कादंबरी !अपने बेटे का विवाह कब कर रही हो ? लड़की देखते-देखते, इतने वर्ष हो गए, क्या तुझे आज तक कोई अच्छी लड़की ही नहीं मिली।
क्या करूं? मौसीजी जी ! आजकल लड़कियां ऐसी नहीं रहीं, जो घर में निभा कर चल सकें।
आखिर तू कैसी लड़की चाहती है ? कादंबरी की पड़ोसन शांति, की सास ने उससे पूछा।
अब इसमें लड़की का क्या चाहना ?बस यही है, घर- परिवार में मिलकर चले, आप तो जानती ही हो, कोरोना के कारण ये तो चले गए हैं किंतु अब दोनों बच्चों की जिम्मेदारी मुझ पर ही है, बडा नौकरी करता है और छोटा अभी पढ़ रहा है।
तुम पर कौन सी जिम्मेदारी आई है ? बल्कि यह समझो !बड़े बेटे की जिम्मेदारी बढ़ी है, वही तो नौकरी कर रहा है और घर के खर्च चला रहा है।जब मैं पहले अपने बेटे के पास आई थी ,तू जब भी, उसके लिए लड़की ढूंढ़ रह थी और अभी भी लड़की ढूंढ़ रही है।मुझे लगता है ,अब तो वो पैंतीस साल का हो गया होगा।
नहीं ,मौसीजी अभी बत्तीस का ही हुआ है ,एकदम से कादंबरी बोली।
हां ,तो जिस तरह से तू लड़की देख रही है ,पैंतीस का भी हो जायेगा,उन्होंने कहा।
कादंबरी, शांति की सास को बहुत मान देती है ,और बड़ी होने के नाते उनकी बातें भी सुन लेती है।
यह बात तो है, तभी तो मैं चाहती हूं कोई ऐसी लड़की घर में आ जाए जो घर -परिवार को निभा कर चले। आपकी नजर में कोई अच्छी सी लड़की हो तो मुझे बताना।
देखो! हम लोग तो यहां अभी कुछ वर्षों पहले ही आए हैं और मैं तो कभी -कभी बच्चों से मिलने आ जाती हूँ। तुम इस जगह पर कितने सालों से रह रही हो ?मुझे अपने विषय में कुछ बातें बताओ ! यह सब जानकारी मुझे लड़की वालों को भी तो बतानी होगी, जब वे मुझसे पूछेंगे -कहां के लोग हैं ? कैसे लोग हैं ,क्या करते हैं ? यह पूरी जिंदगी के रिश्ते होते हैं, हमें कुछ भी बात छुपानी नहीं चाहिए।
इसमें छुपाना क्या है? हमने कोई गलत काम थोड़े ही किया है, मैं यहां तभी आ गई थी, जब हर्षित के पापा की नौकरी लगी थी। मेरा हर्षित एक वर्ष का हो गया था , मेरी सास तो मुझे इनके साथ तभी भेज रही थीं लेकिन ये कहने लगे -बच्चे के होने के बाद ले जाऊंगा, वहां तुम्हारी देखभाल कौन करेगा ?
हाँ ,यह बात भी सही है,तुम्हारी सास अच्छी थी।
उसके पश्चात, मेरा कभी अपनी ससुराल जाना ही नहीं हुआ, बस जब से यहीं कि होकर रह गई हूं , अब कोई गांव में रहता भी नहीं, ये जब जिंदा थे तो अपने घरवालों से मिलने चले जाते थे, किंतु अब खेती-बाड़ी भी कोई नहीं देखता , सास- ससुर भी चले गए ,उन्हीं के खानदान में कुछ लोग हैं ,जो वहां रह रहे हैं वही खेती-बाड़ी भी देखते हैं।
इसका मतलब है, तुम अपनी ससुराल से विवाह की एक साल बाद ही यहां आ गई थीं और तब से आज तक यहीं हो।
हां, यह मकान भी उन्हीं का खरीदा हुआ है, अब यही रहती हूं, एक बेटा नौकरी कर रहा है एक बेटा पढ़ रहा है। सोचती हूं -कोई अच्छी सी लड़की मिल जाए तो उसकी गृहस्थी बस जाए और दूसरे की पढ़ाई पूरी हो जाए।
ठीक है, मेरी नजर में कोई लड़की होगी तो मैं तुम्हें अवश्य बताऊंगी कहकर शांति की सास घर आ गई। बात आई गई हो गई ,इस बीच कादंबरी ने कई लड़कियां देखीं और शांति को पता भी चला, कहीं बात नहीं बनी। उनकी आपस में अच्छी दोस्ती थी इसलिए एक -दूसरे से बातें कर लेती थीं।
एक दिन शांति की सास फिर से कादंबरी से मिलने और पूछा - अब तक तुमने जितनी भी लड़कियां देखी हैं, उनमें क्या कमी थी ?
एक तो सुंदर ही नहीं थी,मुँह बनाते हुए कादंबरी बोली -मेरा पहल का बेटा है उसके लिए सुंदर लड़की लाऊंगी। अब लड़का कह रहा है -'कि मुझे नौकरी वाली चाहिए, नौकरी वाली लड़की देख रही थी,एक रिश्ता आया भी.... तो वह कहने लगी -मैं तो लड़के के साथ ही नौकरी पर रहूंगी। अब आप ही बताइए ! किराए का मकान सब कितना खर्च बढ़ जाएगा ? लड़की को लड़के के साथ ही जाना है।
वह भी तो काम करेगी , दोनों मिलकर खर्चा उठाएंगे, तुम क्यों परेशान हो रही हो ?
आजकल इतनी महंगाई में मकान मिलना इतना आसान नहीं है, मेरे बच्चे पर बोझ पड़ जाएगा और आप तो जानती ही हो, ये तो चले गए हैं, अभी बेटे की पढ़ाई भी है और यहां का खर्चा भी है।
वह तो मैं समझ रही हूं, किंतु अब बेटा, ज्यादा भी तो कमाने लगा है और जब लड़की कमाएगी वह भी काम आएगा फिर तुम्हें क्या दिक्कत है ?
एक बार विवाह हो गया, तो लड़का -लड़की का होकर रह जाएगा। दोनों वहीं रहने लगेंगे, हो सकता है खर्चा भी न दें, तब मैं इसे लेकर कहां जाऊंगी?
तो क्या तुम इसी तरह लड़के की उम्र बढ़ाती रहोगी, मुझे तो लगता है -'तुम लड़की देखने का बस नाटक ही कर रही हो ,कोई लड़की छोटी है ,कोई गोरी नहीं ,कोई ज्यादा लम्बी है, तुम्हें इसका विवाह करना ही नहीं है। कभी सोचा है -अब यह कब अपना घर -परिवार देखेगा? कब अपनी पत्नी से मिलेगा ,कब इसके बच्चे होंगे? कभी तुमने यह भी सोचा है -देखो !मेरी बात तुम्हें बुरी लगेगी, लेकिन मैं पड़ोसन की सास होने के साथ-साथ तुम्हारी भी हमदर्द हूँ , मैंने अब तक यही जाना है, तुम सिर्फ अपनी सुविधा देख रही हो , बच्चों का भविष्य नहीं देख रही है। जब से यह कमा रहा है ,तेरे हाथों में ही पैसे थमा देता है।
तू ,उनसे अपने नाम जमीन खरीद रही हैं।उससे तू क्या कहती है ?मैं नहीं जानती ,तू लड़कियां देखने जाती है, और उनमें कुछ न कुछ कमी निकालकर वापस आ जाती है। यदि तेरी सास ने भी ऐसा सोचा होता तो आज तुम्हारे यह दो बच्चे भी नहीं होते, तुम्हारी सास ने तो, इतना सब कुछ नहीं सोचा था, तुम्हें अगले ही वर्ष अपने बेटे के साथ भेज दिया था, फिर तुम क्यों घबरा रही हो ? क्या तुम्हारा पति अपना वेतन तुम्हें देता था या अपनी माँ को ,मैं जानती हूँ ,तुम्हें ही देता था ,तब तुम क्यों डरती हो ?कि बेटा, बहु को ही पैसे देगा ,तुम्हें नहीं।
तुमने ही एक दिन मुझसे कहा था, कि मैं आज तक अपनी ससुराल नहीं गई, और तुम यह उम्मीद लगाए रखती हो कि तुम्हारी बहु तुम्हारे साथ रहे।तुम्हारा विवाह बाइस साल की उम्र में हो गया। तुम्हारा बेटा ,बत्तीस का है ,तो उसे लड़की भी अट्ठाइस या तीस की मिलेगी ,वे इस उम्र में विवाह कर रहे हैं उसके पश्चात भी, तुम बच्चों से यह उम्मीद लगाती हो , कि बच्चे तेरे कहे में चलें ,तुझे नहीं लगता,तू अपने लिए कुछ ज्यादा ही स्वार्थी हो गयीं हैं।
भविष्य के गर्भ में क्या छिपा है ?कोई नहीं जानता, लेकिन एक सुखी- परिवार के लिए, किसी न किसी को तो त्याग करना ही पड़ता है और सबसे बड़ा त्याग, और प्रेम पूर्ण व्यवहार माता-पिता ही करते हैं। यदि हर माता-पिता ऐसा स्वार्थी हो जाए, अपना ही लाभ सोचते रहे तो घर- परिवार कैसे बसेंगे ?समय के साथ ,तेरी भी तो उम्र बढ़ रही है ,उस नई आने वाली लड़की को तेरी समझ की भी तो जरूरत होगी ,उम्र के साथ बीमारी बढ़ती हैं ,वो तब अपनी गृहस्थी बसायेगी या फिर तेरी सेवा करेगी। अपने हाथ -पैर चलते ही ज़िम्मेदारियों से मुक्त हो जाती ,क्यों इतने मोह में फंसी है ?
सभी कहते हैं -आजकल की लड़कियां, आजकल की लड़कियां, आजकल की लड़कियों में विशेष बात क्या है? वैसी लड़कियां हैं , जैसे हम थे ,बस अब वे सोचने समझने लगी हैं , पढ़ी-लिखी हैं , समझदार हैं , अपना अच्छा- बुरा भी समझती हैं।वे दोेहरी जिंदगी जीने के लिए तैयार हैं ।तूने कभी नौकरी भी नहीं की सिर्फ अपने बच्चे पाले और अब अपनी बहू से उम्मीद लगाती है कि वह तेरे साथ रहकर, गृहस्थी भी संभाले, नौकरी भी करें ! जो रिश्ता मैंने भेजा था ,वो लड़की सुंदर होने के साथ -साथ व्यवहार में भी बहुत अच्छी थी ,तूने उसे भी मना कर दिया।
मुझे तो लगता है,कहीं आजकल के माता-पिता ही तो स्वार्थी नहीं हो गए हैं। अपनी खुशियों को अथवा सुविधाओं का त्याग न करके बच्चों की उम्र बढ़ा रहे हैं।
उनके मुख से ऐसी खरी और स्पष्ट बात सुनकर कादंबरी का चेहरा तमतमा गया और बोली -मौसीजी !मैं आपका सम्मान करती हूँ ,आपने तो जैसे सारा दोष मुझी मढ़ दिया ,जैसे इस सबकी ज़िम्मेदार मैं ही हूँ। आजकल लड़की और उनके माता -पिता ही कौन सा कम हैं। जिनकी बेटियां अच्छा कमा रहीं है ,वे भी उनके विवाह पर ज्यादा जोर नहीं देते ,मेरी देवरानी के लड़के की बहु ने'' नाक में दम कर ''रखा है। उसके माता -पिता उसकी गृहस्थी में ''आग लगाने'' को हमेशा खडे रहते हैं ,वो लड़े और तुरंत अपने घर बुला लेते हैं। उनको भी पता है ,लड़की अच्छा कमा रही है ,आ भी गयी तो सारा खर्चा उठाती है क्योंकि उसका भाई कुछ करता नहीं।सारी गलती मेरी ही नहीं है ,समाज का ही ढ़र्रा बिगड़ा हुआ है। इसलिए सोचना समझना पड़ता है।
मैं मानती हूँ ,कई जगहों पर लड़के वाले भी परेशान हैं,'' ज़िंदगी कितनी कठिन है ,सब जानते हैं, किन्तु कोई जीना तो नहीं छोड़ देता।' पहले समय में, जो बच्चे शहर में निकल जाते थे, वह क्या गांव जाकर माता-पिता की सेवा करते थे। किंतु माता पिता फिर भी उनके परिवार के लिए,उनके भविष्य के लिए उन्हें पढ़ाते थे और उन्हें बाहर भी जाने देते हैं ताकि जीवन में ,जो हम न कर सके हमारे बच्चे करें लेकिन आजकल के माता-पिता क्या कर रहे हैं ? बच्चे अच्छा कमा रहे हैं, नौकरानी लगी हुई है। सुख सुविधाओं में रह रहे हैं, और फिर भी विवाह नहीं कर पा रहे हैं क्यों ? क्योंकि उन्हें पहले अपना स्वार्थ नजर आता है। आजकल की लड़कियां ही नहीं आजकल के माता-पिता भी स्वार्थी हो गए हैं ? पहले समय में भी मैंने देखा है ,जो बच्चा बाहर निकल गया है ,उसकी पत्नी या उसने, उनकी सेवा कहाँ की ?''दाह संस्कार ''में चले जाते थे। तब भी वे अपने बच्चों की ख़ुशियाँ देखते थे। मुझे पता है ,तुझे मेरी बातें बुरी लगीं हैं किन्तु यहाँ आती रहती हूँ, तो तुझसे और तेरे बच्चों से लगाव सा हो गया है ,इसीलिए तुझे समझा रही थी ,वरना तेरा बेटा, मुझे क्या ?कहकर वे वहां से उठकर आ गयीं। मन ही मन बुदबुदाई -''भलाई का तो ज़माना ही नहीं रहा । ''
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