शिल्पा , घर में झूठ बोलकर, कुमार के जन्मदिन के लिए,' रोमानिया होटल' में जाती है। नित्या, शिल्पा से, उसकी सहेली का नाम जानना चाहती है कि वह किसके जन्मदिन पर जा रही है किंतु शिल्पा ने, उसे कुछ भी नहीं बताया,ठीक से जबाब ही नहीं दिया। जब वह कुमार से मिलती है , तब एक केक उनके लिए आता है , तब शिल्पा ,कुमार से कहती है -कितना प्यारा केक है ,अब तुम इसे काट भी दो !
तब चाकू लेकर, कुमार ने वह केक काटा, दोनों आपस में ही ,उस झूठे जन्मदिन को मना रहे थे किन्तु यह बात शिल्पा नहीं जानती थी ,उसे तो लग रहा था ,वो किसी के लिए विशेष है ,और वो विशेष रूप से मेरे लिए ही यहां आया है,जो मुझे अपनी खुशियों में शामिल करना चाहता है।
तब कुमार ने शिखा से पूछा ; क्या खाओगी ?
जो तुम खिलाओगे ? प्रसन्न होते हुए शिल्पा ने कहा।
कुमार ने खाने के लिए ऑर्डर दिया और बोला - काश !कि ' तमन्ना' भी यहां होती तो कितना अच्छा होता ?
क्या तुम 'तमन्ना' को याद करते हो, शिल्पा ने उसकी तरफ देखकर पूछा।
'तमन्ना 'को तो नहीं, उसकी चित्रकारी को अवश्य ही पसंद भी करता हूँ और उसके साथ ही ''तमन्ना ''भी याद आ ही जाती है ,काश !कि तुम ही 'तमन्ना' होतीं , यह बात, उसने जानबूझकर कही।
तब शिल्पा बोली -आज मैं तुमसे एक बात कहना चाहती हूं, देखो ! नाराज मत होना, इससे पहले की शिल्पा कुछ और कहती,वेटर भोजन लेकर आ गया।
भोजन करते हुए ,कुमार ने पूछा -तुम कुछ कह रहीं थीं।
हाँ ,मैं कहना चाह रही थी ,भोजन स्वादिष्ट है ,कहते हुए हंसने लगी।
मज़ाक मत करो !जो कहना चाहती थीं ,उसे कहो !
अच्छा ,एक बात बताओ !क्या तुम्हें 'तमन्ना 'की कलाकृतियां 'ही पसंद हैं,'तमन्ना 'नहीं।
उसके इस प्रश्न पर कुमार को क्रोध आ गया ,तब वो बोला -चलो !आओ ऊपर बैठकर बातें करते हैं ,शाम का समय है, भीड़ बढ़ती जा रही है। लोग देख रहे हैं,अच्छा नहीं लगता कोई हमें इस तरह से यहां बैठे देखे। शिल्पा को कुमार की बात उचित लगी और वो चुपचाप उठकर ,उसके पीछे -पीछे चल दी। उसने एक बार भी नहीं पूछा ,न ही सोचा कि ये मुझे कहाँ लिए जा रहा है ?जब वो दोनों लिफ्ट से ऊपर पहुंचे तो एक कमरे के बाहर खड़े थे।
तुम मुझे यहाँ क्यों लेकर आये हो ?अपनी घबराहट को छुपाते हुए शिल्पा ने पूछा।
अभी तो तुमसे कहा था ,कि अकेले में इत्मीनान से बातें करेंगे ,कहते हुए शिल्पा की तरफ देखा ,शिल्पा ने बादामी रंग का गाउन पहना हुआ था। हल्का मेकअप करके अपने को सजाया भी था ,साधारण रूप -रंग में भी वो इतनी बुरी भी नहीं लग रही थी ,उसे देख मुस्कुराया और बोला -यहीं तो एकांत मिलेगा।
मैंने तो सोचा था ,कोई खाली छत होगी ,तब तक कुमार उस कमरे का दरवाजा खोल चुका था। आओ !अंदर बैठते हैं ,कहकर अंदर गया। तब इत्मीनान से वहां पड़े बिस्तर पर लेटते हुए बोला -अब अपनी बातें आराम से कहो !
शिल्पा इतनी बच्ची भी नहीं थी ,जो समझ न सके, उस एकांत कमरे में अपने आपको कुमार के साथ देख, उसने एक गहरी स्वांस ली और पास में पड़ी आरामदायक कुर्सी पर बैठते हुए ,बोली -दरअसल ,मैं ये कहना चाह रही थी ,'तमन्ना 'एक झूठा नाम है ,''तमन्ना'' नाम की कोई लड़की है ही नहीं। तुम्हें तो सुंदर लड़की ,सुंदर पेंटिंग्स बहुत पसंद हैं। तुम्हें ही नहीं ,दुनिया में सभी को सुंदरता ही पसंद है ,चाहे वो इंसान स्वभाव से केेसा भी हो ,सुंदर है तो मान्य है।
वो' तमन्ना 'तो सुंदर है ,कुमार ने पूछा।
अपने गिलास का जूस पीते हुए बोली - सच कहूं तो ,उसका नाम भी ''तमन्ना'' नहीं है ,उससे तो मैंने ज़बरन ही नाम बदलने के लिए कहा था , कहते हुए अचानक ही, हंसने लगी। तब बोली -दरअसल मुझे लगता था, कि तुम जिस' तमन्ना' की तलाश में हो, उस तमन्ना को सुंदर होना चाहिए , और यह बात मैं जानती हूं कि मैं इतनी सुंदर नहीं हूं क्योंकि मैंन बचपन से ही, अपने इस रूप को लेकर , बहुत बातें सुनी हैं। उस दिन तुम वहां प्रतियोगिता में' तमन्ना' से मिलने के लिए आए थे। तुम उस तमन्ना को देखना चाहते थे जो तुम्हारी कल्पनाओं में थी और तुम्हारी कल्पना बहुत खूबसूरत थी , तुम्हारी बातों से मैंने जाना।
मैं उस दिन तुमसे, अपना असली परिचय कराना चाहती थी किंतु तुम्हारी कल्पना, को देखकर मेरा मतलब है ,सुनकर , मैं तुम्हारे सामने आने का साहस न कर सकी। मुझे तुम कॉलिज में ही पसंद आ गए थे, लेकिन तुम्हारी सोच के कारण मैंने उस'' तमन्ना'' को छुपा दिया और तुम्हारे सामने, एक नई ''तमन्ना'' को खड़ा कर दिया। क्या तुम जानते हो?वो '' तमन्ना'' कौन है ? वो मेरी ही ममेरी बहन है। वह भी नहीं चाहती थी कि यह झूठ उससे लिपट जाए किंतु मेरे कारण उसने उस झूठ को ओढ़ लिया।
मैंने उससे कहा था- नाम में क्या रखा है, वह तुम्हारा नाम हो या फिर मेरा नाम, इससे क्या फर्क पड़ता है ? चित्रकारी तो मैं ही करती हूं, चेहरा फिर चाहे किसी का भी हो , इससे कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए किंतु ऐसा नहीं हुआ। न जाने क्यों ,तुम्हें उस पर यकीन ही नहीं हुआ ? मैं चाहती थी, तुम मुझे जानो !मेरे असली रूप को जानो, असली नाम को पहचानो ! जिस रूप में मैं हूं उसे ही तुम पसंद करो! इसलिए मैं शिल्पा के रूप में तुम्हारे सामने आई और देखो! सच में तुम मुझे पसंद करने लगे हो। शिल्पा के जूस में जो नशे की पुड़िया, कुमार ने मिलाई थी ,वह धीरे-धीरे अपना असर कर रही थी। उसके कारण शिल्पा, कुमार के सामने खुलकर आ रही थी और वह सब कुछ स्पष्ट कर देना चाहते थी।
इस कमरे में लाने का कुमार का उद्देश्य कुछ और ही था ,वो उसे शारीरिक रूप से ही नहीं, मानसिक रूप से भी तोड़ देना चाहता था। कुमार, शिल्पा के मुख से उसकी सच्चाई जानकर ,सोचने लगा - कहीं मैं कुछ गलत तो नहीं कर रहा। तभी शिल्पा उठकर उसके करीब आई और बोली -क्या तुम जानते हो ?मैं तुमसे कितना प्यार करने लगी हूँ ? मैं तुम्हारे लिए कुछ भी करने के लिए तैयार हूँ ,मैंने तुम्हारे लिए अपने घरवालों से झूठ बोला-' कि अपनी सहेली के जन्मदिन पर जा रही हूँ।' कहते हुए उसके करीब आकर उसके मुख को चूम लिया।
कुमार चाहता तो अब, शिल्पा की जैसी हालत है ,कुछ भी कर सकता है किन्तु उसे 'मधुलिका' का डर सामने आने लगा। उसने महसूस किया वो शिल्पा को तो प्यार करता ही नहीं है किन्तु इसने अपना नाम छुपाने का जो भी कारण बताया ,गलत भी नहीं था। उसे दुःख हुआ ,उसने नाहक ही उसे, नशे की गोली दे दी। वो तो बिन नशे ही सबकुछ सच बताने वाली थी,अब वो अपने मन में पछतावा कर रहा था। तभी बाहर किसी ने उनके कमरे का दरवाजा जोर -जोर से पीटना आरम्भ कर दिया। न जाने कौन है ? इतनी भी तहज़ीब नहीं है, कि इस तरह डिस्टर्ब नहीं करते कहते हुए झुंझलाया और उसने दरवाजा खोल दिया।
