Shrapit kahaniyan [part 46]

ये ''अनजान व्यक्ति ''कुछ ज्यादा ही तेज है ,और नए -नए प्रश्न पूछता है , पहले तो जमींदार साहब उसे अपने यहाँ काम पर रखना चाहते थे किन्तु उन्हें लगा ,किसी भी अनजान को ,इस तरह घर में रखना ठीक नहीं ,उनकी नजरों में वो जरूरत से ज्यादा तेज है। तब जमींदार साहब और उनकी पत्नी ने निर्णय किया , इसको यहाँ  रखना ठीक नहीं। तब जमींदार साहब ,उसको उस कमरा कहो या हॉल उसमें ले गए ताकि उसके प्रश्नों से बच सकें। कमरे ही हालत देखकर ,वो प्रसन्न हुए और बोले -अच्छी सफाई की है। 

तब उसने पूछा -वो दरिंदा कौन था ?जिसने जानवर तो जानवर, इंसानों  को भी नहीं छोड़ा। 

जमींदार साहब ,उसके इस तरह के अचानक प्रश्न से मन ही मन घबरा गए ,और सोचने लगे ,ये आदमी जैसा दीखता है ,वो नहीं है ,कहीं ये कोई पुलिस का खबरी  तो नहीं ,जमींदार साहब ! क्या सोच रहे हैं ? इसमें कौन रहता था ? उसकी आवाज से उनकी तंद्रा टूटी। 

कुछ नहीं ,


तब बताइये इस कमरे में कौन रहता था ?

अब मैं क्या जानूँ ?इधर हमारा ज्यादा आना -जाना होता नहीं ,ये देखो !उधर की तरफ से तो ताला लगा हुआ है। जब ये दीवार टूटी ,तब हमें मालूम हुआ कि इस कमरे में कितनी गंदगी है ?वरना हमें तो पता ही नहीं चलता, कि यहाँ इतना गंदा पड़ा है। 

जब आपके घर के इस हिस्से की दीवार टूटी तभी, ये हादसा हुआ। 

क्या हादसा हुआ ?अनजान बनते हुए जमींदार साहब ने पूछा। 

क्या, आप कुछ नहीं जानते ?कल जो गांव में इतने लोगों की मौत हुई ,इनका कौन जिम्मेदार हैं ?

ए..... तुम कौन हो ? तुमने अपना कार्य किया और अपने पैसे लेकर जाओ !

एक कमरे की सफाई के लिए ,कौन सोने की गिन्नी देता है ?

क्या कह रहे हो ? 

हाँ ,आपकी पत्नी ने ,इस कमरे  की सफाई के लिए ,सोने की गिन्नी देने का वायदा किया है ,ये सोने की गिन्नी उस कमरे की सफाई के लिए ही नहीं वरन इस कमरे के रहस्य को छुपाने के लिए भी दी जा रही है। 

इस कमरे का क्या रहस्य है ?जमींदार साहब ,उस पर भड़के ,तुम अपनी औकात से बाहर जा रहे हो। तुम्हें गरीब  समझकर ,उसने काम क्या दे दिया ? तुम तो जासूसी पर उतर आये। 

जी हाँ , मैं जासूस तो नहीं किन्तु मैं अपनी जिम्मेदारी पूर्ण कर रहा हूँ। 

कैसी जिम्मेदारी ?

यही ,ये पता लगाना ,कि आखिर इन हत्याओं के पीछे किसका हाथ है ?

उसकी ये बात सुनकर जमींदार साहब घबरा गये और  बोले -आखिर तुम कौन हो ?

जी मैं इंस्पेक्टर कालीचरण हूँ ,कल थाने  में एक आदमी आया था और उसने आपके और आपके बेटे के विरुद्ध रपट लिखवाई थी ,उसे शक़ है ,इन हत्याओं के पीछे आपके बेटे का हाथ है। 

जमीन्दार साहब !उसकी बात सुनकर सोच में पड़ गए ,गांव में ऐसा कौन व्यक्ति हो सकता है ?जो हमारे विरुद्ध थाने में रपट लिखाये ,बहुत सोचने के पश्चात भी ,कोई ऐसा व्यक्ति नजर नहीं आया जो उनके विरुद्ध जाने की हिमाकत कर सके। तब उन्होंने इंस्पेक्टर साहब से पूछने में ही अपनी भलाई समझी ,वो सोच रहे थे ,जरा पता तो चले ,इस गांव में ऐसा कौन व्यक्ति है ?इंस्पेक्टर साहब क्या मैं ,आपसे जान सकता हूँ ,हमारे विरुद्ध जिसने भी ये रपट लिखाई है ,वो कौन है ?

जी नहीं ,हम आपको उसका नाम नहीं बतला सकते ,उसने हमें बताया इससे उसकी जान को भी खतरा हो सकता है। 

ओह ! तब आप ये बताइये , इस जगह की सम्पूर्ण सफाई आपने ही की ,जी नहीं , आपकी पत्नी के जाते ही मेरे दो आदमी ,यहाँ आ गए क्योकि हमें सबूत भी चाहिए थे ,किसी के इस तरह रिपोर्ट दर्ज कराने पर ही तो हम आपके विरुद्ध कार्यवाही नहीं कर सकते ,इसीलिए हमें सबूत की आवश्यकता होगी ,तब ये मौका हमें आपकी पत्नी के द्वारा मिला। 

तब आपको हमारे विरुद्ध क्या सबूत मिले ?


सबूत तो बहुत कुछ कह रहे हैं ,इतना कह रहे हैं कि यहाँ पर हत्यायें होती रहीं हैं ,बडे ही भयानक तरीक़े से मारा गया है ,उस दरिंदे की भूख को शांत करने के लिए ,जानवरों को भी मारा गया है। एक इंसान का कंकाल भी मिला है। कौन था ? वो ! इंस्पेक्टर कालीचरण ,अपनी पैनी नजरों को ,उनके चेहरे पर गड़ाते हुए बोला। 

मैं क्या जानूँ  ? तब तक वो उसकी बातों से सतर्क हो गए थे। 

देखिये जमींदार साहब ,हमने सभी कंकाल अपने कब्ज़े में ले लिए हैं ,जिनको जाँच के लिए भेजा जायेगा ,अब आपकी भलाई इसी में ही है ,कि आप हमारे साथ 'कॉपरेट 'करें। लोग गायब हो रहे हैं ,हत्याएं हो रहीं हैं। कोई न कोई तो इसके पीछे है ,जिसने भी हमें , शिकायत दर्ज करके दी है ,उसके पास भी तो कुछ न कुछ सबूत ऐसे होंगे ,जिनकी बिनाह पर ,उसने आपके विरुद्ध शिकायत दर्ज की है। हम उससे भी जानकारी लेंगे। 

अब आप घर चलिए ,जो भी आपको सबूत लेने हैं ले लीजियेगा ,किन्तु अब घर चलकर थोड़ी चाय -नाश्ता हो जाये ,जमींदार साहब उसकी खुशामद के लहज़े में कहा। 

जी नहीं ,कल चाय पी थी ,अच्छी बनी है किन्तु अब मैं चलना चाहूंगा। 

आप अपना मेहनताना तो लेते जाइये ,जमींदार साहब ने उसे रोकने का प्रयास करते  हुए कहा।

जी नहीं ,आप अपनी गिन्नी किसी गरीब को दान में दे दीजिये ,ताकि कुछ पाप धुल जायें। 

अब आप ये ज़्यादती कर रहे हैं ,देखिये ,अभी हमारा कोई भी जुर्म साबित नहीं हुआ है ,न ही हमने हत्याएं की हैं ,न ही हमारा इनमें कोई हाथ है ,हमारा कोई दुश्मन ही होगा जिसने हम पर ये झूठा इल्जाम लगाया है। 

उसे भला इस सबसे क्या हासिल होगा ?

हो सकता है ,उसकी  दृष्टि हमारी सम्पत्ति पर हो ,ये कहते ही जैसे जमींदार साहब की भी जैसे अंतर्दृष्टि खुल गयी और उनके मानस पटल पर पंडित जी का नाम स्मरण हो आया किन्तु कालीचरण से कुछ नहीं कहा ,प्रत्यक्ष बोले -चलिए ,आइये !जब हमारा जुर्म साबित हो जायेगा ,तब हम आपसे कुछ नहीं कहेंगे। 

कालीचरण बिना ना नुकुर किये ,जमींदार साहब के संग चल दिया ,उसने सोचा -बातचीत करके ही शायद कुछ सबूत मिल जाये ,रास्ते में उसने जमींदार साहब से पूछा -आपका बेटा नजर नहीं आ रहा ,वो कहाँ है ?

जी वो तो ,पढ़ने के लिए बाहर गया है ,कहकर घर के अंदर घुसे और अपनी पत्नी से चाय -नाश्ते का प्रबंध करने के लिए कहा ,उनकी पत्नी ने कालीचरण को उनके साथ देखा तो ,उन्हें कुछ अजीब लगा ,कल तक जो काम की तलाश में उनसे काम मांग रहा था ,इस समय बड़ा रौबीला आदमी नजर आ रहा था और उसके कपड़े भी बदल चुके थे। इशारों से अपने पति को अंदर बुलाया ,जमींदार साहब के अंदर जाने पर ,उनसे बोलीं -आपने इसे अभी तक चलता नहीं किया ,इसे लेकर वापस आ गए। 

ये कोई सफाईवाला नहीं ,उन्होंने जैसे रहस्य खोला ,तुमने बैठे -बिठाये मुसीबत मोल ले ली है ,ये ''इंस्पेक्टर  कालीचरण ''है ,जो हमारे विरुद्ध सबूत इकट्ठा करने आया है। 

क्या ???? वे ये सुनकर हैरत में पड़  गयीं।   

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                    

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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