शिल्पा को जब पता चलता है कि कुमार,' मधुलिका' से विवाह करने जा रहा है,तो उसे अपने कानों पर विश्वास नहीं होता। यह बात पूरे कॉलेज में फैल चुकी है, पूरा कॉलिज जानता है ,और वो न जाने किस दुनिया में खोई थी ?वह अपने विवाह के लिए, अपने दोस्तों को निमंत्रण देने के लिए आया है। निमंत्रण देने आया है या फिर मुझे चिढ़ाने आया है ,तेज -तेज कदमों से चलते हुए ,शिल्पा एक ऐसा स्थान ढूंढ रही थी, जहां कोई आ जा न सके, वह समझ नहीं पा रही थी, मुझे अब क्या करना चाहिए ?वह ऐसा स्थान क्यों ढूंढ़ रही है ?वहां क्यों जाना चाहती है ? कॉलेज के पीछे, एक टूटे-फूटे स्थल पर, जो कि एक टूटे सामानों का स्थान है,वहां पर पुरानी टूटी कुर्सी और बेंचे पड़ी हुई थीं।
वहां पर जाकर वह जोर-जोर से चीखने लगती है और रोती है - नहीं, ऐसा नहीं हो सकता ,तुम मुझे, इतना बड़ा धोखा ! नहीं दे सकते। मैं, ये सब कैसे सहन कर पाऊंगी ? अचानक ही,तुमने इतना बड़ा निर्णय कैसे ले लिया ? तुम्हारा वो अपनापन क्या वो सिर्फ एक ढोंग था ?कुमार को तो मैं, एक बार समझ भी सकती हूं किंतु मधुलिका !!!वो जोर से चीखी ,क्या तुम्हें कुमार ही मिला था ? तुम तो मेरी दोस्त थी, मेरी दोस्त होकर ही मेरी 'पीठ में छुरा घोंप दिया।' मैं, तुम्हें कभी माफ नहीं करूंगी , न जाने, कितनी देर तक वह बैठी, रोती रही, वह नहीं जानती, समय क्या हुआ है ,न ही जानना चाहती है ,समय जानकर भी क्या हो जायेगा ?उसका समय तो ख़राब ही चल रहा है ,वह तो भूल ही गई थी कि वह कहां है ?
इस सबसे अलग, एक अलग ही दुनिया में चली गई थी, एक ऐसी दुनिया में, जहां कोई किसी का नहीं, कोई किसी का साथी नहीं, फिर वह क्यों रो रही है ? सब मतलबी रिश्ते हैं ,मैं क्यों, किसी रिश्ते से विश्वास और वफ़ा की उम्मीद करती हूं। अपने आप को बहुत देर तक समझाती रही, एकाएक उसका चेहरा कठोर हो गया, रोने से क्या हासिल होगा ? मैंने जो कुछ भी खो दिया,क्या वह मुझे मिल जाएगा? क्या उन लोगों को मुझसे हमदर्दी होगी? मुझे किसी की हमदर्दी नहीं चाहिए। अब तक मैं रोई हूं, किंतु मैं समझ गई हूं कि यह दुनिया बिल्कुल भी अच्छी नहीं है। इसके मैंने बहुत रूप देखे,अपनी गीली आँखों को पोंछा और वहां से बाहर आ गयी।अब इस दुनिया को मैं भी दिखला दूंगी कि मैं कोई बेचारी नहीं....
इस दुनिया में रहने वालों के चेहरे, अलग-अलग हैं, दिखाते कुछ हैं और सोचते कुछ हैं, करते कुछ है। मुझे कुमार को बधाई देने तो जाना ही होगा, जाना भी चाहिए आखिर मेरी सहेली का विवाह उससे हो रहा है। उसने अपने आपको मजबूत किया, धोखा देने वाले को, धोखा मिलता भी है , वह कब होता है, यह तो समय ही बताएगा। बाहर आकर वह कुमार को ढूंढने लगी, एक जगह भीड़ में, वो उसे दिखा, उसके चेहरे पर मुस्कुराहट थी, जिसे देखकर शिल्पा का चेहरा और कठोर हो गया। भीड़ को चीरते हुए वह ,उसके समीप पहुंची, उसे जैसे किसी की कोई परवाह ही नहीं थी।
कुमार के सामने, जाकर बोली -मैंने सुना है, तुम विवाह कर रहे हो , उसे देखकर कुमार एकदम चुप हो गया, मन ही मन वह डर भी गया था, कहीं ये इस भीड़ के सामने कोई बखेड़ा न खड़ा कर दे ! मैं तो आना ही नहीं चाहता था किंतु मधुलिका ने कहा -''तुम्हें वहां जाकर बताना ही होगा, जिससे,उसे थोड़ा बहुत भ्रम होगा वह टूट जाएगा।'' क्या सोच रहे हो ?
क्क्क्क कुछ भी तो नहीं, हकलाते हुए कुमार बोला।
अभी से इतनी हकलाहट हो रही है, विवाह के बाद क्या करोगे ? कहते हुए हंसने लगी और बोली -मुझे तुमसे एक शिकायत है, एक बार भी तुमने, मुझे बताया नहीं कभी जिक्र भी नहीं किया।
वह तो तुम्हारी सहेली को बताना चाहिए था वह तो जानती थी।
सही कह रहे हो, सबसे बड़ा धोखा तो अपनों से ही मिलता है, वह तो मेरे बचपन की सखी थी। कोई बात नहीं, दूसरे का हक मारते हुए थोड़ी घबराहट तो होती ही है, यह बात उसने कुमार के कान में कही। तभी उसके मन में वह प्रश्न आया कि वह जानना चाहती थी, आखिर उस दिन होटल में क्या हुआ था ? तब उसने उसके साथियों की तरफ देखा और कुमार से पूछा -क्या हम अकेले में 2 मिनट बात कर सकते हैं ?
कुमार डर गया था, और सोच रहा था अवश्य ही इसके मन में कुछ न कुछ चल रहा है। इसने ऐसा कुछ भी नहीं किया जैसे कि मुझे उम्मीद थी,वो तो सोच रहा था ,वो रोयेगी ,गिड़गिड़ायेगी और कहेगी -ये सब तुम क्यों कर रहे हो ?मैं तुमसे अपने प्यार की भीख मांगती हूँ। '' अभी मैं दोस्तों के साथ हूं, फिर कभी मिलते हैं, यह कहकर उसने शिल्पा को जाने दिया।
उसके इस व्यवहार से शिल्पा बुरी तरह तिलमिला गई, उसके अंदर एक ज्वाला धड़क रही थी, जिसको उसने नियंत्रित किया हुआ था वह ज्वाला कब और किस रूप में निकलेगी ? वह स्वयं ही नहीं समझ पा रही थी किंतु अब उसे लग रहा था उसका यहां ठहरना, बिल्कुल भी उचित नहीं है क्योंकि कुमार के कुछ दोस्तों जानते थे कि कुमार की और मेरी दोस्ती है, और उनकी दबी- दबी मुस्कुराहटों को, उसने कनखियों से देखा है।शिल्पा ने एक बार मुड़कर कुमार की तरफ देखा ,जैसे कह रही हो -ये अपमान उधार रहा।
शिल्पा सीधे अपने घर पहुंच गई , अपने कमरे में पहुंची , उसे कुछ भी नहीं सूझ रहा था, वह क्या करें ? किससे कहे? आखिर उसने मेरे साथ, ऐसा क्यों किया ? यदि वह मुझे पसंद नहीं करता था, तब उसने इस रिश्ते को बढ़ावा क्यों दिया ? मुझे होटल क्यों लेकर गया ? मुझे क्यों 'स्पेशल 'महसूस करवाया ? आखिर वह क्या चाहता था ? और अचानक ही इस तरह मधुलिका से विवाह कर रहा है। मधुलिका जो मेरी सहेली थी , उस धोखेबाज ने एक बार भी नहीं कहा कि मैं और कुमार एक दूसरे से प्यार करते हैं। वह तो मुझे मिली थी, उसने तो मुझसे कहा था कि मैं उसका घर भी नहीं जानते और यहां अपने विवाह की तैयारी में जुटी हुई थी।
अनेक बातें लगातार शिल्पा के दिमाग में घूम रही थीं, वह किसी मछली की तरह तड़प रही थी। उसके अंदर एक ज्वाला प्रज्वलित हो रही थी, उसने सोने का प्रयास किया इतनी ऊर्जा वह बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी, उठ बैठी क्या करूं ? कुछ समझ नहीं आ रहा,क्या करूं ? एक गिलास पानी पिया ,दो गिलास पानी पिया, धीरे-धीरे सारा जग पानी पी गई , किंतु उसके अंदर की ज्वाला शांत नहीं हो रही थी। वह गहरी गहरी सांस ले रही थी, अपने को शांत करने का प्रयास कर रही थी।
तभी नित्या ने कमरे में प्रवेश किया, नित्या ने शिल्पा को देखा ,देखते ही उसे लगा, शिल्पा ठीक नहीं है , उसने शिल्पा से पूछा -क्या कुछ हुआ है ?
