Do panktiyan

अभी आई थीं ,दो पंक्तियाँ !न जाने कहाँ फुर्र हो गयीं हैं ?

अधरों की मुस्कान से लेकर, भँवों की कमान हो गयीं हैं। 

प्रफुल्लित हो ,जज्बातों ने कुछ कहना चाहा। 

ख़्वाहिशों  की तो जैसे दास्ताँ हो गयी हैं ।

इधर ढूंढा ,उधर ढूंढा ,सोचती रही ,

न जाने ,वो तितलियाँ कहाँ खो गयीं हैं ?


नजरों के समक्ष बैठी थीं,आस लगाए। 

भावों में उतर ही रहीं थीं ,सहसा !

किसी दर्द के गलियारे होती हुई ,

किसी के ग़मों की मज़ार में शामिल हो गयी हैं। 

कसकर हाथ थामा ,सुकून ढूंढने चलते हैं। 

शब्दों के बाज़ार से, ख़ुशियाँ ढूंढ़ लाते हैं। 

रंगों की रोेशनाई में डूब, मदमस्त हो गयीं हैं। 

अभी तक दर्द में डूबी जो उदास नजर आती थीं। 

अब खुशियों के मेले में ,प्रसन्नता की लहरों में तैर गयीं हैं। 

रौशन हुई ,प्रीत के रंगों में , भावों की रूह को छू गयी हैं। 

फुर्र से हुई थी, दो पंक्तियाँ !सुख -दुःख के सागर में खो गयीं हैं। 

सफ़र का उसके, अंत नहीं हुआ , अब थोड़ी थक गयीं हैं । 

सुकूँ की तलाश में , राहगीर संग तरु की छाँव में सो गयीं हैं। 

उसकी उम्मीदों संग ,स्वप्नलोक के रंगों में खो गयीं हैं। 

स्वप्न ही सही ,एक जीवन जी गयी हैं। 

कभी ठहरती, कभी हवा में गुलाब सी महकती ,

काँटों में उलझी , आह !भरती सी ,

मयख़ानों की तहरीर बन ,मय के प्यालों में घुल गयीं है। 

किसी की चाहत को लफ्ज़ों  में पिरो ,

किसी के इश्क़ का अफ़साना बन गयीं हैं।

जिंदगी से जुडी, तो ज़िंदगानी बन गयीं हैं। 

अर्थ से जुडी ,अर्थपूर्ण बन गयीं हैं। 

श्रंगार से जुड़ीं , रसभरी हो गयीं हैं। 

अलंकारों से सजी ,कविता बन गयीं हैं। 

भक्ति भाव में डूबी ,जिंदगी का भाव दर्शा गयीं हैं। 

डोलती हैं ,न जाने कहाँ -कहाँ ?लगता आवारा हो गयीं हैं।

अभी आईं थीं ,दो पंक्तियाँ !न जाने कहाँ फ़ुर्र हो गयीं हैं ?    

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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