Behisab mohabbt

मोहब्बत ! इक  प्यारा एहसास होती है ,

न कम न ज़्यादा ,वो तो' बेहिसाब' होती है।



मोहब्बत के मारो को 'दिलजले 'भी कहते हैं ,

वे तो मोहब्बत में फ़ना ,उसी के हो रहते हैं। 


ऐसी मोहब्बत, दिखती ही कहाँ है ?इस जहाँ में ,

''बेहिसाब मोहब्बत ''तो ''उससे ''भी नहीं होती।

  

लैला -मजनू ही नहीं ,हर किसी को मोहब्बत होती है ,

वो विशेष मोहब्बत ,हर किसी के लिए नहीं होती । 

 

मोहब्बत शक़्ल -सूरत ,जज़्बातों में ही नहीं सिमटती ,

शिद्द्त से प्यार करने वालों में, रूह से भी मोहब्बत होती है।


उसे याद करते हैं ,जहाँ वाले ! मतलबी हैं ,

बेमतलब तो'' उससे ''भी बात नहीं होती । 


मोहब्बत को न तोल ,इश्क़ के तराज़ू में ,

इश्क़ की किसी से भी, बराबरी नहीं होती ।

 

किसी का भी अंतर्मन ,पाक़ हो ,उसे हर किसी से मोहब्बत होती है। 

मोह्ब्बत में मर -मिटनेवालों में ,हर किसी की पहचान नहीं होती । 

 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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