कुमार एक योजना के तहत, शिल्पा को एक होटल के कमरे में ले गया ,वहां जब शिल्पा ने उसके सामने अपने मन की ग्रंथि खोली, तब उसे ज्ञात हुआ कि किसी की कोई विवशता भी हो सकती है। हीनभावना के कारण , इन्होने अपने नाम बदले थे, इनका उद्देश्य किसी को धोखा देना नहीं था,मैं इनको वैसे ही गलत समझ बैठा था,इन्होने किसी का बुरा भी नहीं किया है ,न ही कोई बड़ी गलती की है ,वह अपने 'बदले की आग' को शांत करने का प्रयास कर रहा था। तभी शिल्पा उसके करीब आई जिस पर अब नशा हावी हो चुका था,वो कुमार को दिल से चाहती थी , उसे होश भी नहीं था, वो क्या कर रही है किन्तु उसका दिल सब जानता था,नशे में भी उसे, कुमार का प्यार स्मरण रहा।
जब प्यार दिल से गहराईयों से किया जाये ,तब इंसान चाहे कुछ भी भूल जाये किन्तु उसके उस अचेतन मन में भी, वही तस्वीर विराजमान रहती है ,फिर वो प्रेम ,इश्क़ ,उस परमात्मा से हो या फिर उसकी बनाई किसी मूरत से,यही हाल शिल्पा का भी था ,वो आगे बढ़ी और उसने कुमार को चूम लिया ,कुमार ने उसकी तरफ देखा ,वो तो वैसे ही अपने आप से लड़ रहा था ,उसने मुस्कुराकर शिल्पा की तरफ देखा, वो अपने आपे में नहीं थी ,इसके लिए भी ,कुमार ने ही ,उसे मजबूर कर दिया था। वह चाहता तो शिल्पा की ऐसी हालत में उसका लाभ उठा सकता था ,सोचकर तो यही आया था किन्तु अब उसका ह्रदय ग्लानि से भर गया था। उसे मधुलिका की याद आ रही थी ,इससे पहले की कुमार कुछ और सोचे या योजना बनाये ,तभी उस कमरे के दरवाजे को कोई जोर -जोर से पीटने लगता है।
जब कुमार ने दरवाजा खोला - सामने एक व्यक्ति खड़ा था ,पुलिस की रेड़ पड़ी है ,भागो !कहकर वो वहां से शीघ्र ही चला गया ,इतना सुनकर कुमार घबरा गया और शिल्पा से बोला -यहाँ से भागो ! पुलिस आ गयी है।
तो क्या हुआ ?हम कोई गलत काम कर रहे हैं ,एक -दूसरे से प्यार करते हैं ,ये बात सबको पता होनी चाहिए ,अकड़ते हुए शिल्पा बोली।
कुमार ने उसका हाथ पकड़ा और उसे लेकर लिफ़्ट की तरफ दौड़ा किन्तु लिफ़्ट नहीं चल रही थी , घबराते हुए वो सीढ़ियों की तरफ बढ़ा किन्तु सीढ़ियों से कुछ लोगों के आने की आहट सुनी। वह शिल्पा को लेकर एक दीवार के पीछे छुप गया ,जैसे ही वो लोग आगे बढ़े और अन्य कमरों में घुसे ,उसने फिर से लिफ्ट को चलाने का प्रयास किया अबकि बार लिफ़्ट खुल गयी ,शिल्पा को लेकर कुमार लिफ्ट में घुस गया और बाहर आते ही, शिल्पा को वहीं छोड़कर ,होटल के पिछले दरवाजे की तरफ दौड़ा।
शिल्पा उसे ढूंढते हुए ,आगे बढ़ रही थी ,कुमार तुम कहाँ हो ?कहाँ गए ? तभी एक हाथ ने उसे अपनी ओर खींचा और उसका हाथ पकड़ते हुए ,खींचकर एक तरफ ले जा रहा था।
ऐ..... तुम कौन हो ? मुझे कहां ले जा रहे हो ? कुमार कहां गया है ? मेरा हाथ छोड़ो ! मुझे उसके पास जाने दो ! किंतु वह साया, उसका हाथ पकड़ कर, एक पतले से गलियारे में से होते हुए, वहां से निकलकर,वे लोग सीधे, मुख्य सड़क पर आ गये। उसने अपनी घड़ी में समय देखा, रात्रि के 9:00 बज रहे थे। उसने तुरंत ही एक रिक्शा किया और शिल्पा को उसमें बैठा दिया। मुझे कहीं नहीं जाना है, पहले कुमार को बुला दो ! वह बेचारा, मेरी प्रतीक्षा कर रहा होगा।
रिक्शा वाले ने पूछा -इन्हें क्या हुआ है ? क्या इन्होंने नशा किया है ?
उस साये ने कहा , ऐसा कुछ भी नहीं है, यह दवाई का असर है, डॉक्टर से इसे दवाई दिलवाई थी।
मन ही मन रिक्शावाला सोच रहा था -यह डॉक्टर ने कैसी दवाई दी है ?लग तो रहा है , जैसे यह लड़की नशेड़ी हो।
तुम अपने काम से काम रखो ! और जहां के लिए रिक्शा करने के लिए कहा है ,वहाँ लेकर चलो !
नियत स्थान पर वह रिक्शा वाला, रिक्शा रोकता है और वह साया ,शिल्पा को साथ ले उतर जाता है ,पतली गलियों से, ले जाते हुए एक घर के सामने दोनों रुकते हैं। अरे !ये तो मेरा घर आ गया ,शिल्पा चिल्लाती है -दरवाजा खोलो !
इससे पहले की उसकी आवाज, घर के अन्य लोग सुन लें , वह साया उसका मुँह अपने हाथों से बंद कर देता है और चुपचाप दरवाजा खोलकर, घर में घुसने का प्रयास करता है। शिल्पा कुलबुलाती है और उसे देखने का प्रयास करती है कि आखिर वह कौन है ?जो उसे इस तरह खींचकर ले जा रहा है किंतु उसने अपना चेहरा ढका हुआ था, उसके चेहरे पर सिर्फ उसकी आंखें नजर आ रही थीं। शिल्पा को उसके कमरे में लिटाकर वह साया वहां से गायब हो गया।
प्रातःकाल जब शिल्पा उठी तो उसके सिर में दर्द था , उसे कुछ भी याद नहीं आ रहा था कि वह घर कैसे आई ?शिल्पा ने , आईने के सामने खड़ी, नित्या को देखा जो कॉलिज के लिए तैयार होकर अपने बाल संवार रही थी। शिल्पा को उठते हुए देखकर, नित्या ने पूछा -उठ गईं मैडम ! कल कितने बजे आई थीं ? बड़ी देर तक पार्टी की, पार्टी कैसी रही ?
शिल्पा सोचने का प्रयास करने लगी, उसे वहां तक तो याद आ रहा था कि जब वह कुमार के साथ, उस कमरे में गई थी किंतु उसके पश्चात वह यहां कैसे आई ? क्या हुआ, कुछ भी याद नहीं आ रहा ,सिर में भी दर्द महसूस हो रहा था। नित्या के इतने सारे प्रश्न सुनकर शिल्पा चिढ गई ,उठते ही, तुम्हारे वही प्रश्न शुरू हो जाते हैं, मुंह बनाते हुए शिल्पा कहती है।
अच्छा, मैं कॉलेज जा रही हूं, तुम अपना देख लो ! तुम्हें जाना है या आज की छुट्टी करनी है , कहते हुए कमरे से बाहर निकल गई। शिल्पा समझ नहीं पा रही थी कि उसके सिर में इतना दर्द क्यों हो रहा है ? वह यहां कैसे आई, उसे याद क्यों नहीं आ रहा है ? आखिर वहां क्या हुआ था ? कुछ भी तो स्मरण नहीं हो रहा। तब वह कुमार के विषय में सोचती है, वह ही,मुझे छोड़ गया होगा किंतु मुझे क्या हुआ था? जो मुझे कुछ भी याद नहीं आ रहा , वह तो अपनी कहानी बता रही थी, फिर अचानक क्या हुआ होगा ? उसने बहुत दिमाग चलाया, फिर सोचा- कॉलेज चलकर कुमार से ही पूछ लेती हूं। लेकिन आगे बढ़ने की इच्छा ही नहीं हो रही थी , कहीं चक्कर खाकर गिर न जाऊं यह सोचकर उसने कॉलेज जाने का विचार त्याग दिया।
अगले दिन जब वह कॉलेज पहुंची, तो वह कुमार को ढूंढ रही थी, वह जानना चाहती थी, कि उसके साथ क्या हुआ था ?उसे कुछ भी स्मरण क्यों नहीं हो रहा है ? तभी उसकी कक्षा की एक लड़की काव्या उससे बोली -क्या तुमने सुना, या कल का अखबार पढा।
