ऐश्वर्या अपनी बहन के विवाह के सभी कार्य करके , तब अपनी ससुराल आती है। ससुराल आई तो है लेकिन उसे एक अनजाना सा भय लगा रहता है। वहां आने का उत्साह तो होता है किंतु मन अंदर ही अंदर डरने भी लगता है। न जाने, वह लोग कैसा व्यवहार करेंगे ? अब तो एक महीना हो गया , उसे लग रहा था जैसे बरसों बीत गए हो। शायद, वह लोग बदल गए हों। चंदा देवी की नजरों से भी कतराती थी।वो तो जैसे एक पल भी ,उसे देखना नहीं चाहती थीं। कभी -कभी ऐश्वर्या सोचती -न जाने ,इनकी मेरी कौन सी पिछले जन्म की दुश्मनी है ?जो इस जन्म में मुझे चुकानी पड़ रही है। उसका बस चलता तो वह उनके सामने ही नहीं जाती। अब तक जितना भी दिन उसने अपनी ससुराल में व्यतीत किए हैं, उसमें कोई भी, एक भी पल ऐसा उसके लिए यादगार नहीं था, जिसको तन्हाई में बैठकर, स्मरण करके मुस्कुरा भी सके। उन पलों को स्मरण करके सिर्फ उसे दुख का ही आभास होता। एक अजीब ही, अनुभूति होती, जिसमें गम और दर्द के सिवा कुछ नहीं था और ससुराल में आकर ,ख़ुश कैसे होते हैं ? इसका उसे कोई अनुभव नही था। बस उसे वहां जाना है,वहीं अपना जीवन व्यतीत करना है , इतना उसे मालूम है।
इस जीवन को ऐश्वर्या ने एक टास्क की तरह लिया है, उसे लगता है, यह मेरा जीवन है और यहीं मुझे रहना है सुख मिले या दुख जो भी अनुभव मिलेंगे, उनको जीना है और अपने जीवन में आगे बढ़ना है। मेरे लिए ये भी एक कुरुक्षेत्र की तरह ही है। इससे मैं पीठ दिखाकर भाग नहीं सकती , हर परिस्थिति का डटकर मुकाबला करना है। किसी सोच के साथ, वह अपनी ससुराल में टिकी हुई है।
जब वह अपनी ससुराल पहुंची, तो देखकर आश्चर्यचकित रह गई , सब ने मुस्कुरा कर उसका स्वागत किया , ऐसा तो उसके साथ ,उसके विवाह पर भी नहीं हुआ था। क्या यह लोग बदल गए ? ऐसा कैसे हो सकता है ? जिस मनुष्य की जैसी फितरत होती है , जिसके स्वभाव में ही कड़वापन है , वह इतना मीठा कैसे हो सकता है ? चंदा देवी जिन्होंने आज तक भी कभी उसकी तरफ मुस्कुरा कर नहीं देखा ,वह भी, मुस्कुरा रही थीं। जिसने कभी पोती को अपने साथ नहीं बैठाया, उससे कभी ठीक से बात नहीं की उन्होंने अपनी पोती को अपने पास बुलाया और उससे बातें करने लगीं। हे ईश्वर !यह क्या हो रहा है ? कहीं में किसी दूसरी जगह तो नहीं पहुंच गई। अपने कमरे में जाकर बैठी, कमरा भी सुव्यवस्थित तरीके से, सजा हुआ था। कोई भी सामान अस्त व्यस्त नहीं था।
क्या एक महीने में इन लोगों का इतना हृदय परिवर्तन हो गया ? प्रवीण भी हर कार्य में बढ़-चढ़कर भाग ले रहा था, सभी कार्य मुस्कुराकर कर रहा था।
बाहर से प्रति गया, और बोला -कैसी हैं ? आप ! सब कार्य ठीक से पूर्ण हो गया।
ऐश्वर्या उसका मुंह देख रही थी, क्या यह वही इंसान है ? जो कुछ दिन पहले मुझसे लड़ने के लिए,मेरे कमरे में पहुंच गया था,मुझ पर इसकी दृष्टि ही गलत थी।
हां, सब ठीक है कहकर ऐश्वर्या अंदर आ गई। प्रवीण वहीं बैठा हुआ था, मेरे जाने के पश्चात क्या कुछ हुआ है ?
क्यों तुम्हें ऐसा क्यों लग रहा है ? प्रवीण ने भी, पलट कर ऐश्वर्या से प्रश्न किया।
क्या आप देख नहीं रहे हैं ? कैसे? आपकी मम्मी मुस्कुरा कर बात कर रही हैं, आपके भाई के चेहरे पर भी, मुस्कुराहट है।
क्या, तुम्हें किसी ने कुछ नहीं बताया ?
मुझे क्या बताना था और कौन बताता ? जो भी बात बताते हैं, आप ही बताते हैं ।
यह बात भी सही है , तो मैं ही बता देता हूं , प्रतीक का रिश्ता तय हो गया है।
कब कहां और कैसे ? आपने मुझसे एक बार भी , इस विषय में बात नहीं की।
इसमें बताना ही क्या था ?अब वो कैसे कहे ? कि मम्मी ने ही ,उसे बताने के से इंकार किया था। जब उसने पूछा -क्यों नहीं बताना है ? एक न एक दिन तो उसे पता चल ही जायेगा। तब बोलीं थीं -इसमें वो क्या करेगी ? जब यहाँ आ जाएगी तो स्वयं पता चल ही जायेगा।
क्यों ? बताना नहीं था ,क्या मैं इस घर की बहु नहीं हूँ ? इस घर की सदस्या नहीं हूँ , आपकी पत्नी नहीं हूँ ऐश्वर्या ने प्रश्न किया।
इस बात से कौन इंकार कर रहा है ? वहां तुम अपनी बहन के विवाह में व्यस्त थीं ,हमने सोचा -क्यों न तुम्हें आश्चर्यचकित कर दिया जाये ,ऐश्वर्या के उठते सवालों से बचने के लिए ,उसने ऐश्वर्या को टालना चाहा। मन ही मन सोच रहा था ,न जाने मम्मी ने बताने से क्यों इंकार किया ?जब लड़की देखने गए थे ,तब भी वो लोग पूछ रहे थे ,बड़ी बहु कहाँ है ?अब मम्मी की बातें मम्मी जाने..... प्रवीण कभी अपने दिमाग़ पर ज्यादा जोर नहीं डालना चाहता । न ही घरेलू बातों में ,वह अधिक हस्तक्षेप करता है और न ही ध्यान देता है। जो चल रहा है चलने दो ! यह सोचकर आगे बढ़ जाता है।
मैं एक माह से अपने घर गई हुई थी , इस बीच तुमने अपना कोई कार्य किया ? ऐश्वर्या ने प्रवीण से पूछा।
दिन कितने खुशहाली में कट रहे थे ?आते ही यह फिर से मैडम की तरह, प्रश्न पूछने लगी मन ही मन प्रवीण ने सोचा।
आप कुछ जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं ?
क्या जवाब दूं? अभी कुछ सोचा नहीं है।
सोचने में ,इतना समय क्यों लग रहा है ? छोटे-छोटे खर्चों में ही, जो पैसा जोड़ा है वह समाप्त हो जाएगा। तब फिर व्यापार के लिए कोई पैसा नहीं बचेगा ,ऐश्वर्या ने अपनी चिंता व्यक्त की। आप यह क्यों नहीं सोचते हैं ?कारोबार को आगे बढ़ाने में न जाने कितना पैसा लगे ?घरवालों से तो कोई उम्मीद नहीं है ,कम से कम आपके पास जो है ,उससे शुरुआत तो कीजिये , ऐश्वर्या ने उसे समझाने का प्रयास किया।
किंतु वह कैसे कहे? कि जो पैसा उसने मां को दिया है। छोटे की शादी में भी लगाने का सोच रही हैं और घर की मरम्मत भी करवानी है, उसमें भी पैसा लगेगा। कह रही थीं - क्या अब तक तुम लोगों को, खाने को कुछ नहीं मिला, जैसे पहले पल रहे थे वैसे ही ,अभी भी तुम्हारे खर्च पूरे होंगे। जब तुम परिवार में रहोगे ,घर में रहोगे तो क्या तुम्हें खाने को रोटी नहीं मिलेगी ? यह कहकर उन्होंने प्रवीण को समझा लिया था। प्रवीण को भी लग रहा था -जब मम्मी सब संभाल रही हैं, तो क्यों व्यर्थ में ही सिरदर्द मौल लेना ? इससे आगे वो सोचता ही नहीं था कि उसका भविष्य क्या होगा उसके परिवार का क्या होगा ?
किंतु ऐश्वर्या अब सबकी मुस्कुराहट का राज समझ गई थी , वह समझ गई कि अब इन लोगों को पैसा मिल गया है इसीलिए इन्होंने अपने मुखोेटे कुछ दिनों के लिए उतार फेककर नया मुखौटा लगाया है। उसे प्रवीण पर क्रोध आ रहा था, यह इतने वर्षों से इनके साथ रह रहा है किंतु आज तक इनके असली चेहरे नहीं ,देख पाया।
