पारो यानि पार्वती ,रूही को, अपने साथ दो दिनों के लिए बाहर घुमाने ले गयी थी किन्तु वो लोग तो शाम तक वापिस आ गए। जब रूही घर वापस आई,उसने तारा जी से कोई बात नहीं की और सीधे अपने कमरे में चली गयी। उसका ये व्यवहार देखकर और उन लोगों के समय से पहले आ जाने पर तारा जी चिंतित होती हैं और पारो से पूछती हैं - क्या कुछ हुआ है ?
तब पारो उनसे बताती है ,वे लोग एक मेले में गए थे ,जहाँ एक ज्योतिषी से रूही ने, अपने अतीत के विषय में जानना चाहा, जिसे सुनकर हम भी हतप्रभ रह गए।
ऐसा क्या हुआ ?उस ज्योतिषी ने ऐसा क्या कह दिया ?बेचैनी से तारा जी पूछती हैं।
मौसी जी ! क्या आप जानती हैं ?कि ये रूही शादीशुदा है,अपनी आँखें बड़ी -बड़ी करते हुए पारो ने पूछा।
नहीं ,मैं भला कैसे जानूँगी ? मुझे कौन बताता ?स्वयं रूही बताती किन्तु वो तो पहले से ही परेशान है ,स्वयं को ही ढूंढ़ रही है।
इसका नाम आपको कैसे पता चला ?किसी जासूस की तरह पूछताछ करते हुए पारो ने पूछा।
मुझे तो, तुम्हारे मौसाजी ने ही बताया।
तभी दरवाजे के नजदीक खड़े डॉक्टर अनंत ने पूछा -मौसी -भांजी में क्या बातें हो रहीं हैं ?
कुछ नहीं मौसाजी !मैं मौसीजी से पूछ रही थी ,कि आपको रूही कहाँ मिली ,क्या इस लड़की का असली नाम रूही ही है या फिर कुछ और......
अंदर आते हुए ,उन्होंने अपना बैग मेज पर रखा और आराम से सोफे पर बैठते हुए बोले -क्यों' गढ़े मुर्दे उखाड़ रही हो ' इससे क्या लाभ है ? इसका नाम जो भी रहा हो ,अब इसका नाम रूही है और अब ये हमारी बेटी है, क्या इतना ही काफी नहीं है ?
तारा जी ,दिनेश से डॉक्टर साहब के लिए ,पानी और चाय का इंतजाम करने के लिए कहती हैं।
नहीं ,चाय की आवश्यकता नहीं है ,बस पानी ले आओ ! सीधे खाना खाएंगे ,कहकर वो पारो के समीप कुर्सी पर आकर बैठ गए और पारो से पूछा -आज तुम ये सब क्यों पूछ रही हो ?
मौसाजी !पूछना आवश्यक हो गया है ,वो लड़की, यहाँ रह तो रही है किन्तु उसका मन बेचेेन है ,वो अपना अतीत जानना चाहती है,आप लोगों ने उसे क्या बताया ?यही न... कि वो आपकी बेटी है ,फिर भी न जाने क्यों, वो अपना अतीत जानना चाहती है ?या तो उसे आप लोगों की बातों पर विश्वास नहीं है ,या फिर अपने उन पलों को ढूंढकर,उन्हें फिर से जीना चाहती है। आप समझ नहीं रहे हैं ,एक जिज्ञासा तो बनी ही रहती है। मेरे कितने और कौन मित्र थे ? मैंने पढ़ाई -कहाँ से और कैसे की है ? बहुत सी ऐसी बातें होंगी जो उसके मन में उठती रहती होंगी। आप उसकी दृष्टि से भी तो सोचिये !
तुम इतना मत सोचो !ऐसा तुम्हें क्यों लगता है ? क्या उसने तुमसे कुछ कहा ?
क्योंकि आज वो हमारे साथ बाहर घूमने गयी थी और हम लोग घूमते हुए एक मेले में पहुंच गए थे ,तब वहां एक भविष्यवक्ता से हम लोग मिलते हैं, तब रूही ने उससे अपने अतीत के विषय में प्रश्न किया।
अच्छा ! क्या बताया ?उसने, हँसते हुए डॉक्टर साहब बोले।
मौसाजी !यह हंसने की बात नहीं है ,जो कुछ भी उसने बताया ,उसे सुनकर आप भी चौंक जायेंगे।
क्यों ,उसने ऐसा क्या बता दिया ?
वही तो मैं मौसीजी को बता रही थी,उस बात को जानकर ,आपको भी आश्चर्य होगा। क्या आप जानते हैं ? ,ज्योतिषी ने क्या बताया था ? दोनों ने न में गर्दन हिलाई। यही कि उसकी शादी हो चुकी है ,क्या ये बात आप जानते हैं ?
हाँ ,ऐसा कुछ लगा तो था किन्तु उसके पश्चात, वो कोमा में चली गयी ,हमने उस ओर ध्यान ही नहीं दिया था ,अब डॉक्टर थोड़े गंभीर हो गए थे।
मौसाजी !हो सकता है ,इसका परिवार, इसको ढूंढ़ रहा हो।
आपके हॉस्पिटल में तो इतने मरीज़ आते हैं ,आप सभी को तो घर पर लेकर नहीं आते ,फिर इसे ही क्यों ?तारा ने पूछा -आज तक आपने मुझे ये तक नहीं बताया कि ये आपको कहाँ और किस हालात में मिली और इसके साथ क्या हुआ था ?
तब डॉक्टर साहब ! बोले - ये लड़की मेरे हॉस्पिटल में नहीं वरन मेरी गाड़ी से टकराई थी और बेहोश हो गयी थी,जब मैं अपने किसी मरीज को देखने शहर से दूर जा रहा था। इसकी हालत बहुत खराब थी। इसकी त्वचा आधे से ज्यादा जल चुकी थी,इसकी हालत देखते हुए मुझे लग रहा था ,अब इसका बचना मुश्किल है ,फिर भी मैं ,वापस हॉस्पिटल आया और इसको भर्ती किया।
तब भी इसने अपने विषय में कुछ नहीं बताया ,पारो ने पूछा। आप कह रहें हैं ,ये जल चुकी थी,हो सकता है ,इसके ससुरालवालों ने इसे दहेज़ के कारण परेशान किया हो ,और जब ये दहेज़ नहीं ला पाई तो ,इसने आत्महत्या करने का प्रयास किया हो ,या फिर इसके ससुराल वालों ने इसे जलाने का प्रयास किया हो और ये उसी अवस्था में वहां से भाग आई क्योंकि उसी ज्योतिषी ने बताया था -'कि इसने अपने अतीत में ,बहुत कष्ट झेले हैं।'
हो सकता है ,तुम्हारी बात सही हो ?किन्तु ये मुझे कुछ बताती ,उससे पहले ही ,ये मेरे सामने बेहोश हो गयी थी ,इसका इलाज चल रहा था किन्तु इसे होश नहीं आया और ये कोमा में चली गयी ,इसे कोई पूछने भी नहीं आया ,जहाँ ये मुझे मिली मैंने उस थाने में, किसी लड़की के गुमशुदा होने के विषय में अपने दोस्त इंस्पेक्टर रंजन से पूछा और आस -पास भी पता लगवाया कि किसी लड़की के गुमशुदा होने की रिपोर्ट !क्या किसी ने लिखवाई है? किन्तु सब तरफ से मना कर दिया गया। इसकी उम्र को देखकर ,इसकी हालत को देखकर मुझे इस पर तरस आ गया ,तब मैंने अपने हॉस्पिटल में इसके लिए एक अलग कमरा खाली करवा दिया। इस बीच मैं इंस्पेक्टर रंजन से सम्पर्क में रहा। जिस दिन इसे होश आया ,मुझे बेहद ख़ुशी हुई ,इससे इसका नाम पूछा गया किन्तु इसे तो कुछ भी याद नहीं था। इतना ही नहीं ,ये अपना चेहरा देखकर ही ड़र गयी और रोने लगी। तब मैंने अपने खर्चे पर इसकी 'सर्जरी 'करवाई और इसे अपनी बेटी 'रूही' बनाकर ले आया। अब तुम ही बताओ !इसके लिए मैं और क्या कर सकता था ?
आज इतने दिनों पश्चात ,डॉक्टर अनंत ने रूही का रहस्य खोल ही दिया ,अब प्रश्न ये उठता है ,आखिर रूही कौन है ?उसका असली नाम क्या है ? ठाकुर अमर प्रताप सिंह जी की हवेली के आस -पास कौन बुजुर्ग मंडराते रहते हैं ?उनका इस हवेली से क्या संबंध है ? ठाकुर हरीराम पेड़ के नीचे किससे हाथ जोड़ते हैं ?या फिर किसी की पूजा -अर्चना करते हैं। आखिर रूही का अतीत कैसा है ? सुनयना देवी कहाँ गायब हो गयीं थीं ,ऐसे अनेक प्रश्न ज़ेहन में उभरकर आते हैं ?क्या ये रूही का पुनर्जन्म है ?बहुत सी बातें अभी भी अनेक सवाल खड़े कर रहीं हैं ,चलिए !आगे बढ़ते हैं।
