कोर्ट कचहरी के चक्कर में पड़ ,होना नहीं बर्बाद।
इनके चक्कर में जो पड़ा ,हुआ नहीं कभी आबाद।
हुआ नहीं ,आबाद !लगाते ,लगातार इसके फेरे ,
नहीं रही जमीन -जायदाद ,पहुंच गए कितने डेरे ?
पहुंच गए डेरे ,अब तमन्ना है ,यही घर रहे आबाद ,
घर रहे आबाद , न होना कोर्ट के चक्कर में बर्बाद।
इन सरकारी कामों में पड़ ,बन गए कई घनचक्कर !
बने कई घनचक्कर ,मिले न न्याय न लो इनसे टक्कर।
मिला कभी न न्याय आजतक ,मन की कोर्ट में झांको ,
मिले तुरन्त ही न्याय ,इधर -उधर न ताको।
इधर -उधर न ताको ,खुद ही बनो वकील ,खुद ही जज ,
न ही किसी की सिफ़ारिश , न देनी पड़े किसी को फ़ीस।
न देनी पड़े फ़ीस ,ऊपरवाला देख ,स्वयं हैरान होगा ,
अब जरूरत नहीं किसी की ,तुरंत ही न्याय होगा।
