सभी बच्चे उस 'भूत मेले 'से निकलकर किसी तरह ,अपनी कक्षा में पहुंचे , निम्मी के कक्षा में पहुंचते ही उसको मोना चुड़ैल ने ,अपनी लंबी चोटी के लपेटे में ले लिया , उससे नाराज होती है , मेरी कक्षा में आए तो समय से आएं। कुछ देर की पीड़ा देने के पश्चात ,उसने निम्मी को यह कहकर छोड़ दिया कि यह तुम्हारी पहली गलती है। किंतु तभी उसने अपना रूप बदला और एक भयंकर औरत के रूप में , सबको दिखने लगी ,निम्मी बुरी तरह डर गई , निम्मी सोच रही थी -यह मुझे ही दिख रही है या किसी और को भी दिखलाई दे रही हैं तब उसने देखा ,और बच्चे भी डर गए हैं।
मोना , ही ही ही ही ही ही की आवाज करके जोर जोर से हंस रही थी। तब उसने ,वहीँ खड़े -खड़े एक चक्कर लगाया और जैसे ही वह घूमी एक सुंदर महिला बन गई , तब वह बोली -इंसानों से बचने के लिए , अपनी सुरक्षा के लिए ,कभी-कभी ऐसा भी बन जाना पड़ता है , अपना रूप बदलकर ,भयंकर रूप धारण करना पड़ जाता है, और कभी कभी, मोहिनी रूप भी धारण कर सकते हैं, यह हमारी आवश्यकता पर निर्भर करता है।
तब निम्मी और अन्य बच्चों को , पता चला कि यह उनकी शिक्षा का ही ,एक अध्याय का ही हिस्सा है ,उसी का भाग है , यानी वह बच्चों को रूप बदलना सिखा रही थी। समझ में आने पर बच्चों को यह अध्याय मनोरंजक लगा , उन्हें उसका मंत्र भी बताया गया उस मंत्र का वह धीरे-धीरे अभ्यास करने लगे। कभी कोई भयंकर जानवर बन जाता, कभी बहुत बड़ा राक्षस अभी मंत्र, ठीक से काम नहीं कर पा रहे थे।
तब मोना ने उन्हें समझाया, कि यह सब तुम्हें अभ्यास से आएगा ,इसका बार-बार अभ्यास करोगे तभी आएगा, इसका प्रयोग किसी को डराने के लिए नहीं बल्कि अपनी सुरक्षा के लिए भी कर सकते हैं।
जब तन्मय अपनी कक्षा में पहुंचा , डेविड सर! बच्चों को किसी के शरीर पर कैसे काबू किया जाता है ?यह सिखा रहे थे , तन्मय को देखते ही बोले -मेला देख आए , उनकी बात सुनकर तन्मय घबरा गया और सोचने लगा , इन्हें कैसे मालूम ? कि हम सब बच्चे मेला देखने गए थे।
अभी वह यह सब सोच ही रहा था, तभी वह बोले -हम तुम्हारे अध्यापक हैं, यानी शिक्षक, हमारे विद्यालय में जो भी विद्यार्थी आता है, उसकी सम्पूर्ण जानकारी हमें होती है। यदि मैं वहां समय पर वहां नहीं पहुंचता , तो वह तांत्रिक तुम्हें नहीं छोड़ता , इस तरह बिना बताए ,विद्यालय से बाहर जाना तुम बच्चों के लिए ,खतरे से खाली नहीं है। मैं मानता हूं ,बच्चों को उत्सुकता होती है, खेल देखने की, मेला देखने की , किंतु हमारी दुनिया से अलग एक दुनिया और भी है , वह है ,इंसानों की दुनिया , उस दुनिया में ऐसे इंसान भी रहते हैं जो भूत, प्रेत, जिन्नात ,पिशाच किसी से भी नहीं डरते , बल्कि वह अपने मंत्रों के बल पर अपनी काली शक्तियों के दम पर उन्हें नियंत्रित करने का साहस रखते हैं।
इसका मतलब, इंसान हम लोगों से बहुत ताकतवर हैं , तन्मय ने प्रश्न किया।
नहीं , सभी नहीं हैं , कुछ इंसानी जीव तो, हमारे नाम से ही डरते हैं , किंतु कुछ इंसान जैसे अघोरी तांत्रिक ,पंडित इस प्रकार के जीव हमारी शक्तियों से नहीं डरते , बल्कि हमारा डटकर मुकाबला करते हैं, और अपनी शक्ति के आधार पर ,हमें कैद करने की क्षमता भी रखते हैं , इसीलिए हमें ऐसे इंसानों से बचना है। आज मैं तुम्हें सिखाऊंगा कि किसी इंसान से,अपना बदला लेने के लिए , कैसे उसको ,अपने काबू में किया जाता है ? उससे अपनी इच्छा अनुसार कार्य करवाया जाता है , शक्तियां हममें भी होती हैं किंतु हम अपनी शक्तियों का दुरुपयोग तब तक नहीं करते जब तक कोई हमें छेड़े नहीं , हम अपने लोक में शांत रहना पसंद करते हैं किंतु जब कोई इंसान हमें तंग करता है , या हमें इंसानी रूप में उसने सताया हो ,तब हम उससे बदला लेते हैं , तब हम उन्हें अपनी शक्ति का एहसास कराते हैं और उसके शरीर को अपने वश में कर लेते हैं , तब हम जैसा चाहेंगे ,वह वैसा ही करेगा , उसका शरीर हमारी इच्छाओं का गुलाम हो जाता है।
तभी तन्मय को , डिकोस्टा अंकल वाली बात भी याद आ गई , किस तरह उन्होंने उस लड़की के शरीर पर काबू करके, उसी लड़की से उन गुंडों को पिटवाया था , अच्छी विद्या है ,इसे सीखना चाहिए।
सूरज ने भी , भूतों के प्रकार के बारे में जाना ,' छलावा भूत' क्या होते हैं ,'चुड़ैल 'क्या होती हैं ? पिशाच कौन होते हैं ? ब्रह्मराक्षस कौन होते हैं ? भूत बदला क्यों लेते हैं ? इत्यादि चीजों की जानकारी उसने ग्रहण की।
जब बच्चों की छुट्टी हुई तब उन्हें , खुले आसमान के बीच बुलाया गया , सभी 'भूत बच्चे 'उस विद्यालय के मैदान में एकत्रित हो गए थे। जो नए बच्चे थे उनको , किसी विशेष दिन के लिए, विशेष वस्त्र और नाम दिए गए। कुछ बच्चों को काले वस्त्र दिए गए , जो उन्हें सप्ताह में एक दिन पहनने थे , कुछ बच्चों को नीले वस्त्र दिए गए , कुछ बच्चों को कांटों से भरे वस्त्र दिए गए , उन पर कांटे नहीं लगे हुए थे वरन उन पर कांटे छपे हुए थे। और कुछ बच्चों को कपाली के कपड़े दिए गए सफेद कपड़े पर कपाल बने हुए थे। नए बच्चे तो कुछ समझ ही नहीं पाए ,यह वस्त्र हमें क्यों दिए जा रहे हैं ?
तभी उनके ''प्रधानाचार्य नटवरलाल जी''की आवाज गूंजती है , सभी बच्चे सोच रहे होंगे, यह आज हमारे साथ क्या हो रहा है ?यह वस्त्र हमें क्यों दिए जा रहे हैं ? वह इसीलिए, सबका एक दिन शिव का होगा।' भोलेनाथ 'का होगा जो हमारे' रक्षक' हैं। इस विद्यालय के सभी बच्चों को चार हिस्सों में बांट दिया गया है जो हमारे रक्षक के नाम पर ही है - पहला समूह है , रूद्र ! जो काले वस्त्र पहनेंगे।
दूसरा समूह है , नील ! हमारे 'नीलकंठ 'के नाम पर ,नीले वस्त्र पहनेंगे।
तीसरा समूह है , शूल !''शूलपाणि ''के नाम पर ,उनके शूल को हम धारण नहीं कर सकते ,इसीलिए इन वस्त्रों पर कांटे बने हैं।
चौथा समूह है ,कपाली ! 'कापालिक' के नाम पर ,उन वस्त्रों पर कपाल बने हैं। तुम सभी को अपने -अपने समूह से परिचित करा दिया गया है इसीलिए अब सभी अपने समूह की उन्नति के लिए हमेशा अग्रसर रहें ,अगले माह ,सभी समूहों को अंक दिए जायेंगे। जो भी जीतेगा उसे विशेष पुरुस्कार प्राप्त होगा।
तभी ,अफ़रोज बोला -ये तो उसी तरह है ,जैसे हम ''भूलोक ''में अपने -अपने हाउसों में थे ,यानि यहाँ भी ''हाउस सिस्टम'' है।
तुम लोग सही समझे हो ! हा हा हा हा हा हा हा

