Rahasya

  इक अनबूझ पहेली बना रहस्य , सुलझाओ जितना.....  ,उलझाए  उतना ही ये..... रहस्य! 

जिसने भी इसको जानना चाहा  ,आपने आपको ही भूल गया ,सुलझा सका न कोई रहस्य !



ये तो दुनिया के रहस्य ,आज तक जान सका न कोई अपने मन का रहस्य !

रहस्यों की ख़ोज करना लगता है अच्छा ! जो जान गए ,केेसा ? वो रहस्य !

एवरेस्ट की ऊंचाई पर चढ़ने वाला भी, जान सका न ,'कैलाश 'का रहस्य !

रहस्यों कि इस दुनिया की हम, छोटी इकाई  ,कैसे जाने ? इतने रहस्य !

पुरी का मंदिर ,भूतों का मंदिर और भी न जाने कितने रहस्य !

कुदरत की दी ,ये पहेली , सुलझा सका न..  कोई रहस्य !

जिसको ,जानकर भी जाना नहीं ,ऐसा कैसा? ये रहस्य !

आज भी ''अश्वत्थामा ''बना हुआ है , एक रहस्य !

परत दर परत ,इसमें छिपे न जाने कितने ?रहस्य !

पौराणिक रहस्य ,आज भी बने हुए हैं ,इक रहस्य !

जाने कितनी जाने गयीं ?सुलझा न सका कोई रहस्य !


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post