Ae diary.....

तेरे कोरे पन्नों पर ,मैं क्या लिखूंगी ?

अपने मन की हर बात लिखूंगी।

  


इसमें थोड़े से अरमान लिखूंगी ,

दिल का हर ,पैग़ाम लिखूंगी।

 

अपूर्ण रह गयीं ,जो ख़्वाहिशें।।

उन ख़्वाहिशों की फ़ेहरिश्त लिखूंगी।


रह गए ,जो कभी ख़्वाब अधूरे ,

उन ख़्वाबों की ताबीर लिखूंगी।

 

सुख -दुःख ,हर पल, तुझ संग जिया ,

तेरे इन पन्नों पर मैं, तेरा एहसान लिखूंगी। 


तू मेरी हमसफ़र ,हमदर्द बन गयी ,

इस रिश्ते को ,इक सलाम लिखूँगी।

 

स्याही के रंगों से ,शब्दों की माला गूथूंगी ,

अपने मन के भावों से ,तेरा शृंगार लिखूँगी। 

 

तेरी लकीरों को ,अपनी कलम से गुदगुदाउंगी ,

हर पल ,हर लम्हा ,जिंदगी का हर राज़ लिखूंगी।  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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