Sazishen [part 36]

अस्पताल के सभी कर्मचारियों को, इंस्पेक्टर के सामने उपस्थित किया जाता है और उनसे प्रश्न पूछा जाता है -इस नर्स को कौन जानता है ? इससे पहले इस नर्स को किसने देखा है ?सभी नजरें झुकाये खड़े थे।  इंस्पेक्टर नाराज भी होता है कि तुम्हारे अस्पताल में बाहर से कोई नर्स आती है , और एक मरीज को गायब करके स्वयं भी गायब हो जाती है , किसी को न ही उसका नाम मालूम है , और न ही उसकी पहचान है। सबको वह तस्वीर दिखलाई जाती है, ताकि उस नर्स को सभी पहचान कर लें।  जहां कहीं भी, जैसे भी ,वह दिखलाई देती है। थाने में, आकर सूचना दें।

चेतावनी देकर ,इंस्पेक्टर अपनी टीम के साथ बाहर आ जाता है। अब तो यहाँ कोई सिपाही तैनात करने का कोई लाभ नहीं है। जो होना था हो गया, किन्तु अब उस नर्स की एक तस्वीर तो हमें मिल ही गयी। यही उसकी पहचान का सबूत बनेगी। अस्पताल में भी स्टाफ के लोग अब सतर्क रहेंगे। आखिर वह कौन है ? जिसने चम्पा की सहायता की होगी या फिर उसको जबरदस्ती यहाँ से ले जाया गया होगा। कौन होगा ? वो ! आखिर अब वो कहाँ होगी ?आख़िर वह नर्स कहाँ गयी ?इंस्पेक्टर के मन में अनेक प्रश्न गूंज रहे थे ,जिनका जबाब अभी उसके पास नहीं था। तभी फोन की घंटी बजी ,जिसके कारण उसका ध्यान भंग हुआ। हैलो !


हैलो ! ज़नाब कब आने का इरादा है ?या आज रात्रि भी, थाने में हीं बितानी है। आप छुट्टी पर है ,क्या आपको ये भी स्मरण है या नहीं ?उधर से शिकायतों भरी आवाज आई ,क्या आपको मालूम है ?आपकी एक प्यारी सी पत्नी भी है जो....... 

इससे पहले कि प्रभा अपना वाक्य पूर्ण कर पाती ,उससे पहले ही विकास बोल उठा -हाँ -हाँ, ये भी कोई भूलने वाली बात है ,मुझे सब स्मरण है ,मैं छुट्टी पर हूँ ,मेरी नई -नवेली दुल्हन अपने मायके में मेरी प्रतीक्षा में होगी। वो खाने पर मेरी प्रतीक्षा कर रही है। 

वेरी गुड़ !अब इसी तरह गुड़ बॉय बनकर ,अपनी ससुराल चले आइये ! मम्मी ने जब मुझे अकेले आते देखा ,उनकी तो हालत ही ख़राब हो गयी। उन्हें लगा ,मैं अपने पति से लड़कर आई हूँ ,इस तरह पहली बार अपनी ससुराल से मायके आई ,वो भी अकेली !

हाँ ,मैं, समझ सकता हूं, आंटी जी पर क्या बीती होगी ? परेशान हो गई होगी। यहां भी, मेरे शुभचिंतक मुझे सुबह से समझाने में लगे हैं , तुमने जो कुछ भी स्मरण कराया वह सुबह से स्मरण कर रहे हैं ,कहते हुए इंस्पेक्टर मुस्कुराने बोला - मैं शीघ्र ही घर आ रहा हूं। 

जब इंस्पेक्टर घर पहुंचा, खाना मेज पर लगा हुआ था, उसे देखकर प्रभा की मम्मी प्रसन्न हो गईं , शिकायत भरे लहजे में बोलीं -क्या दामाद जी ! इस तरह नई नवेली दुल्हन को अकेले भेज देते हैं, यह तो उचित नहीं है।

 आंटी जी !में समझ सकता हूं, किंतु आप भी तो मेरी मजबूरी समझिए ,मेरा कार्य ही ऐसा है। 

क्या तुम, अभी भी ,मम्मी को आंटी जी ही कहते रहोगे ? प्रभा ने प्रश्न किया। अब तो हमारा विवाह हो गया तो मम्मी जी कह सकते हो।

जी अवश्य ! बस आपकी इजाजत लेनी बाकी रह गई थी, प्रभा की तरफ देखकर विकास बोला -तब आप इजाजत न देती, मैं, आंटी जी को ,मम्मी जी कैसे कह सकता था ?

आप मेरा मजाक बना रहे हैं। 

अब तुमसे भी मजाक नहीं करूंगा तो और किससे  मजाक करने जाऊंगा, कहते हुए डोंगे में से सब्जी लेकर स्वयं ही खाने लगा। 

यह आप क्या कर रहे हैं ? प्रभा ,आपको खाना परोस देगी।

अभी तक तो स्वयं ही लेकर खाया है, अब आदत सी हो गई है , अब धीरे-धीरे आदत बदलनी पड़ेगी। 

आज तो मेरी मनपसंद सब्जी बनाई है, आपको कैसे मालूम हुआ ?

मुझे  प्रभा ने बताया , और मुझे मेरी सासू मां ने, कहते हुए प्रभा हंसने लगी, और स्वयं भी प्लेट में खाना लेकर खाने लगी। मम्मी आप भी आईये ! हमारे साथ बैठकर खाना खा लीजिए। 

अब कुछ दिन तो यहां रुकेंगे। 

नहीं, हम कल ही चले जाएंगे। अभी मेरी एक सप्ताह की छुट्टियां बाकी हैं , मैं सोच रहा हूं, कहीं बाहर घूम आते हैं। फिर यह भी स्कूल में व्यस्त हो जाएगी और मैं भी अपने काम पर चला जाऊंगा। 

यह तुमने सही सोचा-जब एक सप्ताह बाकी है, तो क्यों ना उसका लाभ उठाया जाए ?

मम्मी !आप भी हमारे साथ चलियेगा । 

यह तुम क्या कह रही हो ? भला मैं भी ,ऐसे कैसे ?तुम्हारे पीछे , पिछलग्गु  बनकर चल सकती हूँ  , मैं तुम लोगों के साथ जाकर क्या करूंगी ?

आप यहां अकेली बोर हो जाएंगी। 

नहीं होउंगी , तुम्हारे मामा ने, कुछ दिन के लिए मुझे ,घर पर बुलाया है ,मैं वहीं चली जाऊंगी। तुम अपना और अपने पति का ख्याल रखो !

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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