तेरे कोरे पन्नों पर ,मैं क्या लिखूंगी ?
अपने मन की हर बात लिखूंगी।
इसमें थोड़े से अरमान लिखूंगी ,
दिल का हर ,पैग़ाम लिखूंगी।
अपूर्ण रह गयीं ,जो ख़्वाहिशें।।
उन ख़्वाहिशों की फ़ेहरिश्त लिखूंगी।
रह गए ,जो कभी ख़्वाब अधूरे ,
उन ख़्वाबों की ताबीर लिखूंगी।
सुख -दुःख ,हर पल, तुझ संग जिया ,
तेरे इन पन्नों पर मैं, तेरा एहसान लिखूंगी।
तू मेरी हमसफ़र ,हमदर्द बन गयी ,
इस रिश्ते को ,इक सलाम लिखूँगी।
स्याही के रंगों से ,शब्दों की माला गूथूंगी ,
अपने मन के भावों से ,तेरा शृंगार लिखूँगी।
तेरी लकीरों को ,अपनी कलम से गुदगुदाउंगी ,
हर पल ,हर लम्हा ,जिंदगी का हर राज़ लिखूंगी।
