दूर रहकर भी ,तेरा प्यार बुलाता है ,मुझे,
तेरे दूर जाने पर ,ये ज़माना क्यों आजमाता है ?मुझे !
दूर रहकर भी ,तू क़रीब लगता है ,
तेरा ये यक़ीन ,मुझमें नूर भरता है।
दूर रहकर भी ,तुम आस -पास नजर आते हो ,
मेरी तन्हाईयों में आ ,रूह में समा जाते हो।
दूर रहकर भी ,लगता है ,हाथ थामा है मेरा ,
अपने ही दिल से पूछ बैठती हूँ ,क्या लगता है ?तेरा !
अगर तुम साथ हो !
तू ही तू है,हर कहीं नजर आता है ,मैं तेरी पनाहों में ,
मुझे झुका सकता, ये जमाना नहीं ,'अगर तुम साथ हो.''
महकी हूँ ,तेरी यादों से ,उलझी हूँ तेरे वादों से ,
लड़ जाऊँ ,तेरे लिए इस दुनिया से ,''अगर तुम साथ हो।''
अँखियों की खिड़की से ,दिल के आईने में तुझे निहारती हूँ।
सब कुछ इस दुनिया का , तुझ पर वारती हूँ ,''अगर तुम साथ हो।''

