आज पारो के साथ ,रूही भी घूमने के लिए जाती है और वहां रूही को ऐसा प्रतीत होता है ,जैसे वह उन राहों से कभी गुजरी है। कभी किसी व्यक्ति को देख ,उसे लगता है ,इसे मैंने कभी कहीं देखा है ,अक़्सर सपनों में भी आता है ,ये मेरा दोस्त है या दुश्मन ! इसी दुविधा में वो परेशान होती है, जिसके कारण उसे चक्कर महसूस होता है ,थकावट लगती है। पारो ने, अपने दोस्तों को रूही के विषय में गाड़ी में सब बतला दिया था, इसी कारण समीर उसे समझाना चाहता है।
तब वो उससे कहता है -कहते हैं -''आत्मा अजर और अमर है, मृत्यु के पश्चात वो फिर से अपना चोला बदलती है ,ये तो तुम मानती हो या नहीं उसने रूही से पूछा।
तुम्हारी इन बातों से मेरे, अतीत का क्या संबंध है? रूही ने पूछा।
वही तो मैं कहना चाहता हूँ ,जब मानव किसी अन्य स्थान पर ,अन्य रूप में ,जन्म लेता है ,तो ईश्वर द्वारा उसकी पिछली सम्पूर्ण स्मृतियों को भुला दिया जाता है। वो अपने पिछले जन्म के सभी रिश्ते ,दोस्ती -दुश्मनी सब भूल जाता है ,इसका कारण क्या है ?जानती हो ,उसका नया जीवन ,नए कार्यों और उद्देश्यों को पूर्ण करने के लिए होता है। पिछले चैप्टर तो कब का समाप्त हो चुका होता है ?यदि वो इस जन्म में भी ,उन्हीं दोस्तों और पिछली स्मृतियों को लेकर जियेगा तो इस जीवन में,वह कभी आगे नहीं बढ़ पायेगा। तुम्हें इसी जन्म में वो मौका मिला है ,तुम अपने अतीत को तो भूल चुकी हो। अब नए माता -पिता के संग अपने नए भविष्य के सपने बुनो !जो हो चुका, उसको कुरेदने से कोई लाभ नहीं , विषाद के अतिरिक्त क्या हासिल होगा ?अब तुम इसे अपना नया जीवन ही समझो ! उन लोगों के लिए तो तुम इस संसार से जा चुकी हो ,यदि फिर भी ,उस ऊपरवाले ने कुछ सोचा है तो सभी परिस्थितियाँ ऐसे ही बनती चली जाएँगी। तुम्हें किसी को ढूंढने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी बल्कि वो स्वयं ही, तुम्हारे सामने प्रस्तुत हो जायेगा।
क्या ऐसा हो सकता है ? समीर की बातों का रूही पर असर हो रहा था ,उसकी बातों को सुनकर वो अपने को मानसिक रूप से हल्का महसूस कर रही थी। मन ही मन सोच रही थी -सही तो कह रहा है ,जब मुझे उनसे मिलना ही होता तो, बिछड़ते ही क्यों ? अब से मेरा नया जीवन आरम्भ होगा ,मुझे अपना अतीत जानना ही क्यों है ? रूही के चेहरे का तनाव अब थोड़ा कम हो गया था।
तभी पारो उनके समीप आती है ,जो उन दोनों को बातें करते देखकर, कुछ देर के लिए, अन्य दोस्तों के संग ,उसी होटल के एक हिस्से में कुछ दुकानें भी थीं ,जिन्हें देखने के लिए वे लोग वहां घूमने गए थे ,यह जानने के लिए आख़िर यहाँ क्या मिलता है ?
आज तो, बहुत बातें हो गयीं ,पारो ने समीर से पूछा -मेरी बहन को, कुछ समझाने में सफल हो पाए हो या नहीं ,
इन्हें क्या समझाना ?ये तो पहले से ही समझदार हैं ,समीर ने रुखा और स्पष्ट जबाब दिया। अब तो ये ही बता सकतीं हैं ,कि मेरी बातों को इन्होंने कितने ध्यान से सुना है ,और मेरी बातों का इन पर क्या असर हुआ है ?समीर के मुँह से रूही के लिए 'इन्हें 'शब्द सुनकर पारो मुस्कुराई।
तब उसने रूही की तरफ देखा ,उन सब बातों को नजरअंदाज कर रूही ने ,पारो के लाये थैले देखकर रूही ने पूछा - क्या कुछ खरीददारी की है ?
हाँ, थोड़ा सामान लिया है,कहते हुए उन्हें वहीं मेज़ पर रख दिया ,तुम्हारे लिए भी कुछ है।
दिखाओ !मेरे लिए क्या लिया है ?
ऐसे नहीं ,घर चलकर देखना ,कहते हुए उसने थैलों को मेज से उठाया और अपने दोस्तों से पूछा -अब बताओ !कहाँ चलना है ?
अब कहाँ जायेंगे ?वापस घर चलते हैं ,रूही ने कहा।
अभी तो दोपहर के दो ही बजे हैं अभी थोड़ा और घूमा जा सकता है ,कोई नजदीक ही ऐसा स्थल हो तो चलते हैं।
किसी से पूछते हैं ,यहाँ कोई घूमने के लिए सुंदर स्थल है या नहीं।
'गूगल 'करके देख लेते हैं ,क्या किसी से पूछना ?
छोटी -मोटी जगहें ,गूगल में कहाँ मिलेंगी ?
रूही उन सबको इस तरह बात करते हुए, ऐसे देख रही थी ,जैसे वो लोग किसी दूसरी दुनिया की बातें कर रहे हों ,उसके पास न ही फोन था और न ही, उसके विषय में कोई जानकारी ,उसके पास फोन होता भी तो कैसे ?जब से ठीक होकर आई है ,अपने सपनों से घिरी है ,उन्हीं समस्याओं में उलझी है ,अभी भी उसकी दवाइयां चल रही हैं ,उसने अपने को घर में जैसे कैद कर लिया था। उसे कुछ भी स्मरण नहीं है ,तब फोन का भी क्या करेगी ? किन्तु आज एक नई चीज पर उन्हें तर्क करते देख ,उसे अच्छा लग रहा है। वह कनखियों से समीर को देखती है ,सोचती है ,कितनी प्यारी बातें करता है ,कितना समझदार लड़का है ?आज तक मुझे किसी ने भी ,इतने अच्छे तरीक़े से और प्यार से नहीं समझाया। तब तक वो लोग निर्णय ले चुके थे कि कहाँ जाना है ?
कोई ऐतिहासिक स्थल था ,जिसको अभी कुछ वर्षों पहले ही बनाया गया है ,अब लोग, उस स्थान पर घूमने आते रहते हैं,नंदिता बताया।
अब चलो भी, देख लेते हैं ,ऐसा कौन सा स्थल है ?कहते हुए वे लोग अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ते हैं।
लगभग एक घंटे की यात्रा के पश्चात ,वे लोग हस्तिनापुर पहुंच गए ,वह स्थल बहुत ही भव्य बना हुआ था। तब पारो उनसे कहती है - क्या ये वही स्थल है ? जहाँ कौरव और पांडव रहा करते थे।
जगह तो वही है किन्तु ये नहीं मालूम ,क्या पांडवों का महल यहीं हुआ करता था ?
वो तो किसी से पूछना पड़ेगा।
उनकी बातें सुनकर एक व्यक्ति उनके करीब आया और बोला -इस जगह के विषय में क्या पूछना चाहते हैं ?
यही कि, क्या यहां पांडवों का महल हुआ करता था ?
जी नहीं ,जहाँ आप आये हैं ,वो 'जम्बू द्वीप 'के नाम से जाना जाता है ,सुनने में आया है ,इसका निर्माण ''भिक्षुणी ज्ञानमती '' ने करवाया है ,यह जैन धर्म के लोगों का उपासना स्थल है और हस्तिनापुर का आकर्षण भी है ,इसकी इमारत बहुत भव्य है ,जैन धर्म के प्रवर्त्तक 'महावीर स्वामी ''की विशाल मूर्ति आपको यहाँ देखने को मिलेगी। जिस हस्तिनापुर की तलाश में आप यहाँ आये हैं ,वो अभी खंडहर ही है।
