Khoobsurat [part 118]

 इंस्पेक्टर कुणाल, रामदीन से कहता है -मुझे लगता है , ये  लोग ,यहां पर घूमने आए थे। यह' कुमार श्रीवास्तव' किसी तरह से, अपने परिवार से अलग हो गया और इसकी हत्या हो गई किंतु एक बात समझ नहीं आई ,इसके परिवार वाले, इसे छोड़कर वापस अपने घर क्यों चले गए ? उन्होंने इसकी प्रतीक्षा क्यों नहीं की ?कहीं ऐसा तो नहीं पति-पत्नी में झगड़ा हुआ और उसकी पत्नी ने ही  उसको मार दिया हो।  

यह आप कैसी बातें कर रहे हैं ?साहब ! यदि उनका झगड़ा हुआ होता, तो बच्चा हमें अवश्य ही बताता। 

वह बात तो ठीक है, किंतु कुछ पति-पत्नी बच्चों से अलग होकर भी तो लड़ सकते थे। पति-पत्नी में झगड़ा तो चलता ही रहता है किंतु उसका अर्थ यह तो नहीं कि वह उसकी हत्या ही कर दे। 



नहीं, साहब ! ऐसा नहीं हुआ होगा,यदि ऐसा होता तो उसकी मौत की खबर सुनकर वो इस तरह बेहोश नहीं हो गई होती।

 ऐसा तुम्हें और मुझे लगता है, हो सकता है, वह अनजान बनने का अभिनय कर रही हो। देखो !यहां बैठे - बैठे ही सोचने से या अंदाजा लगाने से कुछ नहीं होगा। अपने लोगों को तैयार करो और इस कुमार श्रीवास्तव के घर चलते हैं और इसकी 'डैड बॉडी' को 'फॉरेंसिक' के लिए भेज दो ! पता तो चलना चाहिए इसकी मृत्यु कैसे हुई है ?

 ठीक है, सर ! यह कहकर रामदीन बाहर चला गया।

कुछ देर पश्चात इंस्पेक्टर कुणाल ने , 'कुमार श्रीवास्तव' के घर का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने देखा दरवाजा खुला हुआ था ,किन्तु घर में सन्नाटा छाया हुआ था। 

रामदीन ने ,औपचारिकता वश दोबारा दरवाजा खटखटाकर पूछा -क्या कोई यहां है ? 

तभी एक छोटा बच्चा दौड़ता हुआ बाहर आया और उन्हें देखकर तुरंत ही अंदर भी चला गया किन्तु उसकी आवाज आ रही थी - मम्मी !पुलिस आई है।

कुछ देर पश्चात  एक पतली -दुबली खूबसूरत महिला कमरे से बाहर आकर झांकती है, उसके चेहरे की उदासी और उसकी सूनी आँखें बतला रही थीं , जैसे वह बहुत देर से रो रही थी।

उसे देखकर इंस्पेक्टर ने कहा -क्या' कुमार श्रीवास्तव' का घर यही है ?  

जी, क्या आपने ही सुबह फोन किया था ?तुरंत ही उसने प्रश्न किया। 

हां मैं ही, इंस्पेक्टर' कुणाल' हूँ और मैंने ही आपको सुबह फोन किया था।

 इंस्पेक्टर साहब मेरे पति.... कहकर वह इधर-उधर देखने लगी,शायद वो सोच रही थी ,हम उसके पति के पार्थिव शरीर को साथ लाये हैं।

 तब रामदीन बोला - आपके पति के शरीर को हमने, अस्पताल भेज दिया है ताकि जानकारी मिल सके उनकी ऐसी हालत कैसे हुई है?

 तभी उसे जैसे एक आशा जगी और पूछा -क्या वो ठीक हैं ?

नहीं, हमें इस बात का अफसोस है कि हमें उनका शरीर, उनकी मौत के पश्चात मिला, मेरे कहने का मतलब यही था, अस्पताल में उनकी' बॉडी' को भेजा गया है ताकि मौत का कारण पता चल सके,अपने शब्दों को सही करते हुए रामदीन ने जबाब दिया ।  

आपने यह कैसे जान लिया? कि वो मेरे पति ही हैं,वो कोई और भी तो हो सकता है ,अविश्वास से मधुलिका ने पूछा। 

 हमने उनकी तलाशी ली थी। उनकी जेब से हमें, उनके कुछ जरूरी कागजात और उनका 'आईडी कार्ड' यही सब मिला था। तीन दिन में उनका पार्थिव शरीर आपको सौंप दिया जायेगा। आप यह सामान देख सकती हैं।  सामान देखकर, हमें बता दीजिए !क्या यह सामान आपके पति का ही है ?

 सामान देखकर मधुलिका रोने लगी और बोली-हम लोग तो आगरा गए थे, वो दूसरी जगह कैसे पहुंच गए ?

 यही तो हम, आपसे जानना चाहते हैं , आप लोग तो साथ गए थे, तब आप अपने बेटे के साथ अकेली क्यों आ गयीं ?

और क्या करती, इंस्पेक्टर साहब ! उनकी प्रतीक्षा करते-करते मुझे शाम हो गई थी, उन्होंने मुझे ताजमहल में मिलने के लिए कहा था किंतु वो वहां नहीं आए मैंने उन्हें कई बार फोन किया था किन्तु उन्होंने फोन भी नहीं उठाया और न ही आए। 

हाँ ,मैंने उस फोन की जाँच की थी ,उसमें से ही तो हमें आपका नंबर मिला। वैसे वे आप लोगों को इंतजार करने के लिए, कहकर वह कहां चले गए थे ?

 अब छुपाने से कोई लाभ नहीं है, मन ही मन मधुलिका ने सोचा-' जिस घर को बनाए रखने के लिए मैं, अपने मन की बात, अपने घर की बात, बाहर आने देना नहीं चाहती थी मेरी जिंदगी तो तब भी बिगड़ ही गई। तब वह बोली -वो किसी मीटिंग में जाने के लिए कह कर तैयार हो रहे थे। उनसे, मैं ही कहने लगी- कि मुझे भी तुम्हारे साथ जाना है। 

वो किस मीटिंग में गए थे ?

 यह तो उन्होंने, मुझे कुछ भी नहीं बताया किंतु इतना अवश्य जानती हूं, वह मुझसे झूठ बोलकर ही जाना चाहते थे। 

ऐसा क्यों ?क्या वो अक्सर इस तरह की मीटिंग में बाहर जाते रहते हैं। 

जी ,उन्होंने मुझे बताया ,अब काम बढ़ रहा है इसलिए उनका बाहर जाना होने लगा था किन्तु डेढ़ बरस से उनकी मीटिंग तो होती थी किन्तु मुझे लग रहा था ,उनके बाहर जाने का  कारण कुछ और भी है। 

तुम्हें ऐसा क्यों लगा ?क्या तुमने ऐसा कुछ देखा जो तुम्हें अजीब लगा ?

यह बात तब की है ,जब वो जयपुर गए थे ,उन्हीं दिनों मुझे एक अनजान फोन आया , क्या कुमार घर पहुंच गए ?

किसका फोन था ?इंस्पेक्टर ने पूछा। 

नहीं मालूम ,उसने अपना कोई नाम नहीं बताया। 

तब आपने अपने पति से नहीं पूछा -वो, किस लड़की का फोन था ?

नहीं ,मुझे लगा, कोई ऐसे ही मज़ाक कर रहा है अथवा हममें गलतफ़हमी पैदा करना चाहता है ,मुझे भी कुमार के व्यवहार से ऐसा कुछ गलत नहीं लगा किन्तु एक बार वो जब देश से बाहर गए ,तब किसी ने मुझे कुछ तस्वीरें भेजीं ,जिनमें मेरे पति किसी लड़की के साथ थे किन्तु उस लड़की का चेहरा नहीं था और मेरे देखते ही, तुरंत वे तस्वीरें हटा दी गयीं। 

क्या तब भी आपने अपने पति से इस विषय में बात नहीं की ? 

मैं उनसे बात करना चाहती थी किन्तु अपनी बात साबित करने के लिए मेरे पास कोई सबूत भी तो होना चाहिए था। यदि मैं सीधे -सीधे उनसे इस विषय में पूछती ,तब वो कहते -तुम्हारे पास क्या सबूत है ? इंकार कर देते तो मेरी बात का कोई महत्व ही नहीं रह जाता इसीलिए मैंने सोचा ,अब मैं उन पर नजर रखूंगी ,उन्हें अकेला नहीं छोडूंगी इसीलिए मैं भी घूमने के बहाने ,उनके साथ गयी थी। 

क्या आपने यह जानने का प्रयास नहीं किया कि किसने वो फोटो भेजे और फोन किया। 

किया था, किन्तु एक ही जबाब आया ,यह नंबर उपलब्ध नहीं है। मैं जानती हूँ , वे पहले से ही ''कला प्रेमी''रहे हैं  किसी भी कलाकार की कोई भी 'प्रदर्शनी ' लगती थी, वो  वहीं  पहुंच जाते थे। शायद आपको पता हो, आगरा के ' दयालबाग कॉलिज ''में एक 'यामिनी' नाम की कलाकार आई थी। वो वहीं गए हुए थे, मुझे लगता है - वो ,उसे व्यक्तिगत रूप से भी जानते थे, मेरे कहने का मतलब आप समझ ही गए होंगे  उन्होंने यह रिश्ता मुझसे छुपाया हुआ था। 

आपको ऐसा क्यों लगा ,और आपको कैसे पता चला? कि उनका कुछ कलाकार से'' अनैतिक संबंध '' था। 



laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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