नई उम्मीदों संग ,
दिलों को जोड़ते हैं।
रिश्तों में ,खोई ,
उम्मीदों में ,
रंग भरते हैं।
अधूरी रह गयीं ,
जो ख़्वाहिशें ,
उन्हें पूर्ण करते हैं।
बेरंग उम्मीदों में ,
नवीन रंग भरते हैं।
इंतजार की दहलीज़ से ,
नई उम्मीदें जोड़ते हैं।
ख़ामोश रह गए ,
जो लम्हें !उनमें ,
लबों की 'नई उम्मीद' भरते हैं।
अधिक उम्मीद न लगा ,ऐ दोस्त !इन रिश्तों से ,
इन्हें टूटते देर नहीं लगती।
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