अभी कलेंडर बदलना है ,
एक सुंदर कलेंडर !
जिसमें देखना है।
पंचांग चैत्र मास का
जब कोयल कूकेगी।
सर्द हवाओं से बच ,
जब रजाई छूटेगी।
अमुआ पर बौर लगेगी।
फूलों पर तितली मड़रायेगी।
जब फसल लहराएंगी।
चहुँ ओर ,रंगीनी छाएगी।
फ़सल ख़ुशहाली लाएगी।
मन की चाहत रंग लाएगी।
तब समझो ,नववर्ष की झाँकी आयेगी।