हर जीव में शक्ति है ,
'' उसका ''ही अंश.....
हर जीव,हर मानव है।
हर नारी में शक्ति है।
उस रूप में महाशक्ति
की पहचान कौन करे ?
अंश है ,तू भक्ति का ,
ये ज्ञान तुझमें ,कौन भरे ?
शक्ति तेरे रूप अनंत ,
ये अवतार कौन धरे ?
शक्ति पुंज बन तू ,
महाशक्ति कौन बने ?
अमृत को पीने वाले ,
विष प्याला कौन पिए ?
लूटी किसी की दुनिया ,
दुनिया में रंग कौन भरे ?
शक्ति हर मानव में ,
'महाशक्ति 'कौन बने ?
रोते को हंसा ,भूखे को खिला ,
ऐसी सेवा कौन करे ?
धरा पर भार है ,शक्ति अनंत ,
उस धरा का मान कौन धरे ?
एक वही महाशक्ति है ,
पहचान उसकी कौन करे ?
