Banaras

बाबा की नगरी ,काशी !

बचपन से ही सुनती आई। 

गयी नहीं ,मैं उनके पास ,

मेरे मन और विचारों में समाई। 


गंगा तीरे , जिसका वास ,

वो हैं ,बाबा विश्वनाथ !

जिस नगरी ,कभी गयी नहीं ,

फिर कैसे बतलायें ?

कैसे ?उनके गुणगान सुनाएँ। 

यूँ ही ख्यालों में ,बनारस चले आये। 

भोले बाबा की नगरी में ,

चाय ,जलेबी का स्वाद अजब है। 

मोक्ष का ये'' धाम '',गज़ब है।

साड़ी का काम  ,अजब है। 

 पान का भी ,स्वाद गजब है। 

ये नगरी ही अजब -गज़ब है। 

 लोगों ने , सचित्र वर्णन किया ,

लगता है....... 

मैंने घर में ही ,बाबा का दर्शन किया।  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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