Court

 कोर्ट कचहरी के चक्कर में पड़ ,होना नहीं बर्बाद।

इनके चक्कर में जो पड़ा ,हुआ नहीं कभी आबाद।

 


हुआ नहीं ,आबाद !लगाते ,लगातार इसके फेरे ,

नहीं रही जमीन -जायदाद ,पहुंच गए कितने डेरे ?


पहुंच गए डेरे ,अब तमन्ना है ,यही घर रहे आबाद ,

घर रहे आबाद , न होना कोर्ट के चक्कर में बर्बाद।

 

 इन सरकारी कामों में पड़ ,बन गए कई घनचक्कर !

बने कई घनचक्कर ,मिले न न्याय न लो इनसे टक्कर।

 

मिला कभी न न्याय आजतक ,मन की कोर्ट में झांको ,

मिले तुरन्त ही न्याय ,इधर -उधर न ताको। 


इधर -उधर न ताको ,खुद ही बनो वकील ,खुद ही जज ,

न ही किसी की सिफ़ारिश , न देनी पड़े किसी को फ़ीस।

 

न देनी पड़े फ़ीस ,ऊपरवाला देख ,स्वयं हैरान होगा ,

अब जरूरत नहीं किसी की ,तुरंत ही न्याय होगा।  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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