Trikoniy prem

त्रिदेव ,त्रिवेणी ,त्रिमूर्ति ,

सभी सराहनीय ,वंदनीय हैं। 

प्यार की परिधि नहीं ,


 'त्रिकोणीय प्रेम ', निंदनीय है ?

प्यार के हिस्से में ,खींचतान  है ? 

पत्नी प्रेम ,माता -पिता के लिए सबब ,

बच्चे ,अन्य रिश्ते बराबर नहीं। 

सब चलता है ,उलझता है। 

घरवाली ,बाहरवाली ये ट्रैंगल ,

बनता नहीं ,बिगड़ता है। 

एक सिरा पकड़ा ,तो दूसरा छूटता है। 

जो करते हैं ,'ट्रैंगल प्रेम 'पछताते हैं। 

जीवन से लड़ जाते हैं ,न  इधर के ,

न ही उधर के रह पाते हैं।

कुछ पाते हैं ,तो बहुत कुछ खो जाते हैं।   

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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