Darti ka dard

वेदना होती है ,जब मेरे ही ,

आंचल में खेले -कूदे बड़े हुए।

मेरी मिटटी ,से लिपटे ,

मित्रों  संग, बचपन खेला। 

इस मिटटी में देखा ,मेला !


तब धरती के लाल,आगे बढ़े ,बढ़ते रहे। 

छोड़, माँ का आँचल !

पहुंचे, शहर की अट्लिकाओं में 

छोटे -छोटे घर ,ऊँची इमारतों में ,

पढ़ -लिखकर भी मजदूर हुए।

'मज़दूर' कहूँ या' मज़बूर' हुए । 

क्या, फ़र्क पड़ता है ?

बेच ,अपनी सरज़मीं ,

घर छोड़ने को, मजबूर हुए।  

घर अपना, भाया नहीं ,

बिन परिश्रम, माया नहीं ,

तन पर वस्त्र , छाया नहीं ,

माँ का आँचल भीग गया। 

 बेटा,जब मिलने आया। 

प्रेम ,आदर, सत्कार ,उत्तरदायित्वों के 

बोझ तले सब लील गया। 

 बँटवारे की बात सुन ,

 कलेजा माँ का ,मुँह को आया।

लड़ बैठा अपनों से ही ,पंचायत को बुलाया।  

शहर में,अपनापन ,प्रेम,त्याग सब खो आया।  

बैठे रहते थे ,घंटों मेरे तरु की छांव में ,

खेलते थे ,गुल्ली -डंडा ,कबड्डी ,खो -खो !

किलकारियों से अब सूना आंगन देखो !

जिस आंगन में बचपन बीता । 

उस आंगन को ही भूल गया। 

जिस धरा ने पाला -पोसा बड़ा किया 

टुकड़े कर उस धरा के,कैसा अपराध किया ? 

जीवनभर की बेच धरोहर , 

अर्थ और काम में लिप्त मानव ! 

'अर्थ' का मोहताज़ हो गया है।

 लगता, कलयुग का आरम्भ हो गया है।  

रिश्तों से दूर बसा, तन्हा हो गया है।

बच्चा !मेरा मुझसे दूर भीड़ में कहीं खो गया है।

ढूंढता फिरता ,अपने- आपको वहीं का हो गया है। 

जननी उसकी दूर हुई ,

आशाओं ,इच्छाओं के बारूद लिए ,

अनजानी राहों पर ,उम्मीदों के दिए जला बढ़ गया है। 

आह !लाल मेरा मुझसे दूर हो गया है।    

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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