उसे काटा गया ,
उसे तोडा गया ,
कई दिन लग गए ,
तोड़ने वाले भी......
थक गए।
तब जाकर वो.......
भरभराकर आखिर ,
गिर ही गयी।
उसमें न जाने....
कितने ?स्वप्न !
दफ़न थे।
न जाने कितने ?
अरमान.......
न जाने कितने ?
कर्म [झूठ ,छल -कपट ]
आज वो मलबा बनी ,
धराशाही है।
कल जो ,कभी......
ऊँची इमारत बन ,
इठलाती थी।