलिए ,छोड़िये !क्या आप किसी मधुलिका नाम की महिला को जानती हैं ?
कौन मधुलिका ? अनजान बनते हुए, कल्याणी ने पूछा।
क्या आप अखबार नहीं पढ़ती हैं ? जिस लड़के कुमार की हत्या हुई है, वह इसी शहर का रहने वाला है, क्या आप' कुमार श्रीवास्तव' को भी नहीं जानती हैं।
पहलू बदलते हुए, कल्याणी देवी बोली -देखिए ! मैं इनमें से किसी को भी नहीं जानती हूं, और यदि जानती भी होंगी तो बहुत दिन हो गए ,मुझे कोई याद भी नहीं है। उसकी हत्या क्यों हुई, किसने की ?
इस बात का ही तो हम पता लग रहे हैं, इसीलिए यहां पर इंस्पेक्टर साहब हमारी सहायता के लिए आए थे क्योंकि यह इसी शहर का केस है, इंस्पेक्टर तेवतिया ने कहा।
मैं इनमें से किसी को भी नहीं जानती हूं, अभी तो आप कह रहे थे किसी विदेशी लड़की ने अपने पति की हत्या की है, अब आप कह रहे हैं - कि मधुलिका के पति की हत्या हुई है। यह गुत्थी क्या है ? कल्याणी देवी ने पूछा।
अभी हम इस केस पर काम कर रहे हैं जैसे ही कुछ पता चलेगा, आपको बताते हैं।
मुझे बताने की कोई आवश्यकता नहीं है, आप मेरी बेटी का केस सॉल्व कीजिए ! वह आज तक नहीं मिली है अब तो पता नहीं बेचारी जिंदा भी होगी या नहीं, कहते हुए उसने रोने का अभिनय किया।
आप फिक्र न कीजिए ! हम जल्द ही, आपकी बेटी के पति के और मधुलिका के पति के कातिल को ढूंढ निकालेंगे, कह कर कुणाल उठ खड़ा हुआ। वो सभी उस कोठी से बाहर आ गए। गाड़ी में बैठकर सोच रहे थे -क्या हो सकता है ?
कुणाल ने कहा- देखो ! ये कितनी चालाक है ? उसे पता है, कि वह डॉक्टर है लेकिन उसने यह नहीं बताया किस चीज की डॉक्टर है, यह जानबूझकर नहीं बताया होगा, न ही हमें पता दिया है और न ही फोन नंबर....
वो तो हम पता लगा ही लेंगे, इंस्पेक्टर तेवतिया ने जवाब दिया। उनके जाने के पश्चात कल्याणी देवी, उस लड़की को डांट रही थी , तुझे उन लोगों के सामने आने की क्या जरूरत थी ? पुलिस वाले ऐसे ही होते हैं , बाहर ढूंढने की बजाय, घर के लोगों पर ही शक करने लगते हैं ,अब जाओ, अपने कमरे में बैठो !
कुछ देर पश्चात मधुलिका के घर का दरवाजा खटखटाया जाता है, अंदर से विधवा के वस्त्रों में, मधुलिका दरवाजा खोलती है, उसकी उदास नजरें कह रही थीं -वह शायद रात भर सोई भी नहीं है, उसकी सूनी आंखें किसी को खोज रही थीं , या फिर उम्मीद ही छोड़ चुकी हैं। उसने इंस्पेक्टर कुणाल को देखकर उससे पूछा -इंस्पेक्टर साहब ! आप यहां किस लिए आए हैं ?
मुझे तुमसे कुछ बातें करनी है , कुछ पूछना चाहता हूं।
जी पूछिए !कहते हुए ,वह एक कुर्सी पर बैठ गई। अच्छा बताओ ! क्या तुम इसी शहर में रहने वाली किसी कल्याणी देवी को जानती हो ?
इंस्पेक्टर कुणाल की बात, सुनकर मधुलिका थोड़ी सोच में पड़ गई, वह सोचने लगी, यह नाम मैंने कहीं सुना है, याद करने का प्रयास कर रही थी किंतु पारिवारिक परेशानियों ने जैसे उसकी मति को भ्रमित कर दिया था,उसकी बुद्धि मंद पड़ गई थी। तब इंस्पेक्टर ने उसे सोचते हुए देखकर पूछा -उनकी बेटी, शिल्पा जो एक कलाकार थी, उसे तो जानती हो।
इतना सुनते ही, उसे जैसे सब याद आ गया , और चहकते हुए बोली -शिल्पा ! तो मेरी सहेली थी , कल्याणी देवी उसी की मम्मी तो है ,मैं भूल ही गई थी। वैसे आप यह सब क्यों पूछ रहे हैं ?
क्या तुम शिल्पा को अच्छे से जानती हो ?
हां हां, हम साथ ही पढे हैं, किंतु विवाह के पश्चात हमारा कभी मिलना ही नहीं हुआ।
एक शहर में रहकर भी , तुम आपस में क्यों नहीं मिले ?
यह अलग बात है, कह कर वह थोड़ा चुप हो गई।
कोई भी अलग बात नहीं है, तुम्हारी दी गई छोटी से छोटी जानकारी भी, हमारे इस केस को सॉल्व करने में सही साबित हो सकती है।
हिचकिचाते हुए, मधुलिका बोली -सर ! दरअसल यह हुआ था, शिल्पा, कुमार से प्रेम करने लगी थी , कुमार को उसकी कलाकृतियां बहुत पसंद थीं ,किंतु कुमार उससे प्रेम नहीं करते थे, जब कुमार से मेरा विवाह हुआ , इस बात से वह नाराज हो गयी थी, तभी से हमारा मिलना भी नहीं हुआ।
यह बात सुनकर कुणाल उठ खड़ा हुआ और इंस्पेक्टर तेवतिया से मिलकर कुछ बातें कीं। और अपने थाने में चला गया।
इंस्पेक्टर कुणाल और इंस्पेक्टर तेवतिया दोनों ही मिलकर, इस केस पर, कार्य कर रहे थे दिन बीतते जा रहे थे। किंतु अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं मिला था। अभी उन्हें साथ में कार्य करते हुए, नौ -दस महीने हो चुके थे, कोई कुछ समझ नहीं पा रहा था, आखिर यह करना क्या चाहते हैं ?
इंस्पेक्टर कुणाल आप क्या कर रहे हैं ? यह किसे ले आए ?
जिसे हम कई वर्षों से ढूंढ रहे थे, आज हमारी तलाश पूरी होगी , कहते हुए इंस्पेक्टर कुणाल ने, अपनी गाड़ी से उस लड़की को बाहर निकाला। डरी , सहमी सी वह लड़की इधर-उधर देख रही थी।
इंस्पेक्टर तेवतिया ने पूछा - यह कौन है ?
