Shadayantra

 विनिता ने, चुपचाप किसी को कुछ भी बताये बग़ैर अपने दोस्त के साथ एक योजना बनाई।जब  वह अपने दोस्त के साथ बैठी हुई , वहां योजना बना रही थी। तब उन दोनों के पीछे उसका आठ साल का बेटा ,वहीं पर सो रहा था ,ये बात वह जानती थी किन्तु ये नहीं जानती थी कि वह जाग गया है। उसने उनकी सारी बातें सुन ली थीं ,किन्तु कबीर ज्यादा कुछ समझ नहीं पाया ,उसे लगा -मम्मी इन अंकल से केक मंगवा रहीं हैं। केक के नाम से ही, उसके मुँह में पानी आ गया और तुरंत ही वो उठा और बोला -मम्मी !पापा के जन्मदिन के लिए केक मंगवा रहीं हैं। 

हाँ बेटा !किन्तु ये बात अपने पापा को मत बताना विनीता ने कहा।  

 कबीर ने उस अनजान आदमी को अपने शयनकक्ष में देखा तो पूछा - मम्मी ! ये कौन हैं ?ये यहां क्या कर  रहे  हैं  ?

कुछ नहीं कबीर ! तुम्हारे पापा का जन्मदिन आ रहा है उनके लिए एक ''सरप्राइज'' है इसलिए पापा को कुछ  मत बताना। यह हम दोनों मां बेटे का राज़ है, हम पापा को अचानक से चौंका देंगे।ये अंकल उसी में हमारी सहायता करने के लिए आये हैं ,यह सुनकर बेटा भी खुश हो गया, कि पापा के जन्मदिन पर,हम सब  खूब मजे करेंगे।


 अगले दिन कबीर अपने स्कूल चला गया और उसके पापा अपने काम पर चले गए। सब कुछ योजना के तहत ही हो रहा था।कबीर अपने पापा को से उस 'सरप्राइज़ 'को बता देना चाहता था किन्तु अपनी मम्मी से वायदा जो किया था इसीलिए बार -बार अपने को रोक रहा था। 

 विनीता ने घर को बड़े अच्छे तरीके से सजाया था।जब सुमित अपने दफ्तर जा रहा था ,तब  मन ही मन सुमित सोच रहा था, आज मेरा जन्मदिन है और आज के दिन विनीता ने मुझे, मेरे जन्मदिन पर बधाई भी नहीं दी। फिर सोचा-काम में लगी रहती है, भूल गई होगी। शाम को मैं ही, जाकर सबको चौंका दूंगा। कबीर और विनीता को लेकर बाहर घूमने जाएंगे मन ही मन उसने भी योजना बना ली थी।

कबीर जब स्कूल से आया, तो उसने देखा- मम्मी घर को अच्छे से सजा रही हैं वह भी अपनी ,मम्मी की सहायता करने लगा। शाम को जब सुमित अपने घर आया, तो यह देखकर आश्चर्यचकित रह गया कि उसके घर में तो पहले से ही ,सारी तैयारियां हो चुकी हैं ,इससे पहले कि वो कुछ कहता या करता ,घरवालों ने ही उसे सरप्राइज कर दिया।  उसके जन्मदिन की तो पहले से ही तैयारी हो चुकी हैं।  ऐसी पत्नी और बेटा पाकर वह बड़ा प्रसन्न हुआ। तब सुमित ने विनीता से पूछा - तुमने और लोगों को नहीं बुलाया।

बुलाया है ,आते ही होंगे ,मेरे पतिदेव का जन्मदिन है ,ऐसे ही थोड़े मनेगा। तुम्हारा जन्मदिन हम आपस में मिलकर बहुत अच्छे तरीके से मनाएंगे। कुछ ही देर में और लोग भी आ गए।  तब विनीता रसोईघर से, केक ले आई, सुमित खुश होकर ,वह केक काट रहा था किंतु जैसे ही, उसने उस केक को, अपनी पत्नी को खिलाना चाहा तो उसने, सुमित के हाथ से केक लेकर, स्वयं सुमित को केक खिलाने लगी।

 तभी अचानक से तेज स्वर कबीर बोल उठा -पापा आपको केक खिला रहे हैं ,पहले आप खाइये !

नहीं बेटा, जिसका जन्मदिन होता है, पहले वही केक खाता है, मां ने उसे समझाया। 

कबीर भी जिद पर अड गया और बोला -नहीं ,पहले यह केक मम्मी खायेगी। 

विनीता उसे डांटना लगी, तब सुमित बोला -बच्चे  का मन रखने के लिए ,पहले तुम ही इस केक को खा लो !तुमने इतनी मेहनत की है ,तुम्हारा भी तो हक़ बनता है। इससे क्या फर्क पड़ता है ?पहले केक तुम खाओ या मैं खाऊं, यह केक तो हम सभी को खाना है किंतु विनीता उस केक को खाना ही नहीं चाहती थी।

वहां उपस्थित अन्य लोग भी विनीता से कहने लगे -बच्चे का मन रखने के लिए ,पहले ये केक तुम ही खा लो ! 

कबीर ने भी उससे पूछा -तुम केक क्यों नहीं खा रही हो ?अच्छा ,चलो !दोनों साथ -साथ में खाते हैं। 

तब कबीर एकदम से सभी के बीच आकर खड़ा हो गया और बोला -ये केक इसीलिए नहीं खा रहीं हैं क्योंकि इस केक में ज़हर है। 

कबीर की बातें सुनकर सभी अचम्भित रह गए ,वे दोनों पति -पत्नी चौंक भी गए और तब सुमित बोला -ये तुम क्या कह रहे हो ?तुम्हें कैसे मालूम, इसमें ज़हर है ? 

तब कबीर बोला -जब मैं स्कूल से आया था तो मम्मी के दोस्त, इस केक को लेकर आये थे और मम्मी से कह रहे थे -जो तुमने कहा ,वो मैंने इसमें मिला दिया है ,किसी को पता भी नहीं चलेगा और एक पीस खाते ही ,यह केक अपना काम कर जायेगा, उसके पश्चात हम दोनों साथ में रहेंगे।

 आखिर कबीर ने सुमित के जन्मदिन के षड्यंत्र का'' राज़ खोल'' दिया था ,खोला भी तो ऐसे मौक़े पर, जिससे विनीता की सच्चाई उसके ही नहीं ,सभी के सामने आ गयी।

अब तक विनीता कबीर को बच्चा समझकर उसके सामने ही ये सब कर रही थी ,आज उसी बच्चे ने उसका ''राज़ खोलकर ''सुमित के सामने रख दिया था।

तुम्हें कोई गलतफ़हमी हुई है ,सुमित अपने आपको समझाते हुए कबीर को भी समझाने लगा,वो किसी और चीज के विषय में बातें कर रहे होंगे। सभी आश्चर्य से विनीता की तरफ देख रहे थे विनीता बेहद घबराई हुई थी उसे कुछ सूझ ही नहीं रहा था कि वो क्या करे और क्या कहे ?सभी की सवालिया नजरें उसे घेरे खड़ी थीं ,सुमित को तो जैसे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा था ,वो कबीर को समझाने का प्रयास कर रहे था।  

नहीं ,मुझे कोई गलतफ़हमी नहीं हुई है ,कहते हुए तभी कबीर अंदर गया और बोला -आप लोग मेरे साथ आइये !सभी उसके पीछे चल दिए ,तब उसने एक अलमारी की तरफ इशारा किया और बोला -इसे खोलिये !आपको सब मालूम हो जायेगा। 

सुमित ने जैसे ही अलमारी खोली ,उसमें एक आदमी पहले से ही छुपा हुआ था ,उसको देखते ही ,अब तो शक की कोई गुंजाईश ही नहीं रही। सुमित उसका कॉलर पकड़कर उसे अलमारी से बाहर लाया और पूछा -तुम इस तरह छुपे हुए ,मेरे घर में क्या कर रहे थे ?और उसकी पिटाई करने लगा ,तुम कौन हो ?अभी पुलिस को बुलाता हूँ। पुलिस का नाम सुनते ही ,पहले तो वो भागने का प्रयास करने लगा किन्तु भीड़ ने उसे पकड़ लिया ,तब वो घबराकर बोला -मुझे माफ़ कर दीजिये !मैं विनीता का दोस्त हूँ ,हम दोनों की ही योजना थी ,तुम्हें अपने मार्ग से हटाने की किन्तु ये नहीं मालूम था ,जिसे हम बच्चा समझे बैठे थे वो ही हमारे 'षड्यंत्र ''का इस तरह पर्दाफाश कर देगा कहते हुए उसने कबीर को घूरा ,तभी सुमित ने उसके एक ज़ोरदार झापड़ लगाया। तब तक पुलिस भी आ चुकी थी ,शायद किसी ने उन्हें फोन कर दिया था। 

जन्मदिन की पार्टी तो ख़राब हो गयी किन्तु कबीर की समझदारी के कारण आज सुमित की जान बच गयी और विनीता और उसके दोस्त के 'षड्यंत्र' का पर्दाफाश हो गया।  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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