कुमार के वहां से आ जाने के पश्चात 6 महीने तक, यामिनी ने उससे कोई संपर्क नहीं किया। कुमार भी, थोड़ा सुकून महसूस कर रहा था क्योंकि अब उसे लगने लगा था, शायद मधुलिका को मुझ पर शक हो गया है। इस बीच वो कहीं भी नहीं गया। तब एक दिन अचानक उसे मधुलिका का फोन आया - कहां पर हो ?लगता है , हमें भूल ही गए।
ये बात तुम, मुझसे पूछ रही हो ?बल्कि ये तो मुझे कहना चाहिए था मैं ,तुमसे यह जानना चाहता हूं कि तुम इतने दिनों से कहां थी ?कुमार ने शिक़ायत भरे लहज़े में कहा।
बाहर गई हुई थी, तुम तो जानते ही हो, कि मैं अपनी ''पेंटिंग प्रदर्शनी '' के लिए इधर -उधर जाती रहती हूं।इन दिनों बहुत ही व्यस्त रही , मेरा कोई साथ देने वाला भी नहीं है, मुझ अकेली को ही सब करना पड़ता है , मुँह बनाकर कुमार को अपनी स्थिति से अवगत कराते हुए यामिनी बोली ताकि वो उसकी परेशानी समझे और उससे हमदर्दी रखे।
अच्छा ! अब तुम अब यह बताओ ! कि तुमने इतने दिनों के पश्चात फोन क्यों किया ?और जब मैंने फोन करके तुम्हारा हाल जानना चाहा, तब तुमने फोन उठाया ही नहीं।
शिकायतें ही करते रहोगे ,क्या इतने दिनों के पश्चात भी, मुझसे मिलना नहीं चाहोगे ? मैं तो सोच रही थी-' तुम मेरा फोन आते ही ,खुश हो जाओगे और मुझसे मिलने के लिए उतावले हो जाओगे, किंतु तुम तो उला हना ही दे रहे हो,मुँह बनाते हुए यामिनी बोली।
अच्छा ,अब ये मुँह मत बनाओ !
तुम्हें कैसे मालूम ? मैं, मुँह बना रही हूँ।
हम तुम्हारे एक -एक अंदाज़ से वाकिफ़ हैं ,शायराना अंदाज में कुमार बोला। अचानक ही कुमार के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गयी। तब बोला - उलाहना नहीं दूं तो और क्या करूं ? तुम अचानक ही, इतने दिनों के लिए गायब हो जाती हो और अचानक ही, सामने आ जाती हो और जब मैं फोन करता हूं तो फोन भी नहीं उठाती हो , फिर मुझे यह नंबर देने का क्या लाभ ?
मानती हूं, कि मैंने तुम्हारा फोन नहीं उठाया किंतु मैं इतनी व्यस्त थी, चाह कर भी तुम्हें फोन नहीं कर पाई। अबकि बार मिलोगे, तो आश्चर्यचकित रह जाओगे।
क्यों, क्या बात है ? क्या तुम और जवान हो गयी हो ?शरारत से छेड़ते हुए कुमार ने पूछा। वैसे तो मैं तुम्हारे विषय में अक़्सर पत्रिकाओं में पढ़ता ही रहता हूं।
यही तो.... ये मीडिया वाले भी , हमें चैन से रहने भी नहीं देते,वैसे मैं, इनसे दूरी बनाकर ही रखती हूँ ,न जाने इन्हें ,कब ,कहाँ से ख़बर मिल जाती है ?
ये तो अच्छी बात है ,वे अपने चाहने वालों पर नज़र रखते हैं और उनकी प्रशंसा भी करते हैं ,और उनके प्रशंसकों तक उनका हाल चाल पहुंचा देते हैं किंतु अबकी बार एक बात समझ में नहीं आई , एक जगह मैंने खबर पढ़ी थी, उसमें किसी ने लिखा हैं -कि तुम शादीशुदा हो।''
उनको कहने दो ! वे कुछ भी अटकलें लगा लेते हैं, इसीलिए मैं ज्यादातर खबरों में आना नहीं चाहती किंतु जब मेरी 'कला प्रदर्शनी '' लगती है, तब भी कहीं न कहीं से, कुछ न कुछ सुराग तो वो ढूंढ ही लाते हैं उनका तो कार्य ही यही है, अब फोन पर ही बातें करते रहोगे या मिलने भी आओगे।
अब मुझे कहां आना है ? तुमसे मिलने के लिए अब मुझे भी सतर्क रहना होगा ,कुमार ड़र के मिश्रित भाव से बोला।
क्यों ?ऐसा क्या हो गया ?क्या तुम्हारी बीवी को पता चल गया ?
अभी तो नहीं ,किन्तु ये ख़बरें फैलाने वाले किसी बीवी से कम थोड़े ही न हैं ,कहते हुए हंसने लगा। न जाने तुम्हारे और मेरे रिश्ते को लेकर क्या छाप दें ? वैसे अबकी बार कहाँ आ रही हो ?
अबकि बार मैं उस स्थान पर आ रही हूं, जहाँ ''प्रेम का प्रतीक ''है।
क्या मतलब ? कुमार सोचने लगा, ऐसी कौन सी जगह हो सकती है ?
अरे इतना भी नहीं समझते, अबकी बार में 'आगरा' में आऊंगी वहां के दयालबाग कॉलेज में मुझे बुलाया गया है। वहीं पर यह प्रदर्शनी लगेगी।
ओह !अच्छा किन्तु आगरा तो एक और चीज के लिए भी प्रसिद्ध है ,इसीलिए सोच नहीं पाया क्योंकि अभी ऐसे हालात तो नहीं हुए हँसते हुए बोला।
क्या मतलब ?मैं कुछ समझी नहीं ,तुम्हारा कहने का क्या मतलब है ?समझते हुए जोर से बोली -कुमार.... तुम.... !
कुछ नहीं ,वही तो कह रहा था ,अभी ऐसे हालात नहीं हुए ,जो तुम मेरे'' प्रेम में पागल'' हो जाओ ! किन्तु मैं अवश्य हो जाऊंगा। वैसे, तुम इतना सब कैसे कर लेती हो ?
क्या करना है ? इससे समय कट जाता है, थोड़ी कमाई भी हो जाती है। वरना मेरे खर्चे कौन उठायेगा ? मेरा तो विवाह भी नहीं हुआ।
हां यह तो है, शांत स्वर में कुमार कहता है।
किंतु उसके ये स्वर सुनकर, यामिनी को निराशा हुई , वह सोच रही थी - उसकी याद में वह परेशान रहा होगा और सोच रहा होगा - काश ! मैं इससे विवाह कर लेता , या ये मुझसे विवाह के लिए कहता, कम से कम मेरे लिए सोचता तो होगा। किन्तु कुमार की बातों से उसे लगा ,ये मेरे लिए सोचता तो है,किन्तु मेरा सानिध्य पाने के लिए, किंतु मेरे साथ रात्रि बिताने के लिए , मेरे इस रिश्ते को कोई नाम नहीं देना चाहता। सोचा तो यही था -कि ये मेरे क़रीब आएगा और यह मधुलिका को भूल जाएगा, किंतु ऐसा नहीं हुआ। अब यामिनी समझ गई थी, पुत्र मोह के कारण वह मधुलिका को नहीं छोड़ सकता।
गलती कुमार की भी नहीं है, यामिनी ने तो सिर्फ कुमार का सानिध्य पाना चाहा था किंतु अब उसकी अपेक्षाएं, कुमार के प्रति बढ़ गई है। अब वह कुमार का साथ पाना चाहती है, उसके साथ रहना चाहती है अब जब भी कुमार उसे छोड़कर जाता है, तो उसे लगता है ,न जाने उसके हाथों से क्या चीज छूटती जा रही है ? उसकी इच्छा होती है कि अब कुमार उसके लिए यहां आए, उसके साथ रहे ,उसका ख्याल रखें किंतु कुमार तो जैसे अभी भी उससे बहुत दूर है। ऐसा लगता है, वह उसके पास कुछ समय बिताने के लिए आ जाता है यह बिल्कुल भी सही नहीं है। अब यामिनी को कुमार का इस तरह आना अच्छा नहीं लगता। आज उसने कुमार को, उस स्थल पर बुलाया है , जिसे लोग 'प्रेम की निशानी' मानते हैं।
कुमार को आज बड़े अच्छे से तैयार होते देखकर ,मधुलिका पूछती है -आज कहां जाने के लिए ,तैयार हो रहे हैं ? क्योकि अब इतने दिनों में वह इतना तो समझ ही गयी है ,कुमार जब भी कभी शहर से बाहर जाता है ,तभी इतने अच्छे से तैयार होता है।
आज मेरी बहुत जरूरी मीटिंग है , वहीं जाना है ,अपने कपड़ों पर 'सेंट 'छिड़कते हुए कुमार ने जबाब दिया।
आपकी मीटिंग कहां हो रही है ?जानकारी के लिए मधुलिका ने पूछा।
फिर वही प्रश्न? झुंझलाते हुए कुमार ने कहा, जाते समय टोकना अच्छा नहीं होता।
जब आपको ये बात मालूम है ,तो तैयार होने से पहले बता दिया करो ! कहाँ जाना है ?
क्यों ? क्या अब मैं कारोबार भी तुम से पूछकर करूंगा।
क्या ,मैंने कुछ गलत पूछ लिया सभी की पत्नियाँ पूछती हैं - कहां जा रहे हैं ? मैंने कौन सा ऐसा अनहोना कार्य कर दिया ? इतना तो मुझे पता ही होना चाहिए कि आप कहां जा रहे हैं ?
ज्यादा दूर नहीं जा रहा हूं, आगरा में ही एक मीटिंग है ,वहीं जा रहा हूं।
यह तो बहुत अच्छा हुआ , उसकी बात सुनकर मधुलिका खुश हो गई और बोली -मैं भी आपके साथ चलूंगी।
मधुलिका अबकी बार कुमार के साथ क्यों जाना चाहती है ? क्या उसे कुमार पर शक हो गया है ? उसके साथ जाकर, वह उसे पर निगरानी रखना चाहती है। जानने के लिए आगे बढ़ते हैं।
