Khoobsurat [part 119]

मधुलिका, इंस्पेक्टर को, यामिनी और कुमार के रिश्ते के बारे में बताती है, किंतु जब इंस्पेक्टर उससे पूछता है -कि इस बात का तुम्हें कब पता चला ?कि उन दोनों के मध्य' अनैतिक संबंध' हैं। 

तब मधुलिका कहती है-  इस बात का मुझे कल ही पता चला , जब मैं' प्रदर्शनी' में अपने बच्चे के साथ गई हुई थी। उन्होंने, मुझसे तो कहा था -'कि मैं मीटिंग में जा रहा हूं किंतु मैंने उनको उस कलाकार 'यामिनी' के साथ देखा।' मैं नहीं जानती थी, कि उनका सामना इस तरह हो सकता है, किंतु तब भी मैंने कुमार से न पूछकर उस 'यामिनी' से मिलने का प्रयास किया ,मैं उससे मिलकर जानना चाहती थी कि वो मेरे पति कुमार को कैसे जानती है ? उनके आपस में कैसे संबंध हैं ?


तब मुझे वहां काउंटर पर बैठी लड़की ने बताया -'कि वो तो अपने पति के साथ चली गई हैं ,तब मुझे आश्चर्य हुआ  कि मेरा पति, उसका पति कैसे हो गया ? यह बात जानने के लिए मैं आगे बढ़ती हूं ,किंतु उस भीड़ में, दोनों ही अचानक न जाने कहाँ ग़ायब गए थे ? मेरे पति को पता नहीं था कि मैं भी उस प्रदर्शनी में शामिल थी। 

क्या तुम्हें, अपने पति  पर पहले से ही शक था ? 

मैं शक करना तो नहीं चाहती थी किंतु जब वे विदेश गए थे और वहां से किसी ने मुझे, उन दोनों की तस्वीरें  भेजी थीं , तब मुझे लगने लगा था ,अपने पति पर विश्वास करके मैंने गलती की है, मेरा पति मुझे धोखा दे रहा है। 

कमाल है ,उन तस्वीरों को देखकर भी आपको क्रोध नहीं आया और अपने पति से बात नहीं की ,उससे पूछा नहीं, उसके साथ उन तस्वीरों में कौन लड़की थी ?

मैंने जब वो तस्वीरें देखीं थीं , उस समय तो बहुत क्रोध आया था,यदि उस समय कुमार मेरे पास  होते तो उनसे अवश्य ही, प्रश्न भी पूछती किन्तु वो तो बाहर ही थे। तब तक मैंने अपने मन को बहुत समझाया था , मैंने सोचा -यह भी हो सकता है, कोई हमारे' घर में आग लगाना 'चाहता है, मुझे भड़काकर हम में झगड़ा करवाना चाहता हो। 

क्या तुमने, अपने पति से इस विषय में उनके आने के पश्चात भी बात नहीं की। 

मैं बात करना चाहती थी किंतु मैं ऐसे मौके की तलाश में थी जिससे मैं, कुमार से अपनी बात कह सकूं  और उनकी बात सुन सकूं। वो हमेशा जल्दबाजी में होते थे। कभी मेरी बात पर ध्यान नहीं देते थे। बहुत दिनों तक वो  कहीं टूर पर भी नहीं गये थे। तब फिर से मैंने, अपने मन को समझा लिया ,किसी ने मज़ाक ही किया  होगा, किन्तु अब तो मुझे सोच कर यही लगता है, कि वह जब भी कभी, किसी टूर  पर या मीटिंग में गये  हैं  तब  वो अवश्य ही किसी न किसी लड़की के संपर्क में रहे होंगे।

आप, क्या कहना चाहती हैं ?क्या आपके पति के कई लड़कियों से संबंध रहे हैं या फिर एक ही लड़की से.... 

ये सब मैं नहीं जानती ,इस लड़की का भी मुझे कल ही पता चला, आप उसी लड़की से पूछिए ! मेरा पति कहां है ? एकाएक उत्तेजित होते हुए तेज स्वर में मधुलिका ने कहा - उसने मेरा घर उजाड़ दिया, आप उससे पूछिए ! कुमार कहां है ? और उसने मेरे पति के साथ क्या किया ?

इतने दिनों से कोई आपको, उसके विषय में बता रहा है ,शायद आपको सचेत करना चाहता था ,तब भी आपने उससे नहीं पूछा ,इस आधार पर तो कह सकते है -'आपका पति एक चरित्रहीन व्यक्ति था ',इतने दिनों से आपने भी ,उससे एक बार भी पूछने का प्रयास नहीं किया और अब एक अनजान लड़की पर संदेह जतला रही हैं। क्या वो उसे पहले से ही जानता था ,इससे पहले तो आपने ,उन दोनों को कभी साथ नहीं देखा था। 

ऐसा नहीं है ,इंस्पेक्टर साहब ! उन्हें चरित्रहीन भी नहीं कह सकते, किन्तु मुझे लगता है ,इस लड़की यामिनी ने उन्हें फंसाया है। आप पहले उस लड़की से मिलिए और उससे पूछिए !उसका पति कौन है और अब कहाँ है ?मुझे तो उन पर पूर्ण विश्वास था किन्तु कुछ तो ऐसा हुआ है ,जिससे मेरी गृहस्थी उजड़ गयी। 

ठीक है ,अभी हम चलते हैं, जैसे भी इस केस के विषय में हम आगे बढ़ेंगे, हम आपको बता देंगे। कहते हुए इंस्पेक्टर कुणाल वहां से उठा। बाहर आकर बोला -जाधव ! तुम्हें क्या लगता है ? इसके पति को किसने मारा होगा ?

साहब ! मुझे तो लगता है, कहीं ऐसा तो नहीं, इस महिला ने अपने पति को उस औरत के साथ देख लिया और इसे ही गुस्सा आ गया और इसने अपने पति को ही मार दिया।

 ज्यादा कुछ का तो पता नहीं ,उससे पहले ही रामदीन ने जवाब दिया -देखकर तो नहीं लगता, यह महिला ऐसा कांड भी कर सकती। 

 आजकल किसी के चेहरे पर लिखा नहीं होता, अच्छा व्यक्ति तो बड़े सोच -समझकर योजना के तहत कार्य कर सकता है। अपराधी तो इतने, खतरनाक होते हैं, कि वह हत्या करके ऐसे मासूम बन जाते हैं , जैसे कि  कुछ जानते ही नहीं हैं । 

कुणाल उन दोनों की बातें सुन रहा था,तब बोला - जहां पर प्रदर्शनी हो रही थी, एक बार वहां जाकर भी देख लेते हैं।  यह भी तो देखना होगा, वह कलाकार यामिनी कौन है ? वह कुमार को कैसे जानती है ? उसका कुमार से क्या संबंध था ? कहते हुए,वे वापस आगरा के लिए प्रस्थान करते हैं। कुणाल  पता लगाता है, कि यहां पर क्या कोई 'चित्रकला प्रदर्शनी' लगी हुई थी। 

एक व्यक्ति ने बताया -हां यहां पर 3 दिन से प्रदर्शनी लगी हुई थी , कल उसका आखिरी दिन था। 

वह कलाकार कहां मिलेगी ? जिसने यह प्रदर्शनी लगवाई थी, मेरे कहने का मतलब है ,जिसने भी वो पेंटिंग्स बनाई थीं। वह कलाकार कहां मिलेगी ?

साहब ! यह बात तो मैं नहीं जानता, जिस कॉलेज के माध्यम से वह प्रदर्शनी लगी थी, आप वहीं पर जाकर बात कर लीजिये। 

 कॉलेज के प्रधानाध्यापक  के सामने, कुणाल पहुंचता है और उनसे पूछता है - आपके यहां पर जो '' प्रदर्शनी''लगी हुई थी, वह कलाकार कहां से आई थी और अब कहां पर है ?

सर ! वह तो कोई विदेशी कलाकार थी , वह अलग-अलग कंट्री में जाकर अपनी प्रदर्शनी लगाती रहती है।वो तो बहुत ही प्रसिद्ध है ,उसके विषय में हमने पढ़ा है। अब उसके विषय में हमें क्या मालूम , वह कहां गई है ? मेरी इस विषय में उनसे कोई बातचीत नहीं हुई। प्रधानाध्यापक ने यह बात  कह कर अपना पल्ला झाड़ लिया। उन्हें बुलाकर ,हमारा उद्देश्य अपने कला के छात्रों को प्रेरित करना ,उनके मन में कला के प्रति जागरूकता और रूचि पैदा करना था। वैसे आप उसके विषय में क्यों जानना चाहते हैं ?

सर ! एक हत्या हुई है, हमें संदेह है ,उस हत्या में वह शामिल भी हो सकती है। हमें अंदेशा है कि वह यहां उस व्यक्ति से मिलने भी आई थी ,जो पहले से ही विवाहित था और एक बच्चे का पिता....सारी बातें तो, उससे मिलकर ही पता चलेंगी। 

इंस्पेक्टर साहब !आप ये कैसी बातें कर रहे हैं ? वो तो एक शादीशुदा संभ्रांत महिला है ,जहाँ तक मुझे लगता है ,वो गर्भवती भी थी ,भला ऐसी महिला किसी की हत्या कैसे कर सकती है ?अवश्य ही आपको कोई गलतफ़हमी हुई है। 



laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post