रूही और पारो तैयार होकर, जब घर से बाहर जाने लगती हैं , तभी तारा जी भी, तैयार होकर बाहर आती हैं और उन दोनों से कहती हैं - आज मैं भी, तुम लोगों के साथ चलूंगी।
क्यों मौसी जी ? आप वहां जाकर क्या करेंगी ? हम लोग तो, जा ही रहे हैं।
तुम लोग जा रहे हो, इसीलिए तो मैं तुम लोगों के साथ जाना चाहती हूं ,मैंने भी कभी गांव का मेला नहीं देखा है , उसे भी देख लूंगी और तुम्हारी उस 'जुगनी' से ,मैं भी अपने मन की कुछ बातें पूछ लूंगी,कहते हुए मुस्कुराईं।
पारो और रुही ने एक दूसरे को आँखों ही आँखों में देखा, तब पारो बोली -आप भी चालिए ! एक से भले दो और दो से भले तीन मुस्कुराते हुए वे तीनों गाड़ी में बैठ गईं ।
आज तुम्हारा कोई मित्र नहीं जाएगा,तारा जी ने गाड़ी में बैठते हुए पूछा।
वो लोग यहां आकर क्या करेंगे ? हमें वहीं मेले में मिल जाएंगे , वैसे तो वह लोग कह रहे थे- कि हम मेले में अब जाकर क्या करेंगे ? हमें अब आगे जाना है।
ठीक है, वो लोग आगे जा सकते हैं ,तुम उनके साथ जाना चाहो तो, जा सकती हो, हम दोनों वापस घर आ जाएंगे। तब उन्होंने रूही की तरफ देखा और उससे पूछा -क्या तुम भी, इसके दोस्तों के साथ घूमने जाना चाहोगी।
अभी तो मेरा मन नहीं है, बाकी आगे चलकर देखते हैं,अनमने भाव से रूही ने जबाब दिया।
मेले में, पहुंचकर वे लोग उसी स्थान पर पहुंच गए ,जहां पर 'जुगनी' नाम की ज्योतिषाचार्य का टेंट लगा हुआ था। तारा जी को, वहां की भीड़ देखकर कुछ अच्छा नहीं लगा और उन्होंने वहां की धूल से बचने के लिए अपनी नाक पर रूमाल रख लिया। उन्हें देखकर पारो मुस्कुराई और अपनी मौसी से बोली -मैं तभी तो आपसे पूछ रही थी ,कि आप वहां चलेंगी क्योंकि मैंने, यहाँ का वातावरण देखा है।
कोई बात नहीं, आज के दिन मैं, संभाल लूंगी , आज उस टैंट के सामने भी, काफी भीड़ थी। इतनी भीड़ के कारण आज लाइन बनी हुई थी ,उस लाइन को देखकर पारो ने, अपनी मौसी से कहा -मुझे लगता है ,ये [जुगनी ] लोगों पर अपनी बातों का अच्छा प्रभाव डाल रही है।
तभी तो इतनी भीड़ है,उसके दोस्तों में से एक ने कहा।
हम लोग भी तो इसीलिए दोबारा आए हैं, हो सकता है उसकी बातों में कुछ सच्चाई हो। अब हमें क्या करना चाहिए ?
हमें अपनी बारी की प्रतीक्षा ही करनी होगी,तब तक आप गाड़ी में ही बैठी रहिये !पारो की बात मानकर तारा जी तुरंत ही गाड़ी में बैठ गयीं ,उनके समीप ही ,रूही भी बैठी हुई थी। क्या तुम भी कुछ पूछना चाहोगी ?उन्होंने रूही से पूछा।
नहीं ,मुझे कुछ नहीं पूछना है किन्तु वह जानती है ,ये लोग उसके लिए ही यहाँ आये हैं। तारा जी, ये नहीं जानती थीं कि रूही सब जानती है। कुछ देर पश्चात उन्हें बुलाया गया, तब तारा जी गाड़ी से बाहर आईं और रूही से पूछा -तुम चलना चाहोगी ,वैसे वे नहीं चाहती थीं कि रूही वहां आये।
नहीं ,आप मिल आइये ! मैं यहीं पर हूँ ,' जुगनी' ने उन्हें देखते ही अपनी आंखें बंद कर लीं, सभी चुपचाप उसके सामने बैठे थे। तब उसने, तारा देवी की तरफ देखा और बोलीं - धन- संपत्ति में , कोई कमी नहीं है एक संतान की चाहत थी, वह भी लगभग पूरी हो चुकी है।
क्या मतलब ?मैं कुछ नहीं समझी, अब तुम्हारे घर में दो-दो बेटियां जो हैं, उसका इशारा पारो और रूही की तरफ था। तुम बहुत ही धैर्यवान, सुलझी हुई समझदार महिला हो, कोई संतान नहीं है, तो क्या ? मां का हृदय रखती हो। उसके ये शब्द सुनकर तारा जी भाव विभोर उठी और उन्होंने पूछा -जो कुछ भी कल आपने कहा, क्या वह सत्य हो सकता है।
सत्य हो सकता है,क्या आपको मेरी विद्या पर शक है ?जो कुछ भी मैंने कहा-यदि सत्य न हो तो आप मुझे कभी भी पकड़ सकती हैं ,मैंने वर्षों इस विद्या को सीखा है ,तप किया है ,उसने नाराज होते हुए कहा।
आपने जो कुछ भी कहा , सत्य ही कहा होगा ,ये बात तो आप ही जानती हैं,हम साधारण जीव क्या जाने ? हम कैसे जान सकते हैं ,कि इसका अतीत इतना वेदना पूर्ण रहा है। हम कैसे इसके परिवार से, इसे मिलवाएंगे ?
उन लोगों को तो इसका पता ही नहीं है कि यह कहां है ? वह तो यही समझ रहे हैं कि वह अपनी ससुराल में है। उन लोगों को बताया ही नहीं गया है ,कि उनकी बेटी अब इस दुनिया में नहीं रही।
सभी उसका चेहरा देखने लगते हैं ,यह आप क्या कह रही हैं, तारा जी बोलीं -वह तो जिंदा है और हमारे साथ है।
किंतु उन्हें तो जिंदा नहीं लगती है, वो सब तो यही जानते हैं, कि वह मर चुकी है।
ऐसा उन्होंने क्यों किया होगा ?
हर घटना या दुर्घटना के पीछे कोई ना कोई उद्देश्य छुपा होता है। इसमें भी कोई न कोई उद्देश्य छुपा हुआ है कि उन्होंने इसे मार दिया और ये फिर भी है, जिंदा है, यह कुदरत का करिश्मा ही है।
कहीं ये इसका पुनर्जन्म तो नहीं ,और आप इसके पिछले जन्म की बातें बता रहीं हों,नंदिता ने अपना शक़ ज़ाहिर किया।
ए लड़की !मैं कोई मज़ाक नहीं कर रही हूँ ,अपनी बड़ी -बड़ी काजल भरी आँखों से घूरते हुए वो गरजकर बोली।
मेरा मतलब वो नहीं था ,अक्सर ऐसा ही कुछ कहानी -किस्सों में सुनने को मिलता है ,किसी का पुनर्जन्म हुआ है किन्तु उसे कुछ स्मरण नहीं हो रहा है,तब उसके स्वप्न उसे संदेश देते हैं।
नंदिता की बातें सुनकर वो थोड़ा नर्म हुई और मुस्कुराकर बोली -पिछले जन्म की छोडो !इस जन्म में भी ,अपने जीवन में इंसान, इतने गलत कर्म कर बैठता है कि नियति उसके पुनर्जन्म की प्रतीक्षा ही नहीं करती बल्कि उसके कर्मों की सजा उसे, इसी जन्म में देने को तत्पर रहती है। उन लोगों के'' पापों का घड़ा इतना भर चुका है''उन्होंने इसे मार तो दिया किन्तु कुदरत को ये मंजूर नहीं था इसीलिए उसको इसी जन्म में ,पुनः जीवित किया है ,उसकी याददाश्त भूलना और आप लोगों से मिलना सब नियति का रचाया खेल है। हम तो उसके निमित मात्र हैं।
जुगनी की बातों का प्रभाव ,तारा जी पर पूरी तरह से पड़ रहा था,तब वो बोलीं - तब आप ही हमें बताइये ! इसके घर वालों का हम कैसे पता करेंगे ? वे कहाँ पर हैं ?या इसके ससुराल वालों का कैसे मालूम होगा ? यह कहां से आई है ,हम कैसे जानेंगे ?उन्होंने इसके साथ क्या किया है ?यदि कुछ गलत किया है तो उन्हें सजा मिलनी चाहिए।
