Nyi ummid

नई उम्मीदों संग ,

दिलों को जोड़ते हैं। 

 रिश्तों  में ,खोई ,

उम्मीदों में ,

रंग भरते हैं। 


 अधूरी रह  गयीं ,

जो  ख़्वाहिशें ,

उन्हें पूर्ण  करते हैं। 

बेरंग उम्मीदों में ,

नवीन रंग भरते हैं। 

इंतजार की दहलीज़ से  ,

नई उम्मीदें जोड़ते हैं। 

ख़ामोश रह गए ,

जो लम्हें !उनमें ,

लबों की 'नई उम्मीद' भरते हैं। 


                                  अधिक उम्मीद न लगा ,ऐ दोस्त !इन रिश्तों से ,

                                              इन्हें टूटते देर नहीं लगती। 







laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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