Khoobsurat [part 120]

जब 'इंस्पेक्टर कुणाल ' उस कॉलिज के प्रधानाध्यापक से कहता है -एक हत्या का मामला सामने आया है और हमें शक़ है ,इसमें उस कलाकार का हाथ है। 

तब प्रधानाध्यापक को जैसे उनकी बात पर विश्वास नहीं होता और वो कहते हैं -यह सब गलत है ,झूठ है ,वो तो पहले से ही शादीशुदा है और गर्भवती भी है। 

तब इंस्पेक्टर कुणाल ,कुर्सी से उठकर ,उनसे कहते हैं -वो सब आप हम पर छोड़ दीजिये ,हमें तो बस आप यह बता दीजिये ! वो यहां से कब और कहाँ गई है ?


 वह तो कल शाम  ही निकल गई थी। उसे जहां जाना होगा, गई होगी। अब हम इस बात का कैसे पता लगाएंगे ?रामदीन ने पूछा। 

 हवाई अड्डे से पता लगाओ ! किसी यामिनी नाम की महिला ने कहाँ की टिकट बुक कराई थी ? इस तरह क्या देख रहे हो ? भई ! जाने से पहले उसने टिकट तो बुक कराई होगी या नहीं  और उसके विषय में पूछताछ करते हैं। 

तभी दौड़ता हुआ, जाधव आता है और कुणाल से बताता है -साहब !चार -पांच  साल पहले भी एक ऐसा ही  केस आया था। उसमें एक लड़की ने अपने पति की हत्या की थी ,वह भी एक कलाकार थी। 

क्या वो भी एक चित्रकार थी ,उसकी फ़ाइल दिखाओ ! हो सकता है ,दोनों केस एक -दूसरे से जुड़े हों। 

किन्तु साहब ! यह केस हमारे शहर का नहीं है, दूसरे शहर का है, किन्तु कुछ ऐसा ही था। उसमें भी वो लड़की एक अच्छी कलाकार थी। उसका पति एक प्रतिष्ठित कंम्पनी में कार्यरत था,विवाह के कुछ महीनों पश्चात ही, उसने अपने पति की हत्या कर दी थी और स्वयं गायब हो गई थी। यह लगभग 5 साल पुराना केस है।

कैसे ग़ायब हो गयी ? क्या वह कलाकार फिर मिली या  नहीं ? कुणाल ने पूछा।

 नहीं साहब ! अभी भी वह केस चल रहा है,उस केस को शायद काफी समय हो गया ,बंद भी कर दिया हो तो कह नहीं सकते। 

हमें उस शहर के....  क्या नाम बताया था तुमने !

जी ,भरतपुर ![काल्पनिक नाम ]यह केस भरतपुर का था। 

हाँ तो भरतपुर के थाने में बात करनी होगी। उस केस के विषय में भी जानना होगा। जाधव ! तुम फोन करके उस केस के विषय में उनसे बात करो ! आजकल उस थाने के' प्रभारी 'कौन हैं ?

जी, उस थाने के इंचार्ज 'इंस्पेक्टर तेवतिया' हैं ,मैं अभी उनसे बात करता हूँ। 

कुछ देर पश्चात जाधव आकर बताता है ,सर ! उस केस में उस लड़की की तलाश अभी भी जारी है,वो अभी तक नहीं मिली ,न ही कोई फोन आया। उसकी माँ का कहना है -'उनकी लड़की का अपहरण हुआ है किन्तु आज तक किसी भी अपहरणकर्ता ने उनसे कोई सम्पर्क नहीं किया।''वो यह मैंने को तैयार ही नहीं है कि उनकी बेटी ने ही उनके दामाद की हत्या की है।  

गहन विचार करते हुए इंस्पेक्टर कुणाल ने पूछा -उसके पति की हत्या कैसे हुई थी ?

उसकी गर्दन पर एक [नाइफ ]का प्रयोग किया गया था किन्तु वो नाइफ ऐसा -वैसा नहीं था। 

क्या मतलब ?

वो' नाइफ़' पेंटिंग्स बनाने के काम आता है ,आगे से नुकीला और पीछे से चौड़ा होता है ,कुछ बर्फी के आकार का... 

क्या जाधव भूख लगी है ? इंस्पेक्टर ने मुस्कुराते हुए पूछा। 

हाँ ,सर !लगी तो है ,झेंपते हुए जाधव ने जबाब दिया।

इंस्पेक्टर ने आवाज़ लगाई - रामदीन !

जी सर !किसी से कहकर हम सभी के लिए चाय और चाय -नाश्ता मंगवा लो !और हाँ बर्फी भी कहकर कुणाल फिर से मुस्कुरा दिया। 

क्या ऐसा हो सकता है ?सोचते हुए कुणाल बुदबुदाया  - पांच वर्षों  तक वह कलाकार गायब रही और पांच वर्षो के पश्चात, फिर वही कलाकार आकर किसी की हत्या कर दे।ये कैसे हो सकता है ?अच्छा,जाधव ! ये बताओ !उस लड़की का नाम क्या था ? 

तमन्ना ! इसी नाम से पेंटिंग्स बनाती थी किन्तु ये भी उसका असली नाम नहीं था ,सर !

क्या मतलब ?

उसका असली नाम तो' शिल्पा' था किन्तु कलाकृतियां 'तमन्ना' के नाम से बनाती थी। 

ऐसा क्यों ?

ये बात तो वही जाने, तब तक चाय और नाश्ता आकर मेज पर रखा जा चुका था। तब जाधव हाथ में चाय की प्याली पकड़ते हुए बोला -सर ! संयोग तो देखिये ! ये कुमार श्रीवास्तव भी तो वहीँ का है।  

हाँ ,मैं भी तो वही सोच रहा हूँ ,उस केस का विस्तार से, पता लगाओ ! कि वह केस क्या था ?उसकी फ़ाइल मंगवानी होगी और उस लड़की की कुछ तस्वीरें भी ,क्योंकि नाम तो बदला जा सकता है ,जैसे वो' शिल्पा' से' तमन्ना' बनी तो क्या' यामिनी' नहीं बन सकती ?

अगले दिन रामदीन का जब कुणाल से सामना होता है ,तब कुणाल उससे पूछता है - कुछ पता चला ,यामिनी ने कौन सी फ्लाइट पकड़ी ?

इस नाम की किसी भी लड़की ने कोई फ्लाइट नहीं ली है। 

ऐसा कैसे हो सकता है ? कुणाल अपनी कुर्सी से उठ खड़ा हुआ और सोचने लगा -फिर वह कहाँ जा सकती है ? या उसने फिर से तो नाम नहीं बदल लिया। जरा पता लगाओ ! उस लड़की की कोई तस्वीर मंगवाओ !   क्या वह कलाकार' यामिनी' ही है। उस कलाकार का संबंध कहां से था, उनके मध्य क्या हुआ था ?उनकी पूरी जानकारी  हमें प्राप्त होनी चाहिए।

 ठीक है, सर !मैंने पहले ही उस तमन्ना की तस्वीर मंगवा ली है और उस यामिनी की भी ,जैसे ही वो हमें मिलती हैं, आपको बताते हैं। 

पता नहीं, क्या हो रहा है, लोग कहते हैं -कलाकार नाजुक और नरम मिज़ाज के होते हैं किंतु आजकल की कलाकार देखिए ! हत्याएं करने लगीं हैं ?''क़ातिल हसीनाएं ''कहकर बहुत हंसा। 

सर !कहीं ऐसा तो नहीं , लाल रंग के स्थान पर रक्त के लाल रंग से ही, अपनी कला को सजा संवार रही हो  क्योंकि इस तरह के कलाकार सनकी भी होते हैं ।

कुछ भी हो सकता है किन्तु एक बार पता तो चले ,ये यामिनी कहाँ से आई कहाँ को गयी ?

कुछ देर पश्चात ,कुणाल की मेज पर दो लड़कियों की तस्वीरें थीं ,जो एक दूसरे से बिल्कुल भिन्न थीं। यामिनी एक पढ़ी -लिखी आधुनिक लिबास में लिपटी सुंदर महिला थी वहीँ दूसरी तरफ शिल्पा एक साधारण सी दिखने वाली लड़की ,उन तस्वीरों को देखकर कोई भी कह सकता था ,ये एक ही लड़की नहीं हो सकती। कुछ समझ नहीं आ रहा, ये यामिनी कहाँ गयी ? इसकी तस्वीर लेजाकर ज़रा हवाई अड्डे के सीसीटीवी कैमरे से मिलाओ। कोई भी लड़की उसके जैसी दिखे तो पता लगाना। वो कहाँ गयी है ?

सर !उस कॉलिज के प्रधानाचार्य जी ने उसका जो नंबर बताया था ,वो नंबर भी नहीं लग रहा। 

इस सबसे तो यही लगता है ,ये हत्या एक योजना के तहत हुई है ,पूरी तैयारी के साथ.....  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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