गांववालों के सामने ,जमींदार साहब ने ,अपनी जमीन के कुछ हिस्से ,हरिया के परिवार को दिए ,जैसा कि उन्होंने जीते जी हरिया से वायदा किया था और पांच एकड़ जमीन दीनदयाल के परिवार को देने की घोषणा की। इससे पंडित जी परेशान हो उठे ,धन का लालच उन्हें भी था ,उन्होंने सोचा -इस तरह तो ,ये अपने 'मन का बोझ' कम करने के लिए ,सम्पूर्ण जमीनें बाँट देंगे। तब पंडित जी ने उन्हें ,उनके भाषण के मध्य में ही रोककर ,बोले - गांववालों देखिये ! जमींदार साहब ने अपनी गलती भी मानी है ,और उसका पश्चाताप भी कर रहे हैं। तभी अचानक से एक आदमी आकर उन्हें बताता है ,ठाकुर साहब !अपने घर पर हैं ,सभी को उसकी बात सुनकर आश्चर्य होता है। तब एक ने पूछ ही लिया -वो घर कैसे पहुंचे ?
या लठैतों को ही ,आगे करके डर के कारण ,घर भाग गए ,उसकी बात सुनकर सभी हंसने लगे। उनका हंसना भी स्वाभाविक था ,उस समय तो पंडित और जमींदार के प्रति कितना अनाप -शनाप कह रहे थे ? ,और अब घर में मुँह छिपाये बैठे हैं।अब उन्हें अपने लठैतों की भी कोई चिंता नहीं।
अब ये तो वो ही बता सकते हैं ,किन्तु उनकी पत्नी ने कहा है -'उनकी तबियत ठीक नहीं। '
ठीक है ,आओ ! तुम भी यहाँ आकर बैठ जाओ और ध्यान से उस शैतान को पकड़ने की योजना सुनो !पंडितजी ने उससे कहा।
ठीक है ,कहकर वो भी उस सभा का हिस्सा बन गया।
वो पिशाच है पिशाच !उसे ताकत से नहीं ,चतुराई से ,आत्मा की शुद्धता से ,ईश्वर की कृपासे ही ,उसे पकड़ा जा सकता है ,उसके पश्चात ,उसकी मौत का उपाय ढूँढना होगा।
जब पंडित जी ने ,''उसकी मौत का उपाय कहा ''एक बारगी जमींदार साहब हिल गए ,उन्होंने पंडितजी की तरफ देखा किन्तु मन ही मन उस घूंट को पी गए जो उनके लिए बेहद विषैला था।
योजना के तहत ,कुछ गांव के लड़के ,कुछ धार्मिक वस्तुएं लेकर ,पंडित जी के साथ ,उस जंगल की दिशा में चल दिए। सबसे आगे पंडित जी ही थे ,जो किसी सेना के सेनापति की तरह उन लड़कों के समूह का संचालन कर रहे थे। उन लड़कों के पास ,घंटा ,ध्वज ,शंख ,रुद्राक्ष इत्यादि अस्त्र थे। उनकी ध्वनि करते हुए वो लोग ,आगे बढ़ रहे थे। जिससे परेशान होकर , कुंभर्क बाहर आये। हुआ भी ,ऐसा ही ,कुंभर्क उन ध्वनियों को सहन नहीं कर सका और अपने छिपे स्थान से बाहर आ गया। उसे अचानक देखकर पहले तो सभी डरकर पीछे हट गए ,किन्तु पुनः उसे देखकर ,उन्हें अपने आप पर ही हंसी आ गयी। वो एक साधारण सीधा सा मासूम ,लड़का नजर आ रहा था।
पंडित जी ने उन्हें चेतावनी दी -कोई उसके करीब न जाये ,मैं नहीं जानता ये इस समय कितना खतरनाक हो सकता है ?तब कुंभर्क से बोले - पुत्र ,तुम मेरी बात सुन सकते हो ,उसने हाँ ,में गर्दन हिलाई ,तब तुम हमारे संग चलो !
सभी लड़कों ने ,उसके आस -पास एक घेरा बनाया और उससे कुछ दूरी बनाकर चले ,कुंभर्क को लेजाकर मंदिर के समीप ही ,एक खम्भे से बांध दिया ,वो ये सब इतनी सहजता से कर रहा था किसी को भी ,ये विश्वास नहीं हो रहा था कि ये वही रात्रि वाला शैतान है ,जो लोगों को मारकर आसानी से खा भी जाता है। तब पंडित जी ,ने उसकी सजा के विषय में ,विचार -विमर्श किया और निर्णय लिया इसको जिन्दा ही ,अग्नि में जला दिया जायेगा। जमींदार जी ,अपने घर गए ,उनकी पत्नी ने, उनका उतरा हुआ ,चेहरा देखा तो पूछा -क्या हुआ ?
आज कुंभर्क को जिन्दा अग्नि में जला देंगे।
क्या ???कित्नु पंडित जी ने तो कहा था ,कि हम उसे किसी ठंडे इलाके में ले जाएँ ,अग्नि तत्व से तो वो, बना ही है , क्या अग्नि उसे जला सकेगी ?
अभी तो वो किसी अबोध बालक की तरह ,कहना मान रहा है ,मन तो कर रहा था ,पंडित जी से पुछु ,क्या कोई और उपाय नहीं है ?किन्तु अब सभी लोगों के सामने इतना शर्मिंदा होना पड़ गया अब कुछ भी ,कह सुन नहीं सकता।
मैं एक नजर उसे देखना चाहती हूँ।
कोई लाभ नहीं ,अब उसका अंत समय आ गया ,तुम गयीं तो उसे देखकर ,सहन नहीं कर पाओगी कि अब वो हमसे दूर होने जा रहा है।
जैसा भी है, हमारा बेटा है ,अंत समय में ही सही ,हमें उसके समीप होना चाहिए ,वहीँ जाकर शायद हम उसे बचा सकें।
इतना सब होने के पश्चात भी तुम उसकी ज़िंदगी की तमन्ना कैसे कर सकती हो ?वो तो मैंने अपने जमीनें देकर गांववालों का मुँह बंद किया है। वो तांत्रिक भी तो पता नहीं, किधर गए ? सारा ये कांड रचाया हुआ तो उन्हीं का है। इस समय बचाने नहीं आ सकते।
नहीं जी , अब मुझसे रुका नहीं जा रहा ,मैं उसकी एक झलक देखना चाहती हूँ ,कहकर उन्होंने जमींदार की आज्ञा लिए बिना ही बाहर निकल गयीं। वहाँ जाकर देखा ,उनका भोला सा बालक ,खम्बे से बंधा है ,उसे देखकर उन्होंने उसे पुकारा - कुंभर्क !
उसने उनकी तरफ देखा और मुस्कुराया ,अपने बालक की मुस्कान देखकर ,वो मोहित सी हो गयीं ,और उनकी आँखों से अश्रुधारा बह निकली। कुंभर्क को अब रात्रि की बातें स्मरण रहतीं हैं किन्तु करे भी क्या ?उसका स्वयं पर ही ,वश नहीं रहता ,उसे तो जैसे उस तांत्रिक ने जीवन नहीं 'श्राप 'दिया है। तभी वे मंदिर के अंदर गयीं ,और पंडितजी को ढूंढने लगीं ,पंडित जी ,मंदिर के पीछे के हिस्से में पड़ी ,लकड़ियों को इकट्ठा कर रहे थे। पंडित जी ये क्या हो रहा है ?क्या और कोई उपाय नहीं है ,वे गिड़गिड़ाते हुए बोलीं।
अब मैं ,क्या कर सकता हूँ ?मेरे हाथ से बात निकल चुकी है ,अब इसमें गांववाले शामिल हो चुके हैं ,उनके कितने लोग इसने मार डाले हैं ?लोगों का क्रोध तो निकलेगा ही।
पंडित जी ,उस समय तो इसे अपने आप का भी पता नहीं होता ,उसका अपने आप पर वश नहीं रहता।
ये बातें मैं, जानता हूँ किन्तु गांववाले नहीं ,मैंने जमींदार साहब को पहले ही चेतावनी दी थी और सुझाव भी दिया था कि उसे कहीं दूर लेकर चले जाएँ किन्तु उन्होंने मेरा कहना नहीं माना।गांव में इतने हादसे हो चुके हैं ,अब कोई माफी भी नहीं ,कहकर वो अपने काम में जुट गए।
गांव में अब इसी बात की चर्चा थी ,कि इतना सीधा से दिखने वाला लड़का, इतना खूंखार कैसे हो सकता है ? कुंभर्क के चारों तरफ लकड़ियाँ ,उपले इत्यादि सामानों की ढ़ेरी लगाई जा रही थी। कितना ह्रदय विदारक दृश्य होगा ?जब , जिंदा शैतान अग्नि के हवाले कर दिया जायेगा। पंडित जी ने चेतावनी दी ,दिन छिपने से पहले ही ,इसका अंत करना होगा किन्तु कुछ शैतान लड़के जिन्हें शैतान के अस्तित्व पर विश्वास ही नहीं था। देरी कर रहे थे ,शाम के समय मंदिर में ,पूजा आरती का समय हो गया ,उस आरती की ध्वनि जब कुंभर्क के कानों में पड़ी ,तब उसे बहुत ही पीड़ा हो रही थी ,उसकी आवाज में गुर्राहट की आवाज सुनाई दे रही थी किन्तु आरती लगभग एक घंटा चली ,शायद ,ये सब वो बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसकी गर्दन एक तरफ को लुढ़क गयी।

