अत्याचार वो सह लेती हैं ,
शिक्षा से वंचित ,रहती हैं।
जान की परवाह न कर ,
कुछ भी कर गुजरती हैं।
शिक्षा के दम पर आगे बढ़ती है।
हम जैसी ही इंसान है ,
हम जैसी ही नारी है।
वो कला की पूंजी है।
सांवले रंग में भी लुभाती है ,
उन्नत भाल है ,
गुणों की खान है ,
गरीबी से जूझती वो ,
उसका दिल विशाल है।
कहने को वो नारी 'आदिवासी' है।
आधुनिक आदिवासी -
अपनी परम्परा ओ रीति -रिवाज़ को तिलांजलि दे ,
उनसे अनजान हम ''आधुनिक ''कहलाते हैं।
अपनी परम्परा अपने रीति -रिवाज़ ,अपनी.....
प्रकृति से प्रेम ,आज भी वे ''आदिवासी ''कहलाते हैं।
गरीबी और उनकी परम्परा ने उनके कपड़े उतारे हैं ,
फ़ैशन और पैसे ने ''आधुनिकता'' के भी वस्त्र उतारे हैं।

