Prem priksha

 नमस्कार बहनों और दोस्तों ! आज हम आपसे प्रेम की बातें करेंगे ,नहीं ,नहीं प्रेम की परीक्षा की बातें किन्तु इससे पहले ,मैं ये जानना चाहती हूँ , प्रेम को ही कितने लोग जानते हैं ? प्रेम कोई ,इंसान नहीं ,' प्रेम 'तो एक सुंदर -प्यारा एहसास है , प्रेम  बड़ा सीधा -साधा ,सच्चा ,कभी -कभी चालाक ,कभी तीव्र होता है।जैसे इंसान की प्रकृति ,वैसा ही प्रेम का रूप।  प्यार में कोई शर्त नहीं होती ,प्यार शर्तों से नहीं किया जाता ,प्यार तो......  हो जाता है। प्यार को कभी सीमाओं में बाँधा नहीं जा सकता। प्यार को  अपनी शर्तों में बांधना ,सीमाओं में बांधना ,प्यार नहीं सौदेबाज़ी है। जिसका प्यार निःस्वार्थ ,निश्छल होता है ,उसके प्यार की कैसी परीक्षा ? यदि परीक्षा कोई लेता भी है तो उस प्यार पर विश्वास नहीं। प्यार में प्रेमी लड़ता -झगड़ता है ,रूठना -मनाना इत्यादि सब करता है  किन्तु साथ नहीं छोड़ता। 



ऐसा  प्यार तो पहले होता था किन्तु आजकल तो ,प्यार कहीं नजर आता ही नहीं ,आजकल तो प्यार सौदेबाजी ही है ,पहली बात तो प्यार होता ही नहीं ,दोस्ती  करते हैं ,वो दोस्ती भी मतलब की  होती है। मतलब पूर्ण होते ही ,दोस्ती भी नहीं रहती , प्रेम तो बड़ी दूर की चीज़ है , रेनू बोली। 

हाँ ,प्रेम तो पहले होते थे ,निःस्वार्थ भाव से होते थे ,प्रेम में विश्वास भी था ,तब उसकी परीक्षा की कोई आवश्यकता भी नहीं ,धोखे की उम्मीद भी नहीं किन्तु आजकल तो कदम -कदम पर धोखा है कृति बोली। 

जब प्यार ही नहीं है तो उसकी परीक्षा कैसी ? यदि आजकल लड़के सीता ढूँढ़ते हैं तो उन्हें भी तो राम बनना होगा ,नंदिनी बोली। 

नहीं ,एक बात है ,तुमने सच्चे दिल से किसी से प्यार किया ,तब तुम किसी के साथ जबरदस्ती नहीं कर सकते कि दूसरा यानि लड़का या लड़की भी तुम्हें प्यार करे। प्यार तो दोनों तरफ से ही होता है ,कोई प्यार कर  भी रहा है ,तब दूसरा आदमी उसका लाभ न उठाये इसके लिए भी तो आदमी को सतर्क रहना होता है ,वरना हमारा समाज तो ऐसा है कि परीक्षा औरत को ही देनी पड़ती है। रावण जान से गया किन्तु परीक्षा सीता को  देनी पड़ी। समाज के नियमों को तो राम भी झुठला नहीं सके सपना बोली। 

तब परीक्षा नारी को ही  क्यों देनी पड़ती है ?पुरुष क्यों नहीं देते ?क्या वो धोखेबाज़ नहीं होते ,एक पत्नी घर में होगी तब भी अन्य जगहों पर चोंच लड़ाते रहते हैं। पत्नि और परिवार के साथ -साथ अपने आपको भी धोखा देते हैं करुणा ने पूछा। 

प्रेम एक व्यक्ति द्वारा नहीं होता वरन प्रेम करने के लिए एक साथी  की आवश्यकता होती है ,जिस पर तुम अपना प्रेम ज़ाहिर कर सको ,उस पर अधिकार रख सको ,ये भी नहीं होता कि अधिकार की भावना तुममें है  किन्तु कर्त्तव्य की भावना नहीं ,प्रेम को आगे बढ़ाने के लिए ,स्वार्थ और लालच की भावना को भूलकर बाक़ी अन्य भावनाएं थोड़ी -थोड़ी होनी चाहिए ,थोड़ा विश्वास भी। 

सही कहा ,तुमने !किन्तु आजकल त्याग की भावना वाला प्रेम नहीं है ,और ये दोनों ही तरफ से होता है किन्तु अब स्वार्थ और लालच आ गया है ,अब तो कौन सा लड़का तुम्हारे खर्चे उठा रहा है ,या उठा सकता है किसके पास अधिक पैसा है  ? ये देखा जाता है। वो प्रेम तो कहीं मर गया है। तब उसकी परीक्षा कैसी ?

चलिए अब अपनी इसी चर्चा को यहीं समाप्त करते हुए ,कहते हैं ,प्रेम एक सुंदर भावना है ,यदि प्रेम है तब उसकी परीक्षा कैसी ?इस तरह का प्रेम आज के समय में मिलना जैसे असम्भव सा है किन्तु प्रेम का अस्तित्व अभी भी समाप्त नहीं हुआ , किन्तु आजकल प्रेम करते हुए भी सौ बार सोचना पड़ जाता है। और सोच -विचार कर प्रेम नहीं किया जाता,'' वो तो हो जाता है।'' 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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