Mysterious nights [part 52]

 एक दिन अचानक ही, दमयंती ने,'' गंगा स्नान''चलने के लिए कहा ,उसकी आज्ञानुसार  परिवार के सभी सदस्य गाड़ी में बैठकर,' गंगा स्नान' के लिए चल दिए। आज वे लोग, अपने साथ शिखा को भी ले गए थे। शिखा उन सब के साथ थी, दमयंती के बच्चे और शिखा एक गाड़ी में थे और घर के अन्य बड़े दूसरी गाड़ी में थे। मन ही मन शिखा घबराई हुई थी, वह सोच रही थी - उससे ''साज -सज्जा'' वाली ने तो कहा था -कि तुम पर उसकी [दमयंती ]हमेशा नजर रहती है। '' क्या इन्हें पता नहीं चला ? कि मैं हवेली के दूसरे हिस्से में गई थी। ये इस तरह शांत क्यों है ?क्या इन्हें पता नहीं चला या फिर तूफान से पहले की शांति है ? इन्होंने एक बार भी मुझसे कुछ नहीं पूछा,न ही कुछा कहा।  सबसे बड़ा प्रश्न तो बार-बार उसके मन में यही उमड़ रहा था -' कि उसे, उसके कमरे में कौन सुला कर गया ?''


 शिखा ने वहां जो कुछ भी देखा, किसी से बांट लेना चाहती थी। वह स्वयं भी समझना चाहती थी कि जो कुछ भी वह समझ रही है ,वही सही है या बात कुछ और है ?सबसे पहले तो वह इसी प्रतीक्षा में थी , शायद उससे दमयंती कुछ कहेगी, उसे डाँटेगी , अथवा उसे समझाएगी या अपनी तरफ से कोई सफाई देगी लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं किया और आज वह अपने बच्चों के साथ'' गंगा स्नान'' के लिए जा रही थी, जिसमें शिखा भी उनके साथ थी। 

आज शिखा को बाहर घूमना अच्छा लग रहा था। बहुत दिनों के पश्चात, उसने बाहर की दुनिया देखी है , वह तो जैसे उस दुनिया में खो ही गई थी। आज उसे लग रहा था, उस दुनिया से बाहर भी एक और दुनिया है।इसमें गलती किसकी है ? यह दुनिया तो मेरी अपनी ही बनाई हुई है, मेरी अपनी ही सोच की है। 'तेजस' के जाने के पश्चात मैंने अपने को, उसके परिवार को ही, अपनी दुनिया समझ लिया था और स्वयं ही उस दुनिया में कैद होकर रह गई थी। मुझे अपने मम्मी -पापा से भी मिलने जाना चाहिए। अनेक विचार उसके मन में आ रहे थे , मन ही मन सोच रही थी -जाने वाला तो चला गया, फिर मैं क्यों इस दुनिया में कैद होकर रह गई हूं ? वो भी तो मुक्त हो गया। 

उस समय भावुकता में उसने, जो भी निर्णय लिया था, अब उस निर्णय पर वह सोच रही थी। यदि वह पढ़ती- लिखती अपने माता-पिता के साथ रहती तो शायद उसकी दुनिया ,कुछ और ही होती। यही सोचकर वह, दमयंती से कहती है -मैं अपने मम्मी -पापा से भी मिलने जाना  चाहती हूं।

 आज दमयंती ने कहा -हां,ठीक है। मैं मानती हूं, तुम्हें अपने परिवार से मिले हुए बहुत दिन हो गए हैं , तुम्हें अवश्य जाना चाहिए, तुम ही क्या, हम भी तुम्हारे साथ ही चलते हैं। लौटते समय, उन लोगों ने ड्राइवर से गाड़ियां  उसके गांव की तरफ घुमवा दी थीं।

 आज सब कुछ अच्छा हो रहा है , मेरा कहना भी मान लिया, आज मुझसे  ठीक से बात भी कर रही हैं। किन्तु अब मैं उस हवेली में वापस नहीं जाऊंगी, यही सोचकर वह मन ही मन खुश हो रही थीं। जब दो गाड़ियां गांव के अंदर प्रवेश करती हैं, तो पूरे गांव को भी पता चल जाता है कि शिखा और शिखा के ससुराल वाले आये हैं। 

यह सब देखकर, उसके माता-पिता बहुत प्रसन्न हुए और वे भी मन ही मन सोच रहे थे -अब वे अपनी बेटी को वापस नहीं जाने देंगे। ठाकुर परिवार का बहुत आदर- सम्मान किया गया। गांव के लोग भी, एकत्र हो गए। कुछ महिलाएं और गांव की कुछ लड़कियां तो शिखा से यही पूछने में व्यस्त थीं - क्या वह वहां ठीक से तो रह रही है ?ससुराल में ,उससे किसी ने कुछ कहा तो नहीं ,क्योंकि शिखा का विवाह और विदाई जिन हालातों में हुए थे ,उसे सभी गांववाले जानते हैं। उस समय कुछ लोग उसकी विदाई के पक्ष में थे तो कुछ विपक्ष में थे। ऐसे में उनके मन में जिज्ञासा होना स्वाभाविक है ,कि इन परिस्थितियों में शिखा पर क्या बीत रही है ,अथवा उसकी ससुराल वाले उसके  साथ कैसा व्यवहार कर रहे हैं ?अथवा उसे वहां कोई कष्ट तो नहीं। 

 शिखा ने, सबको यही जवाब दिया -मैं वहां पर बहुत अच्छे से रह रही हूं, मुझे वहां कोई परेशानी नहीं है , मेरी ससुराल वालों ने मेरे लिए एक नौकरानी भी रखी है, जो मेरा कार्य करती है। 

क्या तुझे, अपने गांव की और घरवालों की याद नहीं आती  ?

बहुत आती है ,कहते हुए शिखा की आँखें नम हो आईं। 

 अब, उस गांव में तेरा क्या रखा है ? एक बूढी महिला ने पूछा - तू ,वापस क्यों नहीं चली आती ? 

वही सोच रही हूं , अब मुझे यहां आना चाहिए। 

बाहर भी, कुछ लोग बातचीत कर रहे थे , बातचीत का सिलसिला चलते-चलते , शिखा तक पहुंच गया , कुछ अनुभवी बड़े लोगों ने कहा -बेचारी ! अभी बच्ची है , वह कब तक विधवा के रूप में तुम लोगों के घर में रहेगी ? बहुत लंबा जीवन है , अकेली कैसे बिताएगी ?वो तो बालक है किन्तु हमें तो समझना चाहिए। 

तब ठाकुर बलवंत सिंह बोल उठे  - हमारा एक बेटा गया है,हम मानते हैं, तो क्या ? और बेटे भी तो हैं , यह हमारे घर की बहू है , हमारे घर की बहू ही रहेगी। चार बेटे हैं, जिससे जी चाहे ,यह विवाह कर सकती है। 

गांव के लोगों को यह प्रस्ताव अच्छा लगा, और बोले - आपकी यह बात भी सही है, भाई की बेवा को, इस तरह दूसरा  भाई उसे 'चुनरी' ओढ़ा सकता है, यदि वह उसका उत्तरदायित्व उठाने लायक है और लड़की को भी कोई आपत्ति नहीं है। 

 हम इस विषय पर ही सोच रहे थे, यह तो आपकी बेटी पर निर्भर करता है, उसे गर्वित और गौरव, सुमित और पुनीत में से कौन पसंद आता है ?

 जब शिखा के घर वालों ने सुना, उनके मन को भी राहत मिली , उन्हें भी लगने लगा, हमारी बेटी सुरक्षित जगह पर है और आगे भी सुरक्षित ही रहेगी। धन-धान्य में कोई कमी नहीं है, तब वह बोले -जब भी कोई ऐसा निर्णय लेना हो, तो आप हमें बुला लीजिएगा। हम आ जाएंगे, और फिर से एक बार कन्यादान हो जाएगा। किन्तु उससे पहले हमें एक बार शिखा बिटिया से भी पूछना होगा, यह कहते हुए वह अंदर गए, और शिखा की मां सरला से बात की। 

अपने पति और शिखा के ससुरालवालों की बातें सुनकर ,सरला बोली -वैसे तो हमें भी कोई आपत्ति नहीं है  किंतु इसके लिए हमें अपनी बेटी से भी तो पूछना होगा। 

अब क्या पूछना है ? इतने दिनों से वहीं तो रह रही है , अब तक तो कोई न कोई उसे पसंद आ ही गया होगा, किशोरी लाल जी ने सरला से कहा।

इससे पहले कि वे लोग, इस विषय में शिखा से कोई बात करते,  अचानक ही दमयंती बोल उठी - अब हमें चलना चाहिए।

 शिखा बोली -अभी मैं कुछ दिन और अपने घर रहना चाहती हूं। शिखा के मन में बहुत प्रश्न थे ,उस परिवार की कुछ जानकारियां ,जो अपने घरवालों से बाँटना चाहती थी।  


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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