Jail 2 [part 6]

ऐ  मैडम ! यहाँ  क्या हो रहा है ? तुम्हारा, तो सारा दिन पता नहीं ,क्या करती रहती हो ? बाहर निकलिए ! एक पुलिस वाली आकर अमृता से कहती है। 

उसकी आवाज सुनकर अमृता बाहर आती है , बाहर आकर अमृता ने पूछा -क्या बात है ? क्या कुछ हुआ है ?

हो तो बहुत कुछ रहा है ?लेकिन तुम कहां रहती हो ?यह नहीं पता चल रहा , इस 'जेल' में क्या हो रहा है ?तुम्हें कुछ खबर भी है या नहीं। 

क्या हो रहा है ?मैं तो यही रहती हूं ,अपना समय पर काम निपटा लेती हूं ,मुझे तो कुछ भी नहीं मालूम !

वही तो मैं पूछना चाह रही हूं तुम कहां रहती हो ? बड़ी सीधी बनती हो ,मुझे कुछ मालूम नहीं ,तो जेल में क्या हवा -पानी बदलने आई हो ?या छुट्टियां बिताने आई हो ,ये जेल है ,कोई होटल नहीं। जेल में इतना कुछ हो रहा है और तुम्हें खबर ही नहीं। क्या तुम भी इन लोगों से मिली हुई हो ?वह कड़क आवाज में बोली। 



' जेल 'में क्या हो रहा है ?यह जानना मेरा कार्य नहीं है ,यह कार्य आपका है। 

हमें हमारी ड्यूटी समझने की कोशिश न करो ,आँखें तरेरते हुए वो बोली। 

 हो भी  क्या रहा है,\' कैदी 'अपनी सजा काट रहे हैं ,अपना कार्य समय सही समय पर कर रहे हैं और क्या होना है ?

उस पुलिस वाली का रवैया कुछ और सख्त हो गया और बोली -मुझे मेरा काम मत समझाओ! कि मुझे क्या करना है ,क्या नहीं ? मैं पूछती हूं, यहां से कुछ लड़कियां गायब हो रही हैं और किसी को कुछ खबर ही नहीं उसने  पास आई भीड़ से पूछा। तुम सभी , यहां खड़ी हो, क्या कोई मुझे बता सकता है ?कि यह किसकी हिम्मत हो सकती है ?जो यहां से लड़कियां बाहर ले जाई जा रही हैं और उनका क्या हो रहा है ?

सभी ने 'नहीं 'मैं गर्दन हिला दी। तभी उस पुलिस वाली  ने डंडे को जमीन में पटकते हुए कहा , तुम में से किसी ना किसी की कारस्तानी तो यह है, इसका मैं पता लगाकर रहूंगी और जब पता चल गया तो  किसी को छोडूंगी नहीं। उसकी बात सुनकर अमृता जी को आश्चर्य होता है, कि जेल में भी लड़कियां गायब होती  हैं गायब होकर वे  किधर गई हैं ?यह भी एक प्रश्न खड़ा हो जाता है , किसकी इतनी हिम्मत है? कि जो जेल में रहकर ही जेल के कायदों को नियमों को तोड़ रहा है ,और किसी को इसकी जानकारी भी नहीं। ऐसा कैसे हो सकता है ? 

पुलिस वाली से अमृता ने पूछा- इस बात का कैसे पता चला ?कि ''जेल'' से  लड़कियां गायब हो रही हैं। 

कानून नाम की भी कोई चीज होती है, सब की जानकारी हमारे रजिस्टर में दर्ज है, कल जब सब की हाजि री ली जा रही थी , तब कुछ लड़कियों के नाम उस रजिस्टर में तो दर्ज थे किंतु लड़कियां नहीं थीं। अमृता की तरफ देखते हुए बोली -तुम  किन- किन कैदियों को  जानती हो ? क्या वे सब यही हैं ? उसने अमृता से इसलिए पूछा क्योंकि उसने सोचा ,अब इस औरत की उम्र हो चुकी है ,ऐसा कार्य तो यह करेगी नहीं ,न ही ऐसी दिखती है ,किंतु तभी मन ही मन बड़बड़ाई - किसी का क्या पता चलता है ? अगर यह शरीफ होती तो आज क्या जेल में होती ? वह भी खून के जुर्म में !

अमृता ने तब अपने साथ की लड़कियों के नाम बतलाए, और कहा -यह सब यहीं  हैं। 

हमारे रजिस्टर के हिसाब से आठ  लड़कियां गायब हैं ,वह किधर गईं  ?कुछ नहीं मालूम,हमारी जाँच चल रही है।  इस विषय में मैंने ,''जेलर साहब ''से भी बात की थी ,वो स्वयं ही अचम्भित हैं।  उन्होंने महिला कैदियों की  इंचार्ज शकुंतला को बनाया हुआ था किंतु अब मैं आ गई हूं जो भी यह हरकतें कर रहा है मेरी नजरों से बचेगी नहीं ,याद रखना ,मेरा नाम' तनु 'है। मैंने अपना परिचय दे दिया ,अब आप लोग भी बारी -बारी से अपना परिचय दीजिये।

तब प्रेमा ,बरखा ,निर्मला ,सुंदरी सलमा ,सभी ने अपने -अपने नाम के साथ अपना बाकि का परिचय भी दिया। तभी अमृता को स्मरण हुआ  एक बार सत्तो ने भी ,उनसे किसी लड़की के बाहर जाने का उनसे जिक्र किया था ,किन्तु उस समय उन्होंने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया था। तब उन्होंने सत्तो  की तरफ देखा - और आंखों के इशारे से उसे इशारा किया, किन्तु उस समय उसने ,अपने मुंह पर उंगली रखकर उन्हें चुप रहने का संकेत दिया। वह पुलिस वाली आई और अपनी ड्यूटी करके चली गई। उसके जाने के बाद सभी धीरे-धीरे उस स्थान से खिसक गए , किंतु और अमृता जी वहीं खड़ी रहीं , अमृता जी ने उसे उस दिन वाली बात को याद  दिलवाया। 

तब तो बोली- मैंने तो आपसे पहले ही कहा था, यहां अवश्य ही कुछ ना कुछ गड़बड़ है। मैंने देखा है, जेल से बाहर कुछ लड़कियां जाती हैं , जो गई हैं  वापस नहीं आईं। मैंने भी यह सोचकर लापरवाही कर दी, हो सकता है उनकी सजा माफ हो गई हो किंतु अब इस पुलिस वाली की बात सुनकर मुझे लगता है कि अवश्य ही हां कुछ खिचड़ी पक रही है। मैं कुछ ज्यादा बोलती हूं और तीखा भी बोल देती हूं यह मैं जानती हूं , इसीलिए आप ने भी मुझ पर यकीन नहीं किया। यह जरूरी नहीं ,कि जो मीठा बोलता है ,अच्छा बोलता है वह स्वभाव में भी अच्छा ही हो। सत्तो  ने अमृता जी से कहा।


 

अमृता जी सोच रही थीं , क्या इसने मुझे किसी तरफ इशारा किया है या आम धारणा  बतला रही है , जो भी है ,गलत तो हो ही रहा है , किंतु अब मेरी उम्र भी नहीं कि मैं जासूसी करूं , मैं इन पचड़ों  में पड़ना ही नहीं चाहती। सोचते हुए ,अपनी बैरक की ओर चल दीं। किन्तु अब उनका मन ,अपनी कहानी लिखने में नहीं था। सत्तो भी ,साथ में ही थी ,बोली -आप तो अभी आई हैं ,और जेलर साहब आपको जानते हैं ,किन्तु जेल की  हक़ीकत,अभी आपने देखी ही कहाँ है ?उस दिन जेलर साहब के दोस्त भी ,आपसे मिलने आये थे। तब इन लोगों को लगा कि आपकी पहुंच कुछ ज्यादा ही है किन्तु ,जो गरीब हैं ,वक्त के मारे हैं ,असल ज़िंदगी तो दीवार के उस तरफ देखने को मिलेगी।जितनी भी आपसे मिली हैं ,पिट -पीटकर ,ढीट हो चुकी हैं ,सभी के साथ परेशानी हैं किन्तु जो जितनी भी पुरानी, वही यहाँ दादागिरी करती है।  

तुम कहना क्या चाहती हो ?अमृता कुछ भी न समझते हुए ,उससे पूछती है। 

सत्तो ,अमृता की अनभिग्यता से चिढ जाती है ,मैंने सुना है ,तुम तो कोई बड़ी हीरोइन थीं ,शायद जेलर इसीलिए तुम्हारा सम्मान करता है ,अब तो उसके दोस्त का कुछ काम भी कर रही हो। 

अमृता  जी ने देखा ,अभी कुछ देर पहले ही तो सत्तो ,आप करके उनसे बात  कर रही थी ,अब तुम पर आ गयी।  किसी बात से परेशान है ,या फिर कुछ  कहना चाहती है ,तभी एक पुलिसवाली आती है। ऐ.... चलो !अपने काम पर लगो। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post