इंस्पेक्टर कुणाल और तेवतिया दोनों ही 'कुमार की हत्या 'को लेकर उस गुत्थी को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं। तब बातें करते -करते तेवतिया, कल्याणी जी के विषय में कुणाल को बताता है।
तब कुणाल ,तेवतिया से पूछता है- कि क्या विदेश में कल्याणी जी की भी कोई रिश्तेदार हैं ?
हाँ ,एक बार कल्याणी जी ने बताया तो था ,'वहां उनकी कोई 'फुफेरी बहन' रहती है।'
और वो वहां क्या कार्य करती हैं ?उनके परिवार में और कौन -कौन है ? न जाने क्यों ? कुणाल को बार -बार लग रहा था कि हो न हो ,भरतपुर की उस पेंटर लड़की का संबंध अवश्य ही इस केस से हो सकता है।
हमने पूछा ही नहीं, क्योंकि हमें लग रहा था ?कल्याणी जी जानती हैं -उनकी बेटी कहाँ हैं ?हम उन्हें थाने में भी लाये और उनसे पूछताछ की किन्तु उनका एक ही कथन था -मैं कुछ नहीं जानती ,मेरी बेटी ग़ायब हुई है और आप लोग उसे ढूंढने की बजाय ,हम पर ही शक कर रहे हैं। हमारे पास उनके विरुद्ध कोई सबूत भी नहीं था, हम भी बिना सबूत ,उन्हें कब तक पकड़कर रखते ?
सर !ये भी तो हो सकता है ,यदि उस लड़की ने अपना चेहरा बदलवाया है, अभी भी तो बदलवा सकती है। लोग भी न कितनी जल्दी चेहरे पर चेहरा लगा लेते हैं ? इसके आधार पर तो हमें पता लगाना चाहिए कि क्या इसी शहर में किसी लड़की ने प्लास्टिक सर्जरी करवाई है ?
मुझे नहीं लगता ,यहाँ ऐसी कोई सुविधा होगी ,ये कार्य तो बड़े -बड़े शहरों में होता है इतने बड़े देश में न जाने, वो किस शहर में वो होगी और न जाने किस सर्जन से वो, यह काम करवा रही होगी ?यह पता लगाना बहुत ही मुश्किल है। फिर भी मैं अपने लोगों को इस काम पर लगाता हूँ।
हाँ ,हम प्रयास तो कर ही सकते हैं ,दो लोगों की हत्या हुई है और वो भी एक महिला ने की है। क्या मैं एक बार जाकर कल्याणी जी से मिल सकता हूँ ,कुणाल ने ,इंस्पेक्टर तेवतिया से पूछा।
हाँ -हाँ क्यों नहीं, हो सकता है ,आपके केस को सुलझाते -सुलझाते ,हमारा केस भी सुलझ जाये ,बहुत दिन हो गए हो गए कल्याणी देवी से मिले हुए ,चलो ! मैं भी साथ चलता हूं , मेरा भी उनसे मिलना हो जाएगा।
कुछ देर के पश्चात वे सभी, कल्याणी देवी की कोठी के सामने उनकी गाड़ी खड़ी होती है, गार्ड से पूछा - क्या कल्याणी देवी जी घर पर ही हैं। उसने बड़े अदब से जी, कहकर अंदर बात की और फिर दरवाजा खोल दिया।
अंदर पहुंचकर इंस्पेक्टर तेवतिया ने देखा, कल्याणी देवी अपने ड्राइंग रूम में ही बैठी हुई थी, उनके चेहरे पर मुस्कुराहट थी, पहले जैसा गम नहीं था। इंस्पेक्टर साहब ने जाते ही प्रश्न किया - क्या आपकी बेटी की कोई खबर मिली ?
उनका प्रश्न सुनते ही, कल्याणी देवी का चेहरा उतर गया और बोली -अभी कहां ? इंस्पेक्टर साहब !आप तो कुछ भी नहीं कर रहे हैं और तो और मुझसे ही पूछने चले आये ,जैसे आप नहीं इस केस को मैंने अपने हाथों में लिया है। आज तक इतने दिन हो गए ,आप मेरी बेटी का पता तक नहीं लगा पाए,उलाहना देते हुए बोलीं।
हमने तो बहुत प्रयास किया, किंतु आप भी हमारी कोई सहायता नहीं कर रही हैं।
भला, इसमें मैं, आपकी क्या सहायता करूंगी ?जितना मुझे मालूम था मैंने आपको बता दिया। तभी अंदर से एक लड़की बाहर आई उसे देखकर इंस्पेक्टर तेवतिया चौंक गए और बोले -यह लड़की कौन है ?
मुस्कुराते हुए, कल्याणी देवी बोली - यह हमारे रिश्ते में, ही है। इनकी बहन की बेटी है।
इसे पहले तो कभी नहीं देखा, इसीलिए पूछा।
देखेंगे कैसे ? जब यह अभी आई है,अब मेरी बेटी तो मिल नहीं रही है ,मेरा अकेली का मन नहीं लग रहा था इसीलिए इसे बुला लिया, कल्याणी देवी ने स्पष्ट जवाब दिया।
इंस्पेक्टर उस लड़की को ध्यान से देख रहा था, वह उसे इतने ध्यान से देख रहा था जैसे वह उसके चेहरे की परतें उतार देना चाहता था, जैसे यही, कल्याणी देवी की बेटी है ,एकाएक पूछ बैठा - इस लड़की का नाम क्या है ?
' रोहिणी' कल्याणी देवी में जवाब दिया और उससे बोली -तुम जाओ ! अपने कमरे में बैठकर अपनी पढ़ाई करो !
तभी उनकी बातें सुनते हुए एकदम से इंस्पेक्टर कुणाल बोले -क्या इसे भी, पेंटिंग बनाने का शौक है।
इंस्पेक्टर साहब ! यह आप कैसी बातें कर रहे हैं ? और आप साहब कौन हैं? कुणाल को न पहचानते हुए, कल्याणी ने पूछा ?
आप' इंस्पेक्टर कुणाल' हैं , ये एक केस की तहकीकात कर रहे हैं, यह' धौलपुर 'थाने से हैं । वहां एक लड़की ने अपने पति का खून कर दिया, उसी केस की तहकीकात कर रहे हैं। कमाल की बात तो ये है ,वो लड़की भी एक बड़ी कलाकार है।
इस बात पर वो, एकदम शांत हो गयी ,मेरे यहाँ, इन्हें क्यों लाये हैं ? तुनककर बोली - क्या आपको शक़ है , वो लड़की मेरे यहाँ है ? आपसे, मेरी लड़की तो मिली नहीं ,दूसरे केस में भी ,शक की सुईं मेरी तरफ ही घुमाना चाहते हैं। जो भी कलाकार होगा ,वो ही मेरा रिश्तेदार होगा, मुझे तो लगता है - आपने तो जैसे यही मान लिया है।
नहीं, आपके केस से इसका कोई संबंध हो भी कैसे सकता है ?वो तो कोई विदेशी लड़की है , मैं तो इधर से गुजर रहा था ,सोचा आपसे मिलता चलूँ ,ये मेरे साथ थे ,इसीलिए ये भी आ गए। हो सकता है ,ये ही हमारे केस में हमारी कुछ सहायता कर दें।
वैसे आप हमें बताइये !आपकी विदेश में जो रिश्तेदार रहती हैं ,वो क्या काम करती हैं ?अचानक कुणाल ने पूछा।
आपको कैसे मालूम ? कि विदेश में मेरी फुफेरी बहन भी रहती है, जरूर इन्हीं इंस्पेक्टर साहब ने आपके ''कान भरे होंगे'' वो कुछ भी करें इस बात से हमें क्या ?कल्याणी जी ने, बातों को बदलने का प्रयास किया।
'मेरे कान किसी ने भी नहीं भरे हैं 'मैं बस अपना कार्य कर रहा हूं ,जब हम केस सुलझा रहे हैं ,तो इस तरह के प्रश्न तो सामने आएंगे ही...कुणाल ने कहा।
आपके केस से मेरी फुफेरी बहन का क्या मतलब ?' कल्याणी देवी 'ने जवाब दिया।
उनका कोई मतलब नहीं है, मैं तो सिर्फ यह जानने आया था, हमारे केस में जिस लड़की ने अपने पति की हत्या की है , वह यह बात जानबूझकर बार-बार बोल रहा था ताकि कल्याणी देवी बौखला जाए , वो कोई विदेशी लड़की है इसलिए हम आपसे जानना चाहते थे, ताकि हम केस को शीघ्र अति शीघ्र सुलझा सकें कुणाल ने यह बात इतनी सहजता से की, कल्याणी देवी उसकी बात का विरोध न कर सकी। उसे, इसमें कुछ गलत भी नहीं लगा, तब वह बोली -वो एक 'डॉक्टर' है।
किस चीज की डॉक्टर है ? अचानक उत्साहित होते हुए कुणाल ने पूछा।
यह तो मैं भी नहीं जानती, न हीं मैंने उससे कभी पूछना चाहा , कभी कभार बात होती है, मैंने जरूरत भी महसूस नहीं की, बस एक बार उसने मुझे बताया था -कि वह एक डॉक्टर है।
क्या आप हमें उनका नाम, पता ,फोन नंबर दे सकती हैं ?
नहीं, मैं भला आपके केस में उसे शामिल क्यों करना चाहूंगी ? उनका किसी कलाकार से कोई मतलब नहीं है, बेचारी वैसे ही घबरा जाएंगीं।
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